कोरोना काल में सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट बना पारले-जी: ये सिर्फ Biscuit नहीं सुनहरी यादें हैं

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पारले ब्रैंड की शुरुआत एक ग्लूकोज़ बिस्किट से हुई: जाने पारले से जुडी कुछ मज़ेदार बातें


80 और 90 के दशक से आज तक के सभी बच्चों की लाइफ का अहम हिस्सा रहा है पारले-जी। पारले-जी बिस्किट कोई आम बिस्किट नहीं है। बल्कि पारले-जी अपने आप में पूरा एक इतिहास है। भारत का शायद ही कोई बच्चा, बूढ़ा या जवान होगा जिसने अपनी लाइफ में कभी पारले-जी बिस्किट न  खाया हो। पारले-जी भारत के सबसे आयकॉनिक चीज़ों में से एक है। पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में पारले-जी एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसे लोगों ने इतना प्यार दिया। भले ही आज पारले ब्रैंड की हज़ारों-करोड़ों कंपनी क्यों न बन गयी हो लेकिन इसकी शुरुआत सिर्फ इस ग्लूकोज़ बिस्किट से हुई। इसी बिस्किट के बदौलत आज पारले इस मुकाम पर पंहुचा है।

लॉकडाउन के दौरान पारले-जी की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल

सोशल मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान पारले-जी की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल आया है। कंपनी की माने तो पिछले 8 दशकों में इस बार पारले ब्रैंड की बिक्री सबसे ज़्यादा हुई है। पारले कंपनी के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि इस दौरान पारले ब्रांड में 5% की ग्रोथ हुई है, जिसमें से 90% सिर्फ पारले-जी की वजह से हुई है। तो चलिए आज हम आपको पारले से जुडी कुछ ऐसे ही मज़ेदार बातें बतायेगे।

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1. पारले-जी की शुरुआत मोहनलाल दयाल ने आज़ादी से पहले 1929 में मुंबई के विले-पारले इलाके में 12 कर्मचारियों के साथ पहली फैक्ट्री की स्थापना की थी। जबकि आज ये सख्या बढ़कर 50,500 तक पहुंच चुकी है।

2. पारले ब्रैंड ने 1938 में बिस्किट बनाने की शुरुआत की थी। इसका पहला बिस्किट साधारण ग्लूकोज़ बिस्किट था जिसे आज हम पारले-जी के नाम से जानते है। पारले ने 1985 में बढ़ते कॉम्पिटीशन के कारण इसका इसका नाम बदल कर पारले-जी कर दिया गया।

3. क्या आपको पता है आज वॉटर-प्रूफ प्लास्टिक पैकेजिंग में बिकने वाला पारले-जी 90 के दशक में बटर पेपर में पैक होकर बिकता था। शायद फिर अभी वो अपने ग्राहक की मांग और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी पैकिंग बदल सकता है।

4. क्या आपको पता है पारले-जी बिस्किट के पैकेट पर छपी बच्ची कौन है? कुछ लोगों का मानना था कि ये बच्ची नीरू देशपांडे है लेकिन ये सच नहीं है ये एक इलस्ट्रेशन मात्र था जिसे एवरेस्ट क्रिएटिव्स के मगनलाल दहिया ने 60 के दशक में बनाया था।

5. नील्सन सर्वे  रिपोर्ट के मुताबिक पारले-जी भारत की पहली ऐसी कंपनी है जिसने रीटेल सेल्स में 5000 करोड़ रुपयों का आंकड़ा पार किया है।

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