हिंदी दिवस मौके पर जाने भारत के 10 प्रसिद्ध कवियों के बारे में 

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इस बार भारत में 68वां हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है


देश में हर साल 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाता है. भारत में हिन्दी दिवस की शुरूआत 1953 में हुई थी. उसके बाद से ही 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस बार भारत में 68वां हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है. वैसे तो हमारे देश में बहुत सारी भाषाएं बोली जाती है, लेकिन सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिन्दी है. हिन्दी दिवस को स्कूल, कॉलेज और ऑफिस सभी जगह पर बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. तो चलिए आज आपको हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी के प्रमुख कवियों के बारे में बताते हैं. 

हरीवंश राय बच्चन: हिंदी छायावाद के कवियों में सबसे ऊपर हरिवंश राय बच्चन का नाम आता है. हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवम्बर 1907 को इलाहाबाद में हुआ था. हरिवंश राय बच्चन द्वारा लिखी कवितायें आज भी लोगों द्वारा खूब पसंद की जाती है. आज भी लोगों में उनकी कविताओं की लोकप्रियता बनी हुई है.मधुशाला उनकी बहुत ही प्रसिद्ध कविता संग्रह हैं. 

महादेवी वर्मा: महादेवी वर्मा का जन्म 1907 में फ़र्रुखाबाद यूपी में हुआ था महादेवी वर्मा की गिनती छायावाद के प्रमुख कवियों में होती है. उन्होंने तकरीबन अपनी सारी उम्र प्रयाग महिला विद्यापीठ में पढ़ाने में निकाल दी.

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सुमित्रानंदन पंत: सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई 1900 में हुआ था. सुमित्रानंदन पंत द्वारा लिखी कवितायें आज भी लोगों द्वारा खूब पसंद की जाती है. सुमित्रानंदन पंत द्वारा लिखी “कला और बूढ़ा चाँद” के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला. 28 दिसंबर 1977 को सुमित्रानंदन पंत दुनिया को अलविदा कह दिया.

जयशंकर प्रसाद: जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1989 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था. निराला, पंत, महादेवी के साथ जयशंकर प्रसाद भी हिंदी साहित्य के छायावाद के चौथे स्तंभ माने जाते हैं. जयशंकर प्रसाद ने साहित्य को इबादत समझा और उन्हें हिन्दी के अलावा संस्कृत उर्दू और फ़ारसी का भी ज्ञान था.

सूर्यकांत त्रिपाठी: सूर्यकांत त्रिपाठी का जन्म 16 फरवरी 1896 को मिदनापुर बंगाल में हुआ था. बंगाल में पले बड़े होने की कारण से ये रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और टैगोर से काफी ज्यादा प्रभावित थे. सूर्यकांत त्रिपाठी की रचनायें कल्पनाओं की जगह ज़मीनी हकीक़त को दिखाती हैं.

रामधारी सिंह दिनकर: रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितम्बर 1908 को सिमरिया बिहार में हुआ था. रामधारी सिंह दिनकर को वीर रस का सर्वश्रेष्ठ कवि माना जाता है. इस बात का सबूत है  उनकी कविता ‘कुरुक्षेत्र’, लेकिन ‘उर्वशी’ के लिए  उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है.

अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना: अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना को ज्यादातर लोग ‘रहीम’ के नाम से ही जानते है. अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना का जन्म 17 दिसम्बर 1556 यानि की मुग़ल काल में पाकिस्तान में हुआ था. रहीम अवधी और बृज दोनों भाषा में लिखते थे.

संत कबीर: हिन्दी भाषा के लेखन में निर्गुण भक्ति आन्दोलन की शुरुआत करने वाले संत कबीर का जन्म 1440 ईस्वी में काशी में हुआ था. संत कबीर ने एकदम सरल और सहज शब्दों में राम और रहीम के एक होने की बात कही.  माना जाता है कि सन् 1518 के आसपास कबीर की मृत्यु हुई।

माखनलाल चतुर्वेदी: माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद ज़िले में हुआ था. माखनलाल चतुर्वेदी कवि होने के साथ-साथ पत्रकार भी थे. उन्होंने ‘प्रभा, कर्मवीर और प्रताप का सफल संपादन किया था.

मैथिलीशरण गुप्त: मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 में यूपी के झांसी जिले में चिरगाओं में हुआ था. मैथिलीशरण गुप्त अपनी कविताओं में खड़ी बोली का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते थे. उनकी कविताओं के लिए उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से नवाज़ा गया था. मैथिलीशरण गुप्त ने 12 दिसंबर 1964 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था.

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