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फिल्म ’31 अक्टूबर’ का असर होगा पंजाब चुनाव पर

फिल्म ’31 अक्टूबर’ का असर होगा पंजाब चुनाव पर


फिल्म ’31 अक्टूबर’ का असर होगा पंजाब चुनाव पर:- पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद से भड़के सिख दंगों पर आधारित फिल्म ’31 अक्टूबर’ में बॉलीवुड की अभिनेत्री सोहा अली खान एक सिख महिला का किरदार निभा रही हैं। सोहा अली खान इन दंगों में अपने परिवार की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद करती नजर आएगीं।

सोहा अली खान ने फिल्म की वजह से पंजाब में आने वाले चुनावों पर पड़ने वाले असर और फिल्म पर हो रही राजनीति के बारे में बात करते हुए कहा, कि यह फिल्म सिख दंगों की हकीकत से लोगों को रू-ब-रू कराएगी। ऐसे लोग, जो इन दंगों की वास्तविकता के बारे में नही जानते, वे फिल्म देखकर उस दर्द को समझ पाएंगे, जिनसे पीड़ित गुजरे है।

फिल्म '31 अक्टूबर' का असर होगा पंजाब चुनाव पर
फिल्म ’31 अक्टूबर’ पोस्टर

यहाँ पढ़ें : आखिरकार इंदिरा गांधी हत्याकांड पर बनी फिल्म को सेंसर बोर्ड से मिली मंजूरी

आने वाले पंजाब चुनाव पर फिल्‍म का असर

अगले साल 2017 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले है। जब सोहा अली खान से यह पूछा गया, कि क्या इस फिल्म का पंजाब के चुनाव पर असर पड़ेगा, तो जवाब में सोहा ने कहा, कि यह फिल्म किसी भी राजनीतिक पार्टी का विरोध नहीं करती है और फिल्म में सिर्फ सच्चाई को उजागर किया गया है। मगर फिर भी इसका थोड़ा बहुत असर पंजाब चुनाव पर पड़ेगा ही।

फिल्म '31 अक्टूबर' का असर होगा पंजाब चुनाव पर
सोहा अली खान
यहाँ देखें : सिख दंगों पर आधारिक फिल्म 31 अक्टूबर का पहला गाना रिलीज

फिल्म भाईचारे के बारे में है

सोहा अली खान ने फिल्म की कहानी बताते हुए कहा, कि इस फिल्‍म में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद मचे कत्लेआम में एक परिवार की खुद को बचाने की जद्दोजहद दिखाई गई है। यह देखना काफी मार्मिक होगा। सिख दंगों के दौरान गैर समुदाय के काफी लोगों ने अपनी जान खतरे में डालकर सिखों को बचाया था। यहां तक कि दो-तीन दिनों तक सिखों को अपने घरों में छिपाकर भी रखा था। यह फिल्म राजनीति के बारे में नहीं है, बल्कि भाईचारे के बारे में है।

फिल्‍म पर सेंसर बोर्ड की कैंची

फिल्म ’31 अक्टूबर’ की रिलीज होने की तारीख जैसे-जैसे पास आ रही है, विवाद उतना ही बढ़ता जा रहा है। फिल्म का विषय विवादास्पद होने के कारण सेंसर बोर्ड की कैंची की धार फिल्म पर कुछ ज्यादा ही तेज चल रही है। सोहा कहती है,कि सेंसर बोर्ड बस प्रमाणन बोर्ड है। वह सिर्फ फिल्मों को प्रमाणपत्र दे, बाकी दर्शकों पर छोड़ दे। आम दर्शक खुद तय करेगा, कि उसे क्या देखना है और क्या नहीं देखना है।

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