सेहत

हुक्‍का पीना है सिगरेट से भी ज्‍यादा खतरनाक!

लोगों में हुक्‍का पीने का शौक कोई नया नहीं है, यह शौक तो राजाओं और महाराजाओं के ज़माने से चला आ रहा है। भारत में आज-कल हर छोटे-बड़े शहर और मॉल्‍स में हुक्‍का बार या लाउंज पॉपुलर होते नज़र आ रहे हैं।

स्कूल और कालेज के बच्चे हुक्‍के का एक कश नहीं बल्कि हज़ार कश लेते हुए दिखते हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि हुक्‍का पीना सिगरेट पीने के मुकाबले बिल्कुल भी हानिकारक नहीं होता। लेकिन हुक्के से खींचा गया तंबाकू का धुआं पानी से होता हुआ एक लंबे होज पाइप के जरिए फेफड़ों तक पहुंचता है।

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सच तो यह है कि हुक्के से निकलने वाला धुआं सिगरेट या बीड़ी के धुआं से अधिक घातक होता है। ऐसे और कई ढेर सारे मिथक हैं जिस पर लोग आंख बंद कर के विश्वास कर लेते हैं। आज हम आपके इस अंधविश्वास से पर्दा उठाने जा रहे हैं तो, ज़रा ध्यान से पढ़ें यह लेख…

  • हुक्‍का पीना सिगरेट की ही तरह हानिकारक है, क्योंकि दोनों उत्पाद के अंत में कार्सिनोजन लगा रहता है, जोकि एक कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ है।
  • सच्चाई तो यह है कि हुक्‍के का धुआं ठंडा होने के बाद भी हानिकारक होता है। इसमें कैंसर पैदा करने वाले एजेंट भारी मात्रा में होते हैं। हालांकि यह फेफड़े को जलाता नहीं है पर फिर भी यह रिस्‍की है।
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