जननी सुरक्षा योजना के तहत कहीं मिल रहा है लाभ, तो कहीं बैंक खातों को बिना अभाव

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योजना के तहत अस्पताओं में डिलीवरी करवानी वाली महिलओं की संख्या में वृद्धि


गर्भवती महिला और नए जन्मे बच्चें की मृत्युदर में आई कनी

हर घर किलकारियों से भरा रहे और मां और बच्चा दोनों सुरक्षित रहें. इसलिए सरकार द्वारा जननी सुरक्षा योजना लाई गई. जिसके कारण गर्भवती महिलाएं और बच्चें की मातृदर में कमी लाने की कोशिश की गई है. 

अहम बिंदु

  • जननी सुरक्षा योजना का उद्देश्य
  • लाभ
  • मृत्युदर में कमी
  • कमी
  • आशा वर्क्स का दायित्व

जननी सुरक्षा योजना को 12 अप्रैल 2005 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा नेशनल हेल्थ मिशन के तहत लाया गया. यह केंद्रीय योजना है जो परिवार एवं कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित होती है. जिसके अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को 1400 और शहरी महिलाओं को 1000 रुपए की धनराशि दी जाती है. इसके साथ ही मातृ वंदना योजना के 5000 भी इसके साथ मिलते हैं. इस योजना के तहत आज करोड़ों महिलाओं को लाभ मिला है. और कई आज भी इस योजना के लाभ से वंचित हैं. 

जननी सुरक्षा योजना का उद्देश्य

  • पहला उद्देश्य यह है कि गर्भवती महिला और बच्चे की मृत्युदर में कमी लाना. सरकारी बेवसाइट के अनुसार जीवित जन्म में मातृत्व- मृत्युदर(एमएमआर) को 1/100 के स्तर पर लाना और शिशु मृत्युदर को 25/1000 के स्तर पर लाना. 
  • अस्पताल में डिलीवरी को बढ़ावा देना. गांव और दूर दराज के इलाकों में लोग आज भी घर पर ही डिलीवरी करवाते हैं. जिसके कारण कई बार जज्जा और बच्चा दोनों की जान पर खतरा बना रहता है. 
  • आर्थिक सहायता का उद्देश्य है यह है कि डिलीवरी के बाद जो महिलाएं पोषक तत्वों को सेवन नहीं कर पाती थी वह अपने शरीर को मजबूती देने के लिए पोषण तत्वों का सेवन कर सकें जिससे महिला शारीरिक रुप से मजबूत हो. 

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The initiative of One World News to understand National Health Mission continues with the Janani Suraksha Yojana. Janani Suraksha Yojana, under the National Health Mission, Government of India intends to reduce maternal and neonatal mortality by addressing issues with both demand and supply of maternal healthcare services in the country. Poor women receive direct cash in their account under the programme for institutional deliveries and for accessing antenatal and postnatal care. ASHA workers are also given cash incentives for connecting poor women to institutional healthcare services. To know more, read the article today at 8:00 pm on our website www.oneworldnews.com . . . . . . . . . . . . . . . . #kaamkibaatkarona #kaamkibaat #nationalhealthmission #indiangoverment #jananisurakshayojna #moralitymission #ashaworkers #oneworldnews #oneworldnewsunfiltered

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कैसे और कब लाभ लें

  • योजना के तहत दो बच्चों तक महिला को इस योजना का लाभ मिलता है. 
  • .योजना का लाभ दो किस्तों में मिलता है. छह हजार रुपए में तीन हजार डिलीवरी से पहले और तीन डिलीवरी के बाद मिलता है. 
  • इस योजना का लाभ लेने के लिए पहले गर्भवती महिला को किसी भी सरकारी अस्पताल में पंजीकरण कराना पड़ता है. जिसमें आशा वर्क्स उसकी सहायता करती है. इतना ही नहीं डिलीवरी के पहले वहां जांच भी करानी पड़ती है. 

योजना का लाभ लेने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज

  • आधारकार्ड
  • वोटर आईडी
  • गर्भवती महिला का बैंक खाता, पहले नगद दिया जाता था लेकिन अब बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है. 
  • सरकारी अस्पताल द्वारा जारी डिलीवरी सार्टिफिकेट
  • दस्तावेज

योजना का फायदा और मृत्युदर में कमी

आंकड़ो की बात करें तो इकॉनोमिक्स टाइम की एक खबर के अनुसार सालना 1600 करोड़ खर्च कर सरकार एक करोड़ महिलाओं को इसका लाभ दे रही है. इतना ही नहीं इस योजना के तहत लोगों में जागरुकता भी फैली है. पहले जहां जानकारी के अभाव में लोग अपनी जान गंवा लेते थे वहीं इस योजना के बाद से लोगों में स्वास्थ्य संबंधी साफ-सफाई से लेकर खाने पीने तक के लिए जागरुकता का काम किया गया है. जिससे गांव एवं दूर-दराज के इलाकों में महिलाओं को डिलीविरी के लिए परेशानी नहीं हो रही है. इतना ही नहीं जज्जा और  बच्चा के पोषण का भी ध्यान रखा जा रहा है. टीकाकरण को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है. डिलीविरी के बाद उसी अस्पताल में बच्चे का पांच साल तक टीकाकरण किया जाता है. 

यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 तक भारत में गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर में 55 प्रतिशत की कमी आई है. इसी साल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने एक आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए बताया कि गर्भवती महिलाओं की मृत्युदर में कमी आई है. साल 2011-13 में 167, 2014-16 में 130 और 2015-17 में 122 तक कमी आई है. 

यूनिसेफ की रिपोर्ट

योजना से लाभन्वित ज्योत्सना मिश्रा की डिलीवरी इसी साल जनवरी में नोएडा के जिला अस्पताल में हुई थी. उन्होंने बताया कि डिलीवरी के तीन महीने पहले उन्हें 3 हजार दिए गए था. जब उनका मेडिकल कार्ड बनाया गया था और 3 हजार डिलीवरी के ढाई महीने बाद बच्चे को टीका लगने के उपरांत उनके अकांउट में आएं थे. उनका कहना है कि इससे सबसे अच्छा फायदा यह है कि डिलीवरी के बाद पैसों के अभाव में कोई महिला पोषक तत्वों से वंचित नहीं रह सकती है. 

कमी

इस बात में कोई दोतरफा राय नहीं है कि योजना कोई भी हो उसमें कुछ न कुछ कमी जरुर होती है. गांव कनेक्शन वेबसाइट पर छपी एक खबर के अनुसार योजना का लाभ कई महिलाओं को नहीं मिला है. खबर के अनुसार कानपुर देहात की आकांक्षा सिंह का कहना है कि उनका बच्चा आठ महीने का हो गया है लेकिन अभी उन्हें पैसे नहीं मिल पाएं है. ऐसा यह पहला मामला नहीं है. सरकार ने लाभ लेने के लिए एक अनिर्वाय शर्त रखी है कि महिला को पैसा उसके बैंक खाते में ही ट्रांसफर किया जाएगा.  लेकिन कई महिलाएं ऐसी है जिनके पास बैंक खाता नहीं होता है. ऐसे हालात में महिलाएं इसके लाभ से वंचित रह जाती है. एक महिला ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उनकी डिलीवरी साल 2018 में हुई थी . उनके पास सारे जरुरी कागज मौजदू थे बस एक बैंक खाता न हो पाने के कारण उन्हें 1400 रुपए नहीं मिल पाएं. सरकार द्वारा जनधन योजना के तहत बैंक खाता बनाने का विकल्प दिया है . लेकिन कई महिलाओं के जरुरी दस्तावेज पूरे न हो पाने के कारण यह भी नहीं हो पा रहा है. 

योजना में आशा वर्क्स की भूमिका

  • अपने क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं की पहचान करना जिसको योजना का लाभ मिलना है.
  • अस्पताल में डिलीवरी करवाने के बारे में महिलाओं को जानकारी देना, ताकि स्वस्थ्य और सुरक्षित डिलीवरी हो सकें
  • पंजीकरण में महिलाओं की मदद करना ताकि उन्हें आर्थिक लाभ मिल सकें. 
  • जननी सुरक्षा योजना कार्ड और बैंक खाते जैसे महत्वपूर्ण चीजें को मुहैय्या कराने में मदद करना. 
  • टीबी के खिलाफ बीसीजी टीकाकरण सहित, नवजात शिशुओं के लिए  टीकाकरण की व्यवस्था करना. 

निष्कर्ण

पिछले कुछ सप्ताह से हम लगातार सरकार की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं. इस बार जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को लाभ तो मिल रहा है. लेकिन लाभ सभी महिलाओं तक नही पहुंच रहा पा रहा है. पूरे आर्टिकल के दौरान हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे है कि इस योजना के द्वारा महिलाओं में अस्पताओं में डिलीवरी कराने की संख्या में वृद्धि हुई है. जिसका साफ मतलब है जज्जा और बच्चा दोनों ही डिलीवरी के बाद कुछ समय के लिए डॉक्टरों की निगरानी में  रहेंगे. जबकि घर में डिलीवरी करवाने से मेडिकल सुविधा पूरी तरह से मिल नहीं पाती है.  इसके साथ ही डिलीवरी के बाद बच्चे और मां को जरुरी टीके भी उसी वक्त लग जाते हैं.

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