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Pulwama Attack के 3 साल : जब प्यार के पर्व के दिन हुआ था नफरत से भरा हमला, यादें आज भी कर देती है आंखे नम

 Pulwama Attack को पूरे  हुए 3 साल : जब देश ने खोये थे 40 जवान, सभी आँखें थी नम


Highlights:

  • Three Years of Pulwama: हमले में 40 जवान हुए थे शहीद
  • जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी जिम्मेदारी
  • हमले के कुछ दिनों के बाद भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में किया था एयर स्ट्राइक!

Pulwama Attack को पूरे हुए 3 साल  दिनांक 14 फरवरी, 2019, आज से लगभग 3 साल पहले किसी ने सोचा भी नहीं था की अन्य दिनों की तरह सामान्य लगने वाला यह दिन हिन्दुस्तान के इतिहास में एक भयंकर त्रासदी का रूप धारण करेगा।

इस दिन जम्मू-कश्मीर के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक ‘पुलवामा हमले’ को अंजाम दिया गया था। इस हमले में देश ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 40 वीर जवान शहीद हो गए थे।

पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। जैश के आत्मघाती हमलावर ने पुलवामा जिले में 100 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक ले जा रहे एक वाहन से सेना के एक बस को टक्कर मार दी थी। जिहाद के नाम पर इस घटिया हमले में कई जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, मंजर इतना दर्दनाक था की कई जवानों की पार्थिव शरीर के सारे अंग तक नहीं मिल पाए थे।

उस हमले के बाद विश्व निकाय संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, सऊदी अरब, श्रीलंका और बांग्लादेश सहित दुनिया भर के देशों ने क्रूर पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की थी और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को अपना समर्थन दिया था।

कैसे हुआ था हमला?

14 फरवरी 2019 को, 2,500 से अधिक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों को जम्मू से श्रीनगर ले जाने वाले 78 वाहनों का एक काफिला राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर यात्रा कर रहा था। काफिला जम्मू से लगभग 03:30 IST पर रवाना हुआ था और बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों के कारण दो दिन पहले ही हाईवे बंद करवा दिया गया था। काफिला सूर्यास्त से पहले अपने गंतव्य पर पहुंचने वाला था।

अवंतीपोरा के पास लेथपोरा में, लगभग 15:15 IST पर सुरक्षा कर्मियों को ले जा रही एक बस को 100 किलो आईईडी विस्फोटक ले जा रही एक कार ने टक्कर मार दी, टक्कर मरते ही एक विशाल विस्फोट हुआ जिसमें 76वीं बटालियन के 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए और कई अन्य घायल हो गए।

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जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका?

हमले के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने काकापोरा के 22 वर्षीय हमलावर आदिल अहमद डार का एक वीडियो भी जारी किया था, रिपोर्ट्स के अनुसार आदिल एक साल पहले ही इस समूह में शामिल हुआ था। आदिल के परिवार ने उसे आखिरी बार मार्च 2018 में देखा था, जब वह एक दिन साइकिल पर अपने घर से निकला और फिर कभी नहीं लौटा। उसके माता-पिता के अनुसार, भारतीय पुलिस द्वारा पीटे जाने के बाद से वह कट्टरपंथी बन गया था। सितंबर 2016 और मार्च 2018 के बीच, आदिल डार को कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों द्वारा छह बार गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, हर बार उसे बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया।

जवानों की शहादत को हो जायेंगे 3 साल

इस साल  को पुलवामा आतंकी हमले के तीन साल पूरे होंगे, जो कश्मीर घाटी में 1989 के बाद से सुरक्षा कर्मियों पर सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक है।

आइए आगे इस लेख में हम पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े कुछ ख़ास पहलुओं पर नज़र डालते है:

पुलवामा हमले में एनआईए (NIA) की पहली गिरफ्तारी जैश के एक सदस्य की हुई थी जिसने आत्मघाती हमलावर की मदद की थी।

पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान छुट्टी से लौट रहे थे।

पुलवामा आतंकी हमले में इस्तेमाल की गई कार मारुति इको,10 दिन पहले खरीदी गई थी। एनआईए ने पुलवामा आतंकी हमले में इस्तेमाल किए गए वाहन के मालिक सज्जाद भट,  की पहचान करली थी। सज्जाद भट, अनंतनाग जिले का रहने वाला था, वह खुद भी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) में शामिल था। अधिकारियों के मुताबिक वह गिरफ्तारी से भी बार बार बच रहा था।

पुलवामा हमलावर के परिवार का कहना है आदिल सिर्फ 22 साल का था, जब उसने मारुति ईको को राजमार्ग पर एक गली से चलाया और विस्फोटक से लदी कार को सीआरपीएफ के जवानों को ले जा रही बस में टक्कर मार दी। उदासीनता ने उसे हिंसा का विकल्प चुनने के लिए मजबूर किया।

इस्लामाबाद शहर का इस्तेमाल योजना बनाने, अपराधियों को प्रशिक्षित करने और फरवरी 2019 के पुलवामा हमले को अंजाम देने के लिए किया गया था।

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बीएसएफ को मिली थी पुलवामा हमलावरों द्वारा इस्तेमाल की गई एक सुरंग। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और जम्मू पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 150 मीटर लंबी सीमा पार सुरंग का पता लगाया था, जिसके बारे में खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इसका इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भतीजे मोहम्मद उमर फारूक ने पुलवामा को अंजाम देने के लिए भारत में प्रवेश करने के लिए किया था।

हमले के कुछ दिनों बाद, भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के आतंकी शिविरों पर कई हवाई हमले किए, जिसमें “बड़ी संख्या में” आतंकवादी मारे गए।

Conclusion: यह सच है की आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, जिहाद के नाम पर अपने ही देश में दहशत फेलाने से नीच और घटिया काम कोई और नहीं हो सकता। चंद छुट्टियों के बाद अपने घरों से हमारी सुरक्षा के लिए लौट रहें जवानों और उनके परिवारों का बलिदान अमूल्य है।

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Himanshu Jain

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