लाइफस्टाइल

निराशा में आशा की सुनहरी किरणें छुपी होती है

हर निराशा में आशा की किरण ज़रूर होती है


यह बात हमने कई बार सुनी है की हर निराशा में एक आशा की किरण छिपी होती है परंतु आपको पता होना चाहिए की यह केवल बात नही है यह सर्वथा सत्य है। और भी आसान शब्दों में कहें तो इसका अर्थ यह है की आपका हर परिस्थिति में सकारात्मक होना मुमकिन है आपको बस परिस्थिति के उस पहलू को ढूँढने की ज़रूरत है।

हम कयी बार ऐसी परिस्थितियों में फँस जाते हैं की ना तो हम उसमें ख़ुश रह पाते और ना ही उससे बाहर आ पाते हैं। हमें वह परिस्थिति फिर कठिन और ख़राब लगने लगती है। हमारी बातें भी तब तनाव से युक्त प्रतीत होती हैं। हमारी बातों से नाकरात्मक भाव व्यक्त होते हैं। हम समझ नही पाते हमें क्या करना चाहिए और हमारे मूड की वझह से कभी कभी तो हम अपने प्रियजनो को भी खो देते हैं।

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यह कहावत किसी एक इंसान के लिए नही है बल्कि यह सभी लोगों के लिए उपयुक्त है क्योंकि इस संसार मेल कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो दुखों के समय में भी ख़ुशी को ढूँढना नही छोड़ते। कही ना कही कभी ना कभी हम सभी निराशा के पलों में भूल जाते हैं की हमारे पास ख़ुश होने के कितने कारण हो सकते हैं। मशहूर नॉवलऔर मूवी हैरी पॉटर में एक डाइयलोग है जो एकदम उचित है- “अंधेरों के समय में भी ख़ुशियाँ हांसिल की जा सकती हैं अगर थाम के रखें रोशनी का दामन”। कई बार फ़िल्मे भी हमें कोई ना कोई अच्छा संदेश दे जाती हैं यदि ध्यान से उन्हें जीवन में उतार जाए तो।

दोस्तों इस दुनिया में किसी की ज़िंदगी बिलकुल स्मूध नही होती। उतार चढ़ाव हर किसी के जीवन का एक अभिन्न अंग होते हैं जिन्हें चाहकर भी अलग नही किया जा सकता। आप चाहे अपनी ज़िन्दगी को कितने भी अच्छे से प्लान क्यों ना कर लें परंतु समय के चक्र साथ प्लानिंग में भी बदलाव आते हैं जिससे कई बार बहुत हताश होना पड़ता है। “ज़िंदगी : उतार चढ़ाव का खेल” यह कहना अनुचित नही होगा। जीवन अपने साथ दुख और बंधन लाता है तो यदि हम ऐसी परिस्थितियों में ख़ुद को क़ाबिल ना समझने की भूल के बैठे तो यह उचित नही होगा।

हर किसी व्यक्ति का दुःख वाला समय ज़रूर होता है तो हर व्यक्ति को अपने दिमाग़ से यह बात नही निकालनी चाहिए की रात के बाद ही सुबह आती है जो रात के अंधेरे को हटाकर नया उजाले वाला दिन लेकर आती है। जब भी आपको लगे की यह आपका कठिन समय है तो ऐसे में ख़ुद को यह समझाए की यह थोड़े से समय की बात है कुछ समय बाद यह कठिन समय कही लुप्त हो जाएगा। जब आप ऐसा सोचेंगे तो वह बुरा समय ख़ुद ही ख़त्म हो जाएगा या फिर ये कहे की आपके अंदर उसका सामना करने की शक्ति आ जाएगी।

समय सभी घावों को भर देता है और यदि बात यादों की है तो आपको यह बात याद रखनी चाहिए की समय के साथ साथ लोग भी बदलते हैं तो इसे जीवन का एक पहलू समझ के अपनाने की कोशिश करें। आपके रोते रहने या दुखी रहने से धरती घूमना नही बंद करेगी। तो फिर ख़ुद को दुखी लेने का क्या फ़ायदा जब आपके दुखी होने से आपको लाभ नही। तो कभी भी उदासी में आशा की किरण को ना भूल जाएँ क्योंकि यदि आप ऐसा लेते हैं तो यह ख़ुद के साथ नाइंसाफ़ी होगी।

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