सामाजिक

ओरल सेक्स और उससे जुड़े कुछ खतरनाक तथ्य

ओरल सेक्स करना, पड़ सकता है भरी


लोगों को लगता है कि ओरल सेक्स बिलकुल सुरक्षित है, क्यूंकि इससे गर्ववती होने की चिंता नहीं होती और इससे किसी बीमारी के होने का खतरा भी कम रहता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित तरीके से ओरल सेक्स न करने से यौन संबंध बनाने के दौरान होने वाली बीमारियों (एसटीडी) का ख़तरा रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि ओरल सेक्स के दौरान पैदा हुए सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन का कोई इलाज़ नहीं है और दवाओ का भी इसपे कोई असर नहीं हो रहा है। यहाँ तक कि एंटीबायोटिक्स भी बेअसर साबित हो रहे हैं। ये धीरे-धीरे काफी खतरनाक स्थिति में बदलता जा रहा है।

कपल पिक्स
कपल पिक्स

विश्व के 77 देशों के आकड़ों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि फ्रांस, जापान और स्पेन ऐसे देश बन चुके हैं जहाँ ओरल सेक्स के कारण एसटीडी ( यौन संक्रामक रोग) लाइलाज हो चूका है। लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्यूंकि दवाओं ने भी काम करना बंद कर दिया है। पूरी दुनिया में हर साल 7.8 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं और यह संख्या दिन-पर-दिन और बढ़ती ही जा रही है। सेक्सुअल मेडिसिन के विशेषज्ञ का मानना है कि ओरल सेक्स के दौरान एसटीडी फैलने की आशंका रहती है और इससे ह्यूमन पापील्यूमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण, जेनाइटल हर्प्स या सुजाक के संक्रमण का ख़तरा रहता है।

डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का मुख्य कारण असुरक्षित वजाइनल, एनल और ओरल सेक्स है। अगर मुंह में से किसी तरह से ख़ून आ रहा है तो ओरल सेक्स से बचें। इससे भी संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है। सबसे बड़ी मुसीबत ये है कि इसके इलाज के लिए जो एंटीबायोटिक्स दी जाती है, वो सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन के कारण असर नहीं कर रही।

ह्यूमन पापील्यूमा वायरस, इस वायरस का संक्रमण ओरल सेक्स के ज़रिए हो सकता है, इससे कैंसर भी हो सकता है। साथ-ही-साथ डॉक्टरों का ये भी कहना है कि इस रोग का बग बेहद चालक है क्यूंकि ये हर दवा के साथ अपने नए स्वरुप में आ जाता है। अगर कोई इस रोग से ग्रस्त हो गया है तो उसे हरे और पीले रंग का स्राव होता है और पेशाब करते वक़्त दर्द और पीरियड्स के दौरान के खून से उसकी पहचान की जा सकती है।

ओरल सेक्स से जुड़ी पिक्स

ओरल सेक्स से जुड़ी पिक्स

ऐसी ही एक बीमारी अंग्रेजों के समय भी हुआ करती थी जिसका नाम सुजाक हुआ करता था। वैज्ञानिकों का कहना है कि सुपर गनोरिया या सुपर गोनोरिया ( यौन संक्रामक रोग) उसी का खतरनाक स्वरुप है। इस बीमारी में इन्सान के गुर्दे खराब हो जाते हैं। अगर सही समय पर रोग का पता न चल सका या डॉक्टर को नहीं दिखाया तो समस्या बहुत ही गंभीर हो सकती है। अगर समय पर इसका इलाज कराया तो कम-से-कम इस बीमारी के और फैलने या शरीर के दुसरे अंगों को प्रभावित और ग्रसित होने से रोका जा सकता है।

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