मूवी रिव्यू- अटकन चटकन, अच्छी कहानी के कमजोर किरदार और पेशकश

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                             फिल्म की लंबाई कर सकती है बोर

कलाकार- लीडियन नादस्वरम, यश राणे, सचिन चौधऱी, तमन्ना दीपक, अमितृयान, जगदीश राजपुरोहित

डायरेक्ट- शिव हरे

प्रोड्यूसर- एआर रहमान

संगीत- शिवमणी

ओटीटी प्लेटफॉर्म- जी5

स्टार- 2.5

जी5 पर इस सप्ताह बच्चों और म्यूजिक पर आधारित फिल्म अटकन-चटकन रिलीज हुई है. जो चार बच्चों के जीवन पर आधारित है. जिनकी  बचपन की हालात तो बड़ी माली होती है. लेकिन बड़े होकर सब सफल जीवन जी रहे हैं. जिसका मुख्य आधार म्यूजिक है. एक बच्चे को म्यूजिक से इतना प्यार है कि वह इसके लिए अपनी नौकरी छोड़ देता है.

फिल्म में मुख्य किरदार के रुप में गुड्डु(लीडियन नादस्वरम) है. जिसे म्यूजिशियन बनने का बहुत शौक रहता है. वह घर रोज म्यूजिक स्कूल को देखकर वहां जाने का सपना देखता है. लेकिन घर की माली हाल होने के कारण वह वहां पढ़ नहीं सकता है. वह हर चीज को बजाता है और उससे तरह-तरह की धुन निकालने की कोशिश करता है. इसी क्रम में वह एक कबाड की दुकान पर नौकरी करने लगता है. जहां उसे कई तरह का कबाड़ मिल जाता है जिससे वह अपने लिए म्यूजिक इंस्ट्यूमेंट तैयार कर लेता है. गुड्डु कबाड़ की दुकान में काम करता है. और उसका दोस्त माधव पटरी पर किताबें बेचता है. इन सबके बीच दो और बच्चों की एंट्री होती है जो पहले भीख मांगते हैं और बाद में गुड्डु को गाने बजाने के लिए प्रेरित करते हैं. यही से इन चारों बच्चों की जिदंगी बदलनी की कहानी शुरु होती है. जिसमें वह उस स्कूल में  पहुंचते है जहां जाने का सपना गुड्डु देखा करता है. यह सब संभव कैसे हो पाया यह जानने के लिए फिल्म देखें

फिल्म को वैसे म्यूजिक के दायरे में रखकर बनाया गया है लेकिन बीच-बीच में ये अपनी राह से भटक रही है. इसमें म्यूजिक से हटकर घरेलू भगड़े, मां बाप की पुरानी जिदंगी, स्कूल के प्रिसिंपल का पारिवारिक मामले एंट्री लेना. कहानी के बोरिंग कर रहा है. कहानी के कहीं न कहीं जानबूझकर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. जबकि आजकल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्मों को जल्द खत्म करनी की प्रणाली चल रही है. ताकि लंबी फिल्म की वजह से दर्शक बोर न हो

एक्टिंग की बात करें तो मुख्य किरदार में गुड्डु(लीडियन नादस्वरम) अपने रोल में कामयाब नहीं हो पाएं. जबकि रियल लाइफ में भी वह म्यूजिशियन ही है. इतना ही नहीं हिंदी में भी स्पष्टता नहीं दिखाई दे रही  हे. लेकिन माधव अपने किरदार के साथ न्याय कर पाएं हो. दो अऩ्य बाल कलाकार यश राणे और तमन्ना दीपके भी अपने किरदार को सही निभा गए हैं. प्रिसिंपल के रोल में जगदीश राजपुरोहित अपने किरदार को मजबूती से पेश कर पाएं है.

निर्देशन की बात करें तो एक अच्छी कहानी को कमजोरी के साथ ही पेश किया गया है. जहां पूरी कहानी एक से दूसरी कड़ी को जोड़ने में कमजोर साबित हो रही है. इतना ही नहीं फिल्म की ज्यादा लंबाई भी दर्शकों को बोर रही है. यदि फिल्म की लंबाई थोड़ी कम होती है तो यह लोगों को और ज्यादा अपने तरफ खींच सकती थी. इसलिए फिल्म के एक बार देखा जा सकता है.