संकट की घड़ी में बनी बेटियां पिता की ताकत, ऑनलाइन क्लास के साथ खेतों में लगा रहीं है धान

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अपने साथ है तो सब आसान है!


कुछ महीनों से चल रहे कोरोना वायरस ने भारत समेत पूरी दुनिया में अपना केहर मचाया हुआ है कोरोना के कारण लोगों के सामने आजीविका चलाने की चुनौती खड़ी हो गयी। आज हम आपको फरीदकोट के गांव घुमियारा के एक ऐसे ही परिवार की कहानी बताने जा रहे है। कोरोना संकट की घड़ी में जब परिवार के सामने आजीविका चलाने की चुनौती आई तो बेटियां बनी पिता की ताकत और घर की आजीविका चलाने के लिए पिता के साथ खड़ी हो गईं। 8वीं और 9वीं कक्षा की छात्रा प्रभजोत कौर और आकाशदीप कौर अपने पिता के साथ खेतों में धान लगाने के साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई भी करती है। चुनौतियां भले कैसी भी हों, परन्तु हार न मानने वालों की ही जीत निश्चित होती ही होती है।

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प्रभजोत कौर और आकाशदीप कौर कैसे बनी अपने पिता की ताकत

फरीदकोट के गांव घुमियारा की प्रभजोत कौर और आकाशदीप कौर ने ये बात साबित कर दी, कि चुनौतियां कैसी भी हों, हार न मानने वालों की ही जीत होती है। गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे पिता का एक ही सपना है कि बेटियां ऊंची उड़ान भरें ताकि उनका जीवन सफल बन सके। लेकिन किसी पता था कि कोरोना जैसी महामारी आएगी। ऐसे में प्रभजोत और आकाशदीप के पिता की जॉब भी चली गयी। प्रभजोत और आकाशदीप के पिता बूटा सिंह कोरोना काल से पहले मैरिज पैलेस में नौकरी करते थे और अपने परिवार की आजीविका चलाया करते थे। मैरिज पैलेस का धंधा ठप हुआ तो बूटा सिंह के सामने परिवार को चलाने की चुनौती आ गई। इस मुश्किल की घड़ी में बूटा सिंह की बेटियां उनकी ताकत बनी।

अभी धान का सीजन चल रहा है ऐसे में बूटा सिंह के पास घर चलाने के लिए आजीविका का कोई सूरत नहीं था तो उन्होंने खेतों में मजदूरी करना ही शुरू कर दिया परन्तु चार बच्चों के परिवार के लिए एक व्यक्ति की मजदूरी के साथ घर की आजीविका चलना मुश्किल था इस लिए प्रभजोत कौर और आकाशदीप कौर ने पिता के साथ खेतों में मजदूरी करना शुरू कर दिया। खेतों में काम करते हुए वो ऑनसाथ लाइन पढ़ाई भी करती है साथ ही दोनों बहने एक ही फ़ोन से वर्चुअल क्लास बारी-बारी से लेती है।

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