बीएचयू में विरोध के दौरान उग्र हुए 1200 छात्राओं को खिलाफ एफआईआर दर्ज

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विरोध करते लोग

लंका थाने का इंचार्ज संस्पेड


बनारस हिंदू विश्वविद्यालय(बीएचचू) में छेड़खानी को लेकर शुरु हुए विरोध ने शनिवार को विकराल रुप ले लिया। यहां विरोध में विश्वविद्यालय के अलावा कई अन्य लोगों ने हिस्सा लिया है।

विरोध करते लोग
विरोध करते लोग

लाठीचार्ज के दौरान कई छात्राएं हुए घायल

यह विरोध शनिवार को उस समय और विकराल हो गया है जब पुलिस ने छात्राओं पर लाठीचार्ज कर दिया। सबसे बड़ी बात थी पुलिस वालों में लड़कियो के हॉस्टल में भी लाठीचार्ज किया है। इस दौरान उनके साथ महिला पुलिस बल भी नहीं था। इस दौरान कई छात्राएं घायल हो गई थी।

इसके विरोध में छात्रों में बिड़ला चौराहे से वीसी आवास और बीएचूय गेट तक पथराव किया था। इस दौरान छह बाईक, एक ट्रैक्टर और होर्डिंग फूंक दी थी। लंका चौराहे स्थित पुलिस पिकेट में लगा लगी थी।

इस पथराव में 13 पुलिसकर्मी और इतनी ही छात्र-छात्राओं को चोट आई। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने दो दर्जन से ज्यादा राउंड हवाई फायरिगं की। आंसू गैस के गोले छोड़े। किसी तरह रात ढाई बजे स्थिति पर नियंत्रण किया गया।

सीएम ने जांच के दिए आदेश

इस बीच वाराणसी पुलिस ने बीएचयू परिसर में हिंसक वारदात और शांति भंग के आरोपों के तहत 1200 अज्ञात छात्र-छात्राओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं यूनिवर्सिटी कैंपस में लाठीचार्ज के लिए पहली नजर में दोषी पाए गए लंका थाने के इंचार्ज भेलूपुर की सीओ और एक अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को हटा दिया गया है।

वहीं यूपी को सीएम योगी आदित्यनाथ इस घटना पर रिपोर्ट मांगी है और साथ ही कहा है कि घटना के दोषियों को बख्शा नही जाएग और उनके खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी।

सरकारी प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के मद्देनजर मुख्य सचिव राजीव कुमार ने शनिवार रात बीएचयू मे हुई घटना की मंडलुयुकत नितिन रमेश गोकर्ण से जांच रिपोर्ट मांगी है। इस जांच में प्रमुख बिंदु में विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं एवं पत्रकारों पर लाठीचार्ज तथा आगजनी और तोड़फोड़ की घटना है।

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