काम की बात करोना

आने वाले साल में प्रतिदिन 2.87 लाख नए केस आएंगे। 

केस बढ़े है लेकिन मृत्युदर में आई कमी   


पिछले साल दिसंबर से शुरु हुआ कोरोना का कोहराम थमने का नाम नहीं ले रहा है। डब्ल्यूएचओ द्वारा तो यह भी कह दिया गया है कि अब पूरी दुनिया को कोरोना के साथ ही जीना पड़ेगा। भारत में कोरोना के केस 10 लाख पार कर चुके हैं।  इस बीच देश के हर तबके के लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। जबकि वैक्सीन को लेकर अभी तक कोई खास जानकारी नहीं मिल पा रही है।  अलग-अलग देश वैक्सीन को लेकर अपनी अलग-अलग जानकारी  साझा कर चुके हैं। लेकिन पुख्ता जानकारी कोई भी नहीं  दे पा रहा है

अहम बिंदु

  • लगातार बढ़ते कोरोना के केस
  • राज्यों के हाल
  • लॉकडाउन और  ऑनलाइन का कार्यक्रम
  • कोरोना के अलावा अन्य परेशानियां

प्रतिदिन कोरोना के मामले हजारों में आना शुरु हो गए हैं। जबकि मात्र 430 केस में लॉकडाउन लगाया गया था और यह दावा किया गया था इसके बाद कोरोना पर काबू पाया जा सकता है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आज कोरोना के लिए एक्शन लिए हुए चार महीने हो गए हैं। लेकिन इस पर काबू नहीं पाया जा सका है।  लेकिन इस सबके बीच अच्छी खबर यह है कि मृत्युदर में कमी आई है और रिकवरी रेट में वृद्धि हुई है। दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि कैसे दिल्ली सरकार ने कोरोना की मृत्यदर को कम किया है। उन्होने 5 योजनाएं ने नाम गिनाएं जिनके द्वारा कोरोना संक्रमित व्यक्ति बचाया जाएं। इसके साथ ही उन्हें कहा कि अब स्थिति में कभी सुधार हो गया है। जिसके कारण पहले जहां 100 लोगों को मृत्यु हो रही थी अब सिर्फ 30 लोग ही अपनी जान गवा रहे हैं। उन 30 को भी बचाने के लिए सरकार काम कर रही है। इस बीच बिहार का हाल इस वक्त सबसे बुरा बताया जा रहा है। बिहार की अखबारों का कहना है कि बिहार की स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तो यह जल्द ही वहां अमेरिका जैसी स्थिति हो जाएगी। हाल इस हद तक खराब है कि बिहार के कई राजनेता इसकी चपेट में आ चुके हैं। बिहार बीजेपी के 67 लोगों पॉजिटिव है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री आवास में 60 लोग पॉजिटिव पाएं गए हैं। जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी भतीजी है।

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राज्यों की बात करें तो सबसे ज्यादा बुरा हाल महाराष्ट्र का है। यहां 3 लाख केस हो चुके हैं। मुंबई मिरर की खबर के अनुसार महाराष्ट्र में मृत्युदर 5।67 प्रतिशत है जो पूरे देश के 3।99 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है। बीएमसी के अनुसार 15 जुलाई तक प्रतिदिन 60 लोगों की मृत्यु हो रही है। एशिया के सबसे बड़े स्लम धारावी में भी कोरोना के केस सबसे ज्यादा आएं। लेकिन 15 जुलाई तक यहां भी कुछ काबू पाया गया। खबरों के अनुसार धारावी में 70 प्रतिशत लोग ठीक हो गए हैं। वहीं पश्चिम बंगाल और दिल्ली में प्लाज्मा बैंक भी खोला गया है जिससे संक्रमित लोगों को बचाया जा सकें। महामारी के बढ़ती मृत्युदर को देखते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि कोरोना वॉरियर्स की मौत के बाद उनके घर के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएंगी। अलग-अलग राज्यों में नागरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के ऐलान किए गए हैं। दिल्ली में राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने कमान अपने-अपने हाथ में ली। जिसका नतीजा आज यह है आज यहां सबसे ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं और मृत्युदर में कमी देखने को मिल रही है। इसके साथ ही लद्दाख ने कोरोना से साथ बड़ी अच्छी लड़ाई लड़ी है। वर्तमान में यहां 85 प्रतिशत लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं। जबकि मृत्युदर मात्र 0।9 प्रतिशत है जो पूरे देश में सबसे कम है। दक्षिण में केरल के स्वास्थ्य मॉडल की खूब तारीफ की गई। जिसने सबसे पहले इस पर नियंत्रण पाने में सफलता प्राप्त की है।  लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि जिस स्वास्थ्य मॉडल को केरल ने अपनाया क्या उसे पूरा देश अपनाता तो कोरोना पर नियंत्रण पाया जा सकता था। जबकि देखा जाएं तो देश में सबसे पहला केस केरल में ही पाया गया था। इसके बाद से ही सबसे ज्यादा टेस्ट किया गया। लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए लोगों को हर तरह की सुविधा दी गई।  वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में जब मृत्युदर में कमी आई है। जब प्रतिदिन 500 केस आ रहे थे तो मृत्युदर 3 फीसदी थी लेकिन अब जब प्रतिदिन एक हजार से ऊपर केस आ रहे है तो मृत्युदर 2।71 फीसदी है

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कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है।  जुलाई के महीने में प्रतिदिन 40 हजार के लगभग केस आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मात्र 19 दिनों में कोरोना के केस 5 लाख हो गए। एक जुलाई से 19 जुलाई के बीच 5 लाख 37 हजार नए केस आएं है। जबकि देश में पहले केस 30 जनवरी को मिला था। इसका साफ मतलब है छह महीने में 5 लाख आएं और मात्र 19 दिनों  5 लाख नए केस। इसे हम सकरात्मक तौर पर भी ले सकते हैं हो सकता है टेस्ट ज्यादा हो रहे हैं। लेकिन जिस हिसाब से तेजी आ रही है उस  हिसाब से अगस्त के महीने में 7।5 लाख नए केस आ सकते हैं अगर यही तीव्रता रही। वहीं इंडियन कांउसिल ऑफ रिसर्च(आईसीएमआर) ने बताया है कि अब तक 1 करोड़ 43 लाख 81 हजार  303 टेस्ट किए जा चुके हैं।  जबकि खबरों की मानें तो आने वाले साल फरवरी तक प्रतिदिन 2।87 लाख केस आएंगे। यह भविष्यवाणी मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(एमआईटी) के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है। जिसके लिए 84 देशों के टेस्टिंग और केसों के आंकड़ों पर अध्ययन किया गया। 

पहला लॉकडाउन मार्च के आखिरी सप्ताह में किया गया था उसके बाद जून महीने में अनलॉक की  प्रक्रिया शुरु की गई है। जिसके तहत जरुरी सामानों  के अलावा भी कई तहर के कामों के  लिए लोगों को सुविधा दी गई, इस बीच गांव से दोबारा लोग शहरों की तरफ मुड़ने लगे हैं, कामधंधा दोबारा से शुरु होने लगा है। लगभग दो महीने तक पूरा तरह कामधंधा बंद रहने के बाद से अब धीरे धीरे लोगों की जिदंगी पटरी पर लौट रही है, तो कई लोगों को जिदंगी ने पटरी से उतार दिया, कई लोगों की नौकरी चली गई है तो कई लोगों ने डिप्रेशन में आकर मृत्यु  को गले लगा लिया, स्कूल कॉलेज पूरी तरह से बंद है। ऑनलॉक 1 के तहत धार्मिक स्थलों को खोलने के अनुमति दी गई। इसमें कई तरह की गाइडलाइन भी बताई गई। इस गाइडलाइन के तहत धार्मिक स्थलो को सेनेटाइजर से साफ करना है। लेकिन कई जगहों में इसको लेकर आपत्ति जताई गई। जिसका कहना था कि सेनेटाइजर में एल्कोहल होता है। इसलिए इसका इस्तेमाल धार्मिक स्थलों में नहीं किया जाएगा।

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