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Indian War History: क्या है भारत का युद्ध इतिहास? पाकिस्तान की नापाक कोशिशें कभी नहीं हो सकी सफल!

Indian War History: आज़ादी के बाद अब तक कितनी बार युद्ध में हिस्सा ले चुका है भारत?


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Indian War History: जानिए पूरी जानकारी सरल भाषा में!

पाकिस्तान को अब तक कितनी बार करना पड़ा है हार का सामना?

भारत के सैनिकों ने अपना लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है!

Indian War History: क्या आप के मन में रूस और यूक्रेन के बीच चल रहीं युद्ध के कारण, भारत के युद्ध इतिहास को लेकर कुछ जिज्ञासा उठ रही  है? अगर हां, तो आपकी जिज्ञासाओं का समाधान हम इस लेख में लेकर आए है जिसमे आगे हम; भारत आज़ादी के बाद से अब तक कितने युद्ध में शामिल हो चुका है? किन देशों के खिलाफ? और युद्ध के पीछे क्या थी वजह? इन सबकी चर्चा आसान भाषा में करेंगे।

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Indian War History

इन वर्षों में, भारत बहुत सारे संघर्षों का गवाह रहा है और स्वतंत्रता के बाद भारत द्वारा लड़े गए युद्धों की एक लंबी सूची है। हमारे इतिहास की किताबें उन युद्धों से जुड़ी कहानियों से भरी पड़ी हैं जिन्हें भारतीय सैनिकों ने आंतरिक और बाहरी दुश्मनों से लड़ा है। वैसे तो भारत कई देशों के साथ अपनी सीमा साझा करता है, लेकिन दो देश ऐसे है जिनके संग भारतीय सेना का समय-समय पर टकराव होता रहा है! जी हां, हम पाकिस्तान और चीन की ही बात कर रहें है।

आइए, अब बिना किसी देरी के जानते है भारत के युद्ध इतिहास के बारे में :

कश्मीर युद्ध, 1947-48

विभाजन के बाद, डोगरा वंश के महाराजा हरि सिंह, जो उस समय कश्मीर राज्य के शासक थे, उन्होंने कश्मीर को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में बने रहने का विकल्प चुना था। हालाँकि, कश्मीर को देश का अभिन्न अंग बनाने के लिए पाकिस्तान बेहद तनाव पैदा कर रहा था। पाकिस्तान का कहना था की कश्मीर की 3/5 वीं आबादी मुस्लिम बहुल थी और वह भारत सरकार से खुश नहीं थी। कश्मीर के क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए पाकिस्तान के निरंतर प्रयासों के बाद, डोगरा के महाराजा के पास 2 अक्टूबर, 1948 को भारत में शामिल होने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था।

इसी के साथ, उस दिन “डॉक्यूमेंट ऑफ एक्सेशन” पर हस्ताक्षर किए गए थे। घाटी को आधिकारिक तौर पर भारत सरकार को हस्तांतरित कर दिया गया था। हालाँकि, हरि सिंह द्वारा कुछ शर्तें रखी गई थीं। इस प्रकार, राजा की भावनाओं का सम्मान करने के लिए, पीएम नेहरू ने विशेष लेख पारित किए जिसके अनुसार कश्मीर को भारत का राज्य घोषित किया गया लेकिन एक स्वायत्त स्थिति के साथ। इससे चिढ़कर पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी जो कुछ समय तक जारी रहा। यह स्वतंत्रता के बाद भारत द्वारा लड़े गए सभी युद्धों में से पहला था।

हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र द्वारा खींची गई भारत और पाकिस्तान के बीच “युद्धविराम रेखा” की स्थापना के साथ युद्ध फिर समाप्त हो गया था।

1962 का भारत चीन युद्ध

इस युद्ध के बीज तब बोए गए जब चीन, भारत और चीन के बीच की सीमा के रूप में “मैकमोहन रेखा” को स्वीकार करने के अपने शब्दों से पीछे हट गया। 20 जुलाई 1962 को चीनी सैनिकों ने सीमा पार कर तिब्बत पर कब्जा कर लिया। भारत को विश्वास नहीं था कि चीन युद्ध का इरादा लेकर आगे बढ़ रहें थे इसलिए वह सैनिकों की तैनाती को लेकर बहुत गंभीर नहीं थे।चीनी सेना ने फिर सभी प्रकार के संचार को काट दिया और भारतीय सेना पर हमला बोलते हुए युद्ध का ऐलान कर दिया।

एक लंबे युद्ध के बाद, जिसमें चीनी पक्ष से 80,000 सैनिक और भारतीय पक्ष से केवल 20,000 सैनिकों ने भाग लिए थे उसमे चीन विजयी रहा।

भारत पाकिस्तान युद्ध, 1965

इस युद्ध में लगभग 33,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने कश्मीरियों का रूप धारण कर भारत की सीमा में युद्ध का ऐलान कर प्रवेश करने की योजना बनाई थी जिसे भारतीय सेना ने विफल करने के लिए संघर्ष विराम रेखा को पार किया। इसके बाद, दोनों देशों के बीच एक गंभीर युद्ध हुआ। अब और तब भी दोनों देशों के बीच नियमित विवाद होते रहते थे। इसलिए इस मुद्दे का हल निकालने के लिए, तशकेंत में एक भारत पाकिस्तान शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। बैठक में भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हिस्सा लिया।

उनके साथ प्रीमियर कोश्यिन भी थे जिन्होंने सोवियत संघ की ओर से काम किया और देशों के बीच तनाव को सुलझाने के लिए मध्यस्थ रूप निकाला। बैठक “तश्केंत घोषणापत्र” पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुई। इस युद्ध में 12000 से ज्यादा सैनिक हताहत हुए और इसमें दोनों देश खुद को विजयी मानते है।

भारत पाकिस्तान युद्ध, 1971

तत्कालीन प्रधान मंत्री, इंदिरा गांधी की राय थी कि पाकिस्तानी सेना को पूर्वी कश्मीर यानी वर्तमान बांग्लादेश से बाहर खदेड़ दिया जाए। इसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश मुक्ति संग्राम हुआ जो 15 दिनों तक लड़ा गया। यह युद्ध पाकिस्तानी सेना के हाथों बहुत रक्तपात और मानवाधिकारों के उल्लंघन का गवाह था। इस युद्ध में भारतीय सेना का बड़ा हाथ रहा था क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान की सेना, नौसेना और वायु सेना को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।

इस युद्ध में आईएनएस विक्रांत जैसे कई युद्धपोतों ने भी ऑपरेशन पायथन और ऑपरेशन ट्राइडेंट के नाम पर पीएनएस गजनी, पीएनएस खैबर, पीएनएस मुहाफिज, पीएनएस शाहजहाँ का सफाया करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पाकिस्तानी सेना के जनरल द्वारा शिमला समझौते पर हस्ताक्षर करने और आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करने के साथ ही यह युद्ध समाप्त हो गया और बांग्लादेश आज़ाद  देश के रूप में स्थापित हुआ।

कारगिल युद्ध, 1999

Indian War History

कारगिल युद्ध का प्रमुख कारण पाकिस्तानी सेना द्वारा भारत की अग्रिम चौकियों पर कब्जा करना था। इसके कारण भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू की और भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सफेद सागर शुरू किया। इस युद्ध में भारतीय वायु सेना द्वारा मिराज 2000 विमान को भी शामिल किया गया था। भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानियों की तैनाती पर भारी बमबारी की, जिससे उनके आपूर्ति मार्ग और बंकर नष्ट हो गए। एक लंबी लड़ाई के बाद, 11 जुलाई 1999 को पीएम अटल बिहार बाजपेयी ने कारगिल युद्ध में भारत को विजयी घोषित किया।

Conclusion:

भारत आज़ादी के प्रारम्भ से ही युद्धों का शिकार रहा है और भारतीय सेना ने हमेशा स्वतंत्रता के बाद भारत द्वारा लड़े गए सभी युद्धों में अपना 100% दिया है। मगर, ध्यान देने वाली बात यह है की, क्या युद्ध से आज तक किसी का लाभ हुआ है? धन, समय और संसाधनों को नष्ट करने के अलावा सबसे अधिक नुकसान अगर किसी को होती है तो वह है मानव जाती, जो किसी भी अन्य चीज़ से अधिक कीमती है। इस लेख में हमने आपको भारत के युद्ध के इतिहास के बारे में बताने का प्रयास किया है, उम्मीद है हमारी यह कोशिश आपको पसंद आई होगी।

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Himanshu Jain

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