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क्या प्रियंका गांधी का महिला सशक्तिकरण का नारा, यूपी में लगा पाएगा कांग्रेस की नैय्या पार

प्रियंका गांधी ने महिलाओं को ही सेंटर में रखा है, ताकि एक मजबूत वोट बैंक तैयार किया जाए


उत्तर प्रदेश में अगले साल होने के वाले चुनाव से पहले सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है। हर पार्टी अपने स्टार राजनीतिक नेताओं को मैदान में उतार रही है ताकि जनता तक उनका मैसेज पहुंचाया जाए। इसी बीच कांग्रेस पार्टी भी अपनी गिरती राजनीतिक सीटों को दोबारा से पाना चाहती है। साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने  403 सीटों में से सिर्फ 7 सीटों पर ही विजय पाई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में यह दहाई के आंकडे को पार करते हुए सैंकडे के अंक तक पहुंच पाएंगी।

कांग्रेस के सात के आंकडे को पार करने के लिए पार्टी की महासचिव को प्रियंका गांधी मैदान में उतरी हैं। वह लगातार अपनी सभाओं में यूपी के उत्थान और महिला सशक्तिकरण की बात कर रही है। तो चलिए आज बात करते हैं यूपी में प्रियंका गांधी की चुनावी यात्रा के बारे में।

प्रियंका गांधी की प्रेस कांफ्रेंस

यूपी में चुनावी बुखार तेज होने के साथ ही प्रियंका गांधी भी मैदान में डट गई है। इसी महीने 19 अक्टूबर को लखनऊ में हुई  प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने महिलाओं को सेंट्रर में रखा। प्रियंका की प्रेस कांफ्रेंस का नाम भी महिलाओं पर आधारित था। जिसकी  लाइन कुछ इस प्रकार थी ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’। इस लाइन  के साथ ही प्रियंका गांधी ने विपक्षी पार्टियों को यह बताने की कोशिश की है कि इस चुनाव में वह महिला सशक्तिकरण पर जोर देगी। जिसके मद्देनजर चुनाव के लिए 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया जाएगा। जो यह दर्शाता है कि कांग्रेस ने महिलाओं को साधने की पूरी कोशिश है। जिसमें वह किसी तरह की कमी नहीं रखना चाहती है।

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घोषणापत्र में महिलाएं

 इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अब तक कांग्रेस जिस वोट बैंक के सहारे सत्ता में रही है अब वो धीरे-धीरे उससे दूर होती जा रही है। यूपी में वोट जाति के आधार पर किए जाते हैं इस बात से तो इंकार नहीं किया जा सकता है। जिसमें दलितों का वोट बसपा को जाता है उच्च जातियां (उसमें ब्राह्माण) भाजपा के वोटर हैं और अल्पसंख्कों को वोट पर भी दूसरी पार्टियों की निगाह है। इस हिसाब से कांग्रेस का कोर वोटर कोई बच नहीं रहा है। इसलिए कांग्रेस के लिए अब महिलाएं को ही विकल्प के तौर पर देख रहा है। जिसका कारण यह है कि पार्टी ने महिलाओं पर ज्यादा जोर दिया है। इसका परिणाम क्या होगा यह अभी देखना बाकी है। लेकिन जहां तक दूसरे राज्यों में विधानसभा को देखा जाए तो पार्टियों को सीट दिलाने में महिलाओं का अहम योगदान रहा है। पिछले साल हुए अक्टूबर में बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू के जीतने की पीछे कहीं न कहीं महिलाओं का वोट था। चुनाव से ठीक पहले बिहार सरकार को  महिलाओं को पंचायत सीटों में आरक्षण देना और शराबबंदी का असर देखने को मिला। यही हाल पश्चिम बंगाल में रहा जहां दीदी को जीत दिलाने में महिलाओं को अहम रोल रहा है।  जिसका नतीजा यह है कि कांग्रेस ने ‘हम सात प्रतिज्ञाएं’ से नाम से घोषणापत्र जारी किया। जिसमें महिलाओं के लिए लुभावने वायदे किए गए हैं। जिसमें महिलाओं को 40 प्रतिशत सीट देने से लेकर और स्कूटी देने के तक का वायदा किया गया है। जिससे कहीं-कहीं न महिलाओं को सशक्त करने के साथ-साथ वोट बैंक को मजबूतकरना चाह रही है।

प्रियंका की सोशल मीडिया पर महिलाएं

प्रियंका गांधी यूपी में अपने दौरे के दौरान अक्सर सोशल मीडिया की फोटोस  में महिलाओं के साथ नजर आती है। लखीमपुर खीरी के वाली घटना से लेकर 40 प्रतिशत सीट तक के वायदे तक महिलाओं के साथ ही नजर आ रही है। ‘किसान न्याय रैली’ के दौरान प्रियंका ने रैली की शुरुआत वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर से की थी। जिसमें उन्होंने एक महिला पुलिस के साथ गले मिलते हुए एक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इससे पहले सीतापुर में डिटेंसन के दौरान जहां प्रियंका को रखा गया था वहां की पुलिस कांस्टेबल के साथ फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए यह बताने की कोशिश की थी कि घर बाहर हर जगह महिलाओं का ही बोलबाला है। जो दर्शता है कि महिलाएं कितनी सशक्त है। यह सारी चीजें यही नहीं रुकती गांव, शहर, फ्लाइट हर जगह पर प्रियंका महिलाओं के साथ ही नजर आती है। इससे साफ हो जाता है कि सोशल मीडिया के दौर में महिला वोटर्स को सोशल मीडिया के द्वारा ही रिझाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन देखना है कि क्या प्रियंका इसमें कामयाब हो सकती है कि नहीं।

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