जाने इस पत्थर की कहानी , जिस पर लिखा है इस प्रेमी जोड़े का नाम

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कौन थे लोरिक और मंजरी?


किताबो में आपने न जाने कितनी अमर प्रेम कहानियों  के बारे में पढ़ा होगा लेकिन यह अमर प्रेम कहानी  उन सभी बाकी कहानियों से बिल्कुल  अलग है. जी हाँ, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की सोन नदी के किनारे खड़ा एक पत्थर है जो लोरिक और मजंरी  की अमर कहानी को बयां करती है .

जाने कौन थे  मंजरी  और लोरिक ?

बताया जाता है कि  इस नदी के किनारे अगोरी नाम का एक राज्य हुआ करता था जहाँ के राजा मोलागत थे. मोलागत वैसे तो बहुत अच्छे राजा थे लेकिन उनके राज्य में रहने वाला मेहरा नाम का एक यादव व्यक्ति उन्हें पसंद नहीं था क्योंकि मेहरा बलशाली था . राजा उसे हराने  के लिए एक षड्यंत्र रचता है  और मेहरा को जुआ  खेलने को कहता  है . मेहरा  राजा के साथ जुआ खेलने  को मान  जाता है जिसके चलते वो जुआ  में बार- बार  राजा से हारता  रहता है.
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एक दिन मेहरा जुएँ  में अपनी बीवी और उसके गर्भ को भी दाव  पर लगा देता है. जिसके बाद मेहरा अपनी बीवी और उसके गर्भ  को भी हार  जाता है.  राजा  उसपर तरस खाकर  कहता है की अगर बेटा  हुआ तो अस्तबल में काम करेगा. अगर बेटी हुई तो उसे रानी की सेवा में नियुक्त कर दी जाएगी . उसके  तीसरे दिन  ही मेहरा को सांतवीं  संतान  के तौर  पर पुत्री  होती है  जिसका नाम मंजरी रखा  जाता है.

जब राजा को पता चलता है कि  मेहरा  को पुत्री  हुई  है तब राजा अपनी सिपाहियों  को भेज कर मंजरी को लाने के लिए कहते है. लेकिन मेहरा  की पत्नी मंजरी  को  देने से इंकार कर देती  है साथ ही वो  यह  संदेश भिजवाती है कि जब मंजरी की शादी हो जाएगी तो उसके पति को मारकर वो मंजरी को अपने साथ ले जाए. राजा ये बात मान लेते हैं फिर  देखते ही देखते मंजरी बड़ी हो जाती है. जिसके बाद मंजरी के  माता पिता को उसकी शादी की चिंता सताने लगती है.

मंजरी को एहसास रहता है की उसका वर  कौन बनेगा और जो राजा को हरा  सके , तब मंजरी  अपने माता- पिता  को अपना रिश्ता बलिया में लॉरिक  नाम  के लड़के  के घर  ले जाने को कहती है जिसके बाद मंजरी  के माता – पिता  लोरिक के घर  रिश्ता  लेकर  जाते हैं  और बात  पक्की  कर देते है.लोरिक शादी वाले दिन डेढ़ लाख बारातियों को लेकर मंजरी से शादी करने निकलता है .जब बारात सोन नदी के पास पहुँचती  है तब राजा  वहां अपने सैनिकों के साथ उससे लड़ने पहुंच जाते हैं .

इस युद्ध में जब लोरिक हारने  लगता है तो   वहाँ मंजरी पहुंचकर लॉरिक को अगोरी के किले के पास  गोठानी नाम के गांव में भगवान शिव  के मंदिर में जाकर भगवान की उपासना करने को कहती  है. जिसके बाद लोरिक राजा से जीत जाता  है और दोनों की शादी होती है. लेकिन गांव की दहलीज छोड़ने से पहले वो लोरिक से कहती है कि कुछ ऐसा करो जिससे यहां के लोग याद रखें कि लोरिक और मंजरी कभी इस हद तक प्यार करते थे.

मंजरी लोरिक को एक पत्थर दिखाते हुए कहती है कि इसे तलवार के एक ही वार से काट दो लेकिन जब लोरिक उस  पत्थर को दो टुकड़ों  में कटता  है  तो पत्थर का एक हिस्सा पहाड़ से नीचे गिरने लगता है. उस गिरते पत्थर को  देख मंजरी उसके दोनों हिस्सों को एक ही जगह पर खड़े रहने की प्रार्थना करती है  और ये पत्थर आज भीएक साथ बिना गिरे यहीं खड़े हैं.

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