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Kabir Das Jayanti 2020: कबीर दास जयंती पर जाने क्यों आज भी लोगों के दिलों में बसे है, कबीर दास

kabir das jayanti 2020: जाने संत कबीरदास की जयंती


कबीर दास का जन्म लगभग 1398 ई. लहरतारा तालाब, काशी के समक्ष हुआ था। कबीर दास 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। कबीर भक्‍तिकाल के एकमात्र ऐसे कवि है, जिन्‍होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार के कार्यो में लगा दिया और वो कर्म को प्रधान मानते थे। उनका ये उल्‍लेख उनकी रचनाओं में देखने को मिलता है। कबीर दास का पूरा जीवन समाज कल्‍याण एवं समाज हित में ही बिता। कबीर दास को विश्‍व प्रेमी कवि माना जाता था।
उनके जन्म को ले कर बहुत सारे रहस्‍य है। कुछ लोगों का माना था कि रामानंद स्‍वामी के आशीर्वाद से काशी की एक ब्राहम्‍णी के गर्भ से जन्‍म लिया था,जो की विधवा थी। कबीर दास की मां को गलती से रामानंद स्‍वामी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था। तो कुछ लोगो का माना है कि कबीर दास जन्‍म से ही मुसलमान थे बाद में उन्‍हें अपने गुरु रामानंद से हिन्‍दू धर्म का ज्ञान प्राप्त हुआ।

कबीर दास के ये प्रसिद्ध दोहे आपका मन मोह लगे

गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय।
कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय।
व्याख्या: व्यवहार में भी साधु को गुरु की आज्ञानुसार ही आना – जाना चाहिए | सद् गुरु कहते हैं कि संत वही है जो जन्म – मरण से पार होने के लिए साधना करता है |
गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान।
तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान।
व्याख्या: गुरु के समान कोई दाता नहीं, और शिष्य के सदृश याचक नहीं। त्रिलोक की सम्पत्ति से भी बढकर ज्ञान – दान गुरु ने दे दिया।

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कहाँ ली थी कबीर दास ने अंतिम सांस

कबीर दास ने अपनी अंतिम सांस मगहर में ली थी। कबीर दास की मान्यता थी कि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही गति मिलती है। स्थान विशेष के कारण नहीं। कबीर इसी मान्यता को सिद्ध करने के लिए अंत समय में मगहर चले गए। क्योंकि ओस सयम लोगों की मान्यता थी कि काशी में मरने पर स्वर्ग और मगहर में मरने पर नरक मिलता है। आज भी मगहर में कबीर दास समाधी स्थित है। उनके लेखन में बीजक, सखी ग्रंथ, कबीर ग्रंथावली और अनुराग सागर शामिल है।

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