धार्मिक

गायत्री मंत्र जाप और उसकी खूबियां

गायत्री शब्द को भारतीय संस्कृति की जननी कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार गायत्री एक वेदमाता हैं जिसमें मनुष्य के सारे पापों का नाश करने की क्षमता है। गायत्री मंत्र को वेदों का सबसे सर्वश्रेष्ट मंत्र बताया गया है। इसके जाप के लिए तीन समय निर्धारित किया गया है जो कि प्रातःकाल सूर्योदय से थोड़ा पहले का समय है, जाप सूर्योदय के पश्चात् तक करना चाहिए। इस मंत्र के दुसरे जाप का समय दोपहर का है, दोपहर में भी इस मंत्र का जाप किया जा सकता है। तीसरा समय है शाम का, जिसमे मंत्र शुरू करने के बाद कुछ देर तक जाप करते रहना चाहिए। इस तीन समय को छोड़कर यदि आप गायत्री मंत्र का जाप करना चाहें तो मौन रहकर या मानसिक रूप से जाप करना चाहिए।

गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र

गायत्री मंत्र और मंत्र का अर्थ:-

“ॐ भूभुर्व: स्व: तत्सवितुर्वरेंयम भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्”

सृष्टीकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

अर्थात:-

उस प्राणस्वरूप, दुखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ट, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरुप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।

गायत्री मंत्र जाप से होने वाली खूबियाँ:-

गायत्री हवन से रोग नाश- शुभ मुहूर्त में दूध, दही, घी एवं शहद को मिला कर 1000 बार गायत्री मंत्रों के साथ हवन करने से चेचक, आँखों के रोग एवं पेट के रोग समाप्त हो जाते हैं। इसमें समिधाये पीपल के पत्ते के होने चाहिए। मंत्रों के साथ नारियल का बुरा एवं घी का हवन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है और यदि शहद का प्रयोग किया जाए तो सौभाग्य में वृद्धि होती है।

गायत्री मंत्र

व्यापार या नौकरी में हानि हो रही है या कार्य में सफलता नहीं मिल रही, आमदनी कम है तथा व्यय अधिक है तो गायत्री मंत्र का जाप करने से काफी हद तक फायदा पहुंचता है। इसके साथ-साथ अगर रविवार को इसके लिए व्रत किया जाये तो अधिक लाभ होता है।

यदि किसी व्यक्ति को रोग से मुक्ति चाहिए तो किसी भी शुभ मुहूर्त में एक कांसे के पात्र में स्वच्छ जल भरकर रख लें और उसके सामने लाल आसन पर बैठकर गायत्री मंत्र का जाप करें।

यदि आपके विवाह में देरी हो रही है तो सोमवार को सुबह के समय पीले वस्त्र धारण कर माता पार्वती का ध्यान करते हुए ‘ह्री’ भिज मंत्र को जोड़ कर 108 बार जाप करने से विवाह कार्य में आने वाली सारी समस्याएं दूर हो जाती है।

ये मंत्र खास तौर से विद्यार्थियों के लिए भी काफी लाभदायक है। रोजाना इस मंत्र का 108 बार जाप करने से विद्याथियों को सभी प्रकार की विधा को प्राप्त करने में आसानी होती है।

गायत्री मंत्र के नियमित जाप से त्वचा में चमक आती है। नेत्रों में तेज आता है। सिद्धि प्राप्त होती है। क्रोध शांत होता है और ज्ञान की भी वृद्धि होती है।

अगर किसी दम्पति को संतान करने में कुछ समस्याएं आ रही या आप अपने संतान से दुखी हैं या फिर आपका संतान रोग ग्रस्त है, तो प्रातः पति-पत्नी दोनों मिलकर सफ़ेद कपड़े पहन कर ‘यौं’ बीज मंत्र का सम्पुट लगा कर गायत्री मंत्र का जाप करें। इन सभी किसी भी समस्या से शीघ्र मुक्ति मिलती है।

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