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Death anniversary- इरफान की शानदार फिल्में जो देती है सामाजिक संदेश

आज भी लोगों को जहन में बसे है इरफान साहब


फिल्म में रुहेदार का वह शब्द कई सदियों तक लोगों के जहन में बसा रहेगा। इरफान खान बॉलीवुड का वह नयाब सितारा जिसने पिछले साल अपने फैन्स का साथ छोड़ दिया। पिछले साल 29 अप्रैल की वह सुबह 11 बजे टेलीविजन की स्क्रीन पर बनती ब्रेकिंग न्यूज “नहीं रहे एक्टर इरफान खान” ने लोगों को पूरी तरह से सन्न कर दिया था। इरफान साहब के फैन्स इस बात को मानने को तैयार ही नहीं थे कि उनके चाहते उनके बीच नहीं रहे। अब एक्टर को गुजरे हुए पूरा एक साल हो गया है। इस दौरान वह अपने फैन्स के दिलों में आज भी जिंदा है। जिसका नतीजा यह है कि आज भी लोग उनके फिल्मों को चाव से देखते हैं। इतना ही नहीं कई फैन्स उनकी आवाज के भी दीवाने हैं। फिल्म के डायलॉग में उनकी बोलती आंखें आज भी उनके फैन्स का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। मीडिल क्लास फैमिली में जन्म लेने वाले एक्टर इरफान खान ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा था। तो चलिए आज आपको उनकी कुछ ऐसी फिल्मों के बारे में बताएंगे जो समाज को कुछ संदेश देती हैं।

हिंदी मीडियम

साल 2017 में साकेत चौधरी के निर्देशन में बनी फिल्म हिंदी मीडियम ने समाज के उस पहलू को दिखाने की कोशिश गई है जहां सिर्फ अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को ही अच्छा माना जाता है। अंग्रेजी मीडियम के बच्चों और उनके पैरेंट्स का एक क्लास  होता है। लेकिन इन मुद्दों को नकारते हुए यहां बताया गया है कि ज्ञान के लिए माध्यम की कोई जरुरत नहीं है। माता पिता को अपनी हालात के हिसाब से शिक्षा दें। बच्चों को लिए शिक्षा के जरुर है माध्यम नहीं।

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अंग्रेजी मीडियम

एक्टर के इंतकाल से कुछ समय पहले ही यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी। इस फिल्म के रिलीज होने से पहले इरफान खान ने एक भावुक मैसेज दिया था। जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस फिल्म को भले ही कॉमेडी के रुप दिखाया गया है। लेकिन इस कॉमेडी के पीछे एक बहुत बड़ा मैसेज है। जिसे लोगों को समझने की जरुरत है। फिल्म की कहानी एक पिता और बेटी की है। जहां एक कम पढ़ा पिता और विदेश में बेटी को पढ़ाने की जिद्द किसी भी हद तक उसको गुजरने के लिए मजबूर कर देती है। जहां यह बताया जा रहा है कि बेटियों को पढ़ाना बहुत जरुरी है। भले ही आपकी स्थिति कैसी भी हो। लेकिन बच्चों को विदेश में ही पढ़ने की जिद्द नहीं करनी चाहिए।

करीब-करीब सिन्गल

यह फिल्म एक रिश्ते पर आधारित है। जहां यह बताने की कोशिश की गई है कि शादी के लिए जरुरी है कि आप किसी इंसान को अच्छे से जान लें। अगर उसके साथ अपने आपको कम्फर्टेबल महसूस करते हैं तभी अपने रिश्ते को आगे बढ़ाए। घर वालों को मर्जी से जरुर शादी करें लेकिन उससे पहले जिससे आपकी शादी होने वाली है उसे अच्छी तरह से जान लें।

हासिल

साल 2003 में तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म इलाहाबाद युनिर्वसिटी के छाक्षों के जीवन पर आधारित है। यह फिल्म इरफान खान के करियर के शुरुआती दौर में बनाई थी। जहां उन्होंने एक विलैन का रोल प्ले किया है। जिसमें छात्र जीवन के उसे हिस्से को दिखाया गया है जहां किसी की एक गलती उसके पूरे जीवन क बर्बाद कर देती है। इस फिल्म को स्टूडेंट्स को जरुर देखनी चाहिए।

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