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Mahavir Jayanti 2022: महावीर जयंती 14 को, जानें भगवान महावीर की ज़िंदगी से जुड़ी कुछ अहम बातें

Mahavir Jayanti 2022: क्यों मनाई जाती है महावीर जयंती, कैसे शुरू हुई इस पर्व को मनाने की प्रथा?


Highlights:

. महावीर जयंती हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है।

. इस साल महावीर जयंती 14 अप्रैल को है।

. इस दिन को भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

Mahavir Jayanti 2022 : महावीर जयंती हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल महावीर जयंती 14 अप्रैल को है। इस दिन को भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। महावीर जैन धर्म के आखिरी आध्यात्मिक गुरु थे। महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तीर्थकर थे। इसलिए जैन समुदाय के लिए महावीर जयंती काफी खास है।

इस आर्टिकल में हम आपको महावीर जयंती की तिथि, मुहूर्त, और सिद्धांतों के बारे में बताएंगे।

महावीर जयंती शुभ मुहूर्त

तिथि- 14 अप्रैल, गुरुवार

त्रयोदशी तिथि आरंभ – 14 अप्रैल, सुबह 4 : 49 बजे से

त्रयोदशी तिथी समाप्त – 15 अप्रैल, सुबह 3 : 55 बजे तक

कैसे मनाते हैं महावीर जयंती

इस दिन जैन धर्म के अनुयायी सुबह उठकर हर काम में निवृत होकर प्रभात फेरी निकालते हैं। इस दिन भगवान महावीर की मुर्ती पालकी में रखकर यात्रा निकाली जाती है। इस दिन सोने और चांदी के कलश से भगवान महावीर का जलाभिषेक किया जाता है और शिखरों पर ध्वजा चढ़ाई जाती है।

भगवान महावीर ने जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए। ये सिद्धांत सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य है।

भगवान महावीर

भगवान महावीर का जन्म 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बिहार में हुआ था। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने सब कुछ छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया। महावीर को अपने जीवनकाल में वर्धमान के रूप में जाना जाता था। वर्धमान कई तरीकों से बौद्ध धर्म के सिद्धार्थ गौतम के समान हैं। कहा जाता है कि सिद्धार्थ के भांति ही वर्धमान ने भी सांसारिक कष्टों को देखने के बाद सत्य की खोज करने के लिए अपना आरामदायक घर छोड़ दिया था। वर्धमान ने जैन धर्म का प्रचार – प्रसार करने के लिए भारत र एशिया के अन्य क्षेत्रों की यात्रा की। जैन धर्म को स्थापित करने का महावीर का एकमात्र मकसद था दुनिया में प्रसन्नता फैलाना।

जैन ऐसी कई गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं जो उन्हें अपने परिजनों से जुड़ने का और भगवान महावीर को याद करने का मौका देते हैं।

. शोभायात्रा – महावीर जयंती की सबसे प्रसिद्ध गतिविधियों में से एक है भगवा महावीर की प्रतिमा का शोभायात्रा। इस यात्रा में महावीर की प्रतिमा को लेकर हर जगह घुमाते हैं और साथ में विशेष प्रार्थनाओं और भजनों का गान करते हैं।

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. प्रतिमा धोना

भगवान महावीर की प्रतिमा को जल और सुगंधित तेलों से धोया जाता है। इसे महावीर की शुद्धता का प्रतीक कहा जाता है।

. मंदिर दर्शन

महावीर जयंती के दौरान लोग जैन मंदिरों में दर्शन के लिए इकट्ठा होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोमतेश्वर, दिलवाड़ा, रणकपुर, सोनागिरि और शिखरजी कुछ लोकप्रिय स्थानों में से एक है।

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. दान

दान का हर धर्म में महत्व है। जैन धर्म के लोग भी अपनी विनम्र जीवनशैली को दर्शाने के लिए मंदिरों में पैसे, भोजन और कपड़े देते हैं।

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