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Chhath Puja 2021: क्यों मनाई जाती है छठ पूजा, नहाय खाय, खरना और सूर्य पूजा का शुभ मुहुर्त

Chhath Puja 2021: छठ पूजा की तैयारियां शुरू, जाने इस बार कब से होगी छठ पूजा की शुरुआत


Chhath Puja 2021: हमारे हिन्दू कैलेंडर के अनुसार छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि यानि की दिवाली के छठे दिन बाद मनाई जाती है। नार्मल यानि अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक इस बार छठ पूजा 10 नवंबर को मनाई जाएंगी। आपने देखा होगा कि हर साल दिवाली खत्‍म होते ही घाटों को साफ करने और सजाने का काम शुरू हो जाता है। मान्यताओं के अनुसार हमारे देश में रखें जाने वाले व्रतों में से एक कठिन व्रत छठ पूजा का होता है। माना जाता है कि छठी मइया का व्रत रखने वाले व विधि-विधान से पूजा करने वाली दम्पति को संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख समृद्धि आती है। अभी से ही हमारे पुरे देश में सूर्य देव और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित इस महापर्व की तैयारी शुरू हो चुकी है। बता दें कि मुख्यरूप से तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व को सादगी और पवित्रता के साथ मनाया जाता है। क्या आपको पता है कि दिवाली के बाद की षष्टी तिथि को सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है। तो चलिए आज हम आपको बताते है इस साल के छठ पूजा के पूरे कार्यक्रम का शुभ मुहूर्त कब से कब तक है।

जाने कब से है छठ पूजा

8 नवंबर यानि की सोमवार को नहाय खाय के साथ छठ पूजा का प्रारंभ हो जाएगी। उसके बाद 9 नवंबर मंगलवार को खरना मनाया जाएगा। 10 नंवबर बुधवार को छठ पूजा मनाई जाएंगी, जिसमें डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उसके बाद आखिर में 11 नवंबर गुरुवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का समापन होगा।

Chhath Puja 2021

जाने क्या क्या होता है छठ पूजा में नहाय खाय से लेकर सूर्य पूजा तक में

आपको बता दें कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को मनाई जाने वाली छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के दिन यानि की छठ पूजा के पहले दिन घर की विस्‍तार से सफाई के साथ होती है। उसके बाद सारी पूजा सामग्री को पवित्र स्थान पर रखा जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन से घर के सभी लोग  सात्विक आहार खाते हैं।

आपको बता दें कि छठ पूजा का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण दिन खरना का होता है। खरना वाले दिन से ही छठ पूजा के व्रत का प्रारंभ हो जाता है और रात में पूरी पवित्रता के साथ बनी गुड की खीर का सेवन किया जाता है। खरना के दिन बनी गुड की खीर खाने के बाद से अगले 36 घंटे का कठिन व्रत रखा जाता है। इतना ही नहीं खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद भी तैयार किया जाता है।

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खरना के अगले दिन छठी मइया की पूजा की जाती है और इसी दिन व्रती डूबते सूर्य को अर्घ देकर जल्दी उगने और संसार पर कृपा करने की प्रार्थना करते हैं। उसके बाद अगले दिन छठ पूजा के चौथे दिन 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ ही छठ का कठिन व्रत संपन्न हो जाता है। उसके बाद सभी लोगों को छठ का प्रसाद बांटा जाता है।

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