महामारी के दौरान छीना जा रहा हैं लोगों  का आशियाना : घर के साथ -साथ उम्मीदें भी तोड़ी जा रही हैं !

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Marble Colony

कोरोना काल में प्रशासन ने छीने गरीबों के आशियाने : मार्बल कॉलोनी का मंज़र आपको कर देगा सोचने पर मजबूर आखिर यही वक़्त मिला था ?



कोरोना के दौर में जब लोगों को सरकार बिना काम के घर से बाहर निकलने के लिए मना कर रही है। वहीं ऐसे समय में गुरुवार को गुरुग्राम के मार्बल मार्केट से सटी झुग्गियों को तोड़ दिया गया। इन झुग्गियों मे करीब 250 परिवार रहते हैं। जिनकी संख्या लगभग 2500 के करीब है। जुलाई महीने में गुरुग्राम नगर निगम द्वारा इस बस्ती की लगभग 50 झुग्गियों को तोड़ दिया गया ।

ये कॉलोनी श्याम झा कॉलोनी के नाम से जानी जाती है।  यह पहला मामला नहीं है जब झुग्गियों को गिराया जा रहा है। इससे पहले जून के महीने में सेक्टर 47 और 51 की झुग्गियों को भी गिराया गया था। खबरों की मानें तो यह सब सेक्टरों को  ‘झुग्गी मुक्त’ अभियान के तहत किया जा रहा है। लगातार सेक्टरों के सामने से ढहाई जा रही झुग्गियों के बारे में जब ‘वन वर्ल्ड न्यूज’ ने नगर निगम के जॉइन्ट कमिश्नर हरिओम अत्तरी से बात की तो उन्होंने बताया कि यह सभी झुग्गियां अवैध तरीके से बनाई गई है। जिन्हें एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश के तहत तोड़ा जा रहा है।

आगे उन्होंने बताया कि यह नगर निगम की जमीन है जहां पर किसी भी प्रकार का निर्माण करने की अनुमति नहीं है। वहीं दूसरी ओर झुग्गी निवासियों का कहना है कि वे यहां करीब पिछले 12-15 सालों से रह रहे हैं। कई परिवार  तो ऐसे भी है जो 20 साल से अधिक समय से यहां बसे हैं। इस बारे में जब हरिओम जी  से पूछा गया तो उन्होंने  कहा कि नगर निगम पुरानी झुग्गियों को हाथ भी नहीं  लगा रहा  है। वह उन्हीं झुग्गियों को गिरा रहा है जो नई बनी हैं। इस बात की पुष्टि करने के लिए जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो वहां का मंजर कुछ और ही बयां कर रहा था।

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लोगों का कहना था कि जितनी भी झुग्गियां तोड़ी गई है वह सभी लगभग 10 साल से ज्यादा पुरानी है। इतना ही नहीं झुग्गी तोड़ने का विरोध करने पर पुलिस ने उन पर ड़ंडे भी बरसाएं। इसके साथ ही जिन लोगों ने इस घटना को रिकॉर्ड करने की कोशिश की उन पर भी पुलिस ने डंडे बरसाएं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि झुग्गियों तोड़ने के बाद पुलिस उनका सामान भी अपने साथ ले गई।  अब सवाल यह उठता है कि जब पूरा देश महामारी से परेशान है तो ऐसे समय में 2500 लोगों को सड़क पर लाना कितना सही है?  रोजगार के लिए परेशान लोगों का ऐसे समय मे घर से बेघर हो जाना, यह लोगों के लिए मानसिक तनाव को पैदा कर रहा है|

यहां कुछ अहम सवाल हैं  जिनके जवाब फ़िलहाल किसे के पास नहीं हैं :

  1. क्या महामारी के समय ही इन झुग्गियों को तोडना जरूरी था
  2. यहाँ रहने वाले ज़्यादातर लोग दिहाड़ी मज़दूर हैं , जहाँ प्रदेश अपने अनुसार लॉकडाउन लगा रहे हैं ऐसे मे ये लोग कहाँ जायेगें?
  3. अगर झुग्गियां तोड़ने का आदेश था तो वहाँ रहने वाले लोगों को नोटिस क्यों नहीं दिया गया?
  4. आदेश घर तोड़ने का थाफिर लोगों को सामान क्यों नहीं निकालने दिया गया ?

आपको क्या लगता हैं? अपनी राय दे, हम कोशिश कर रहे है की नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अधिकारीयों से जल्द बात कर सके|

Edited by Parul Srivastava & Poonam Masih 

Video By Ankur & Hyder

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