National Doctor’s Day 2020: जाने क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस

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डॉ.बिधानचंद्र रॉय के जन्मदिन पर मनाया जाता है राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस


हर साल पुरे भारत में 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। भारत के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ.बिधानचंद्र रॉय के सम्मान में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। डॉ.बिधानचंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई को 1882 में बिहार के पटना में हुआ था।क्या आपको पता है डॉ.बिधानचंद्र रॉय का जन्मदिन और उनकी पुण्यतिथि दोनों 1 जुलाई को ही पड़ती है। 1 जुलाई को पूरी चिकित्सा बिरादरी को श्रद्धांजलि दी जाती है और सभी लोगों को डॉक्टर का महत्व समझाया जाता है।  भारत सरकार ने 1991 में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाने की शुरुआत की थी।

डॉक्टर का हमारे जीवन में महत्व

वैसे तो पूरी दुनिया में डॉक्टर को सम्मान दिया जाता है। लेकिन अगर हम बात करे अपने भारत की तो यहाँ डॉक्टर को भगवान की तरह पूजा जाता है। डॉक्टर ने अपने काम से ये दर्जा हासिल किया है। वैसे तो कहा जाता है जीना मरना भगवान के हाथ पर है लेकिन भगवान ने डॉक्टर बना कर जीवन देने का हक डॉक्टर को भी दिया है। जैसा की अभी हम देख रहे है कि कोरोना वायरस के कारण न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया अभी इस महामारी से परेशान है। हज़ारो लोग अब तक इस महामारी के कारण अपनी जान गवा चुके है। इस महामारी को रोकने के लिए भारत सरकार ने लम्बे समय तक लॉकडाउन भी लगाया था जिसके कारण सभी लोग अपने घरों पर ही थे। घरों से ही काम कर रहे थे लेकिन इस महामारी के बिच भी हमारे डॉक्टर बिना रुके, बिना डरे लगातार हमारे लिए काम कर रहे है। उन्होंने लोगों की जान बचाने की लिए दिन रात एक की हुई है। इस लिए भारत में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिय जाता है और डॉक्टर को भी भगवान की तरह पूजा जाता है।

कौन थे डॉ.बिधानचंद्र रॉय

डॉ.बिधानचंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ था उनका का निधन भी 1 जुलाई 1962 को हुआ था। डॉ.बिधानचंद्र ने चिकित्सा के क्षेत्र में काफी योगदान दिया है। 1909 में जब डॉ.बिधानचंद्र रॉय डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए लंदन के प्रतिष्ठित सेंट बार्थोलोम्यू अस्पताल गए। तो वह उनको भारतीय होने के कारण दाखिला नहीं मिला। डॉ.बिधानचंद्र रॉय डेढ़ महीने तक डीन के पास अपना आवेदन लेकर जाते रहे। उन्होंने ठान ली थी कि वो आवेदन ले कर ही रहेंगे। आख़िरकार 30वीं बार में डीन को उनका आवेदन स्वीकारना ही पड़ा था। उसके बाद सिर्फ सवा दो साल में ही डॉ.बिधानचंद्र रॉय ने डॉक्टर की डिग्री हासिल कर ली थी। इसके बाद डॉ.बिधानचंद्र रॉय ने एक साथ फिजिशन और सर्जन की रॉयल कॉलेज की सदस्यता पाई। जिसके बाद वो भारत लोट कर आये और उन्होंने भारत की चिकित्सा क्षेत्र में काफी अच्छा काम किया।

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