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Delhi Acid Attack: दिल्ली में छात्रा पर हुआ एसिड अटैक, जानिए देश की कितनी बेटियां हो चुकी हैं शिकार

Delhi Acid Attack: हर साल देश में लगभग 300 तेजाब हमले, खुलेआम मिल रहा एसिड, तो कैसे थमेगा एसिड अटैक?

Highlights –

  • दिल्ली के द्वारका में 14 दिसंबर की सुबह 17 साल की एक स्कूल की छात्रा पर तीन बाइक सवार बदमाशों ने तेजाब फेंक दिया।
  • हाल ही में सरकार ने लोकसभा को देश में महिलाओं पर तेजाब फेंके जाने की घटना को डाटा के रूप में पेश किया।
  • सरकार के मुताबिक देश में 2018 से 2020 के दौरान महिलाओं पर तेजाब हमले के 386 मामले दर्ज किए गए तथा इस अवधि के दौरान ऐसे मामलों में कुल 62 लोगों को अदालतों द्वारा दोषी ठहराया गया।

Delhi Acid attack : दिल्ली में एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। दिल्ली के द्वारका में 14 दिसंबर की सुबह 17 साल की एक स्कूल की छात्रा पर तीन बाइक सवार बदमाशों ने तेजाब फेंक दिया। यह घटना सुबह 7:30 बजे तब घटित हुई जब छात्रा अपनी छोटी बहन के साथ स्कूल जाने के लिए रास्ते पर खड़ी थी। पुलिस रिपोर्ट्स के मुताबिक छात्रा की हालत काफी नाज़ुक है, छात्रा का 8 प्रतिशत चेहरा प्रभावित हुआ है। आपको बता दें कि एसिड अटैक की यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है जिसमें साफ – साफ तीन नकाबपोश बाइक सवार को छात्रा पर एसिड अटैक करते देखा जा सकता है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गंभीरता पूर्वक जांच कर रही है।

इसके अलावा एक बार फिर पूरे देश में एसिड अटैक जैसी घटनाओं पर सियासत गर्म हो गई है। दिल्ली महिला आयोग प्रमुख स्वाति मालीवाल ने घटना पर नाराजगी जताते हुए देश में तेजाब बैन न होने पर सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले की जांच के लिए टीम गठित की है।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक देश की बेटियां इस तरह की घटनाओं की शिकार होती रहेंगी। सवाल सीधा सरकार को जाता है कि क्यों अब तक तेजाब बैन को लेकर कोई ठोस कानून नहीं बनाया गया है क्योंकि इससे पहले भी देश में तेजाब की शिकार देश की बेटियां हो चुकी हैं। आइए एक नज़र डालते हैं पहले घटित हुई इन घटनाओं पर।

खजूरी खास में 12वीं कक्षा पर तेजाब फेंका – 17 अगस्त 2015 में खजूरी में एक छात्रा पर उसके पड़ोसी ने तेजाब फेंका।

महिला डॉक्टर पर तेजाब हमला – 23 दिसंबर 2014 में एक महिला डॉक्टर पर तेजाब से कुछ युवकों ने किया था तेजाब से हमला।

युवती पर पड़ोसी ने फेंका तेजाब – 22 मार्च 2017 को संगम विहार में एक युवती पर उसके पड़ोसी ने फेंका तेज़ाब।

प्रज्ञा सिंह , वाराणसी – 2006 में चलती ट्रेन में प्रज्ञा सिंह नाम की एक युवती के साथ तेजाब से हमला हुआ। प्रज्ञा वाराणसी की रहने वाली थीं। वह अपने होमटाउन से दिल्ली अकेली आ रही थीं। प्रज्ञा के अनुसार करीब रात 2 बजे उनके ऊपर तेजाब से हमला हुआ। प्रज्ञा की 12 दिनों पहले ही शादी हुई थी। जांच में पुलिस को यह पता चला कि जिस शख्स ने प्रज्ञा पर तेजाब से हमला किया था उस शख्स को प्रज्ञा ने शादी करने से इंकार कर दिया था। इस घटना में प्रज्ञा की एक आंख की रौशनी चली गई और करीब 15 सर्जरी से प्रज्ञा को गुजरना पड़ा।

दौलत बी खान

मुंबई की रहने वाली दौलत पर उनकी अपनी बड़ी बहन और जीजे ने तेजाब से हमला किया। उस वक्त दौलत की उम्र 26 साल थी। दौलत को इस घटना से उबरने में सालों लग गए।

अनमोल

अनमोल के साथ तेजाब हमले की घटना तब हुई जब वह महज 2 महीने की थीं। अपनी बच्ची और अपनी पत्नी की हत्या के मकसद से अनमोल के पिता ने उन पर तेजाब फेंका था।

रेशमा कुरैशी

रेशमा कुरैशी 17 साल की आयु में तेजाब हमले की शिकार हुईं। इस घटना को अंजाम रेशमा की बड़ी बहन के पति और उसके रिश्तेदारों ने दिया था।

सोनी देवी

उत्तर प्रदेश में सोनी के साथ उनके ससुरालवालों ने एसिड अटैक जैसे संगीन अपराध को अंजाम दिया। सोनी के पति को 7 सालों की सजा भी हुई लेकिन वह बेल पर छूटकर आराम की जिंदगी जी रहा है।

2 नाबालिग बच्चियों पर फेंका तेजाब – 18 फरवरी 2017 को दिल्ली के ख्याला में दो नाबालिग बच्चियों समेत पिता पर तेजाब फेंका गया था।

महिला पर पति ने फेंका तेजाब – 19 अक्टूबर 2016 को दिल्ली के रोहिणी में एक पति ने अपनी पत्नी पर फेंका तेजाब।

हाल ही में सरकार ने लोकसभा को देश में महिलाओं पर तेजाब फेंके जाने की घटना को डाटा के रूप में पेश किया। सरकार के मुताबिक देश में 2018 से 2020 के दौरान महिलाओं पर तेजाब हमले के 386 मामले दर्ज किए गए तथा इस अवधि के दौरान ऐसे मामलों में कुल 62 लोगों को अदालतों द्वारा दोषी ठहराया गया। यह जानकारी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने सदन में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ( एनसीआरबी ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया। आगे उन्होंने लोकसभा में यह बताया कि साल 2018 में महिलाओं के खिलाफ तेजाब हमले के 131 मामले, 2019 में 16 और 2020 में 105 मामले दर्ज किए गए। आपको बता दें कि यह डाटा लोकसभा को इसी साल के अगस्त महीने में सौंपी गई है।

इसके बावजूद भी तेज़ाब बिक्री और खरीदारी को लेकर कोई सख्त कानून न बनाना सरकार की कमजोरी को दर्शाता है।

अगला सवाल यह भी उठता है कि आरोपी तेजाब इतनी आसानी से ले कैसे पा रहे हैं। क्या तेजाब बिक्री या खरीदारी को लेकर देश में कोई सख्त कानून हैं?

जानकारी के अनुसार द्वारका की छात्रा पर हुए तेजाब हमले में आरोपियों ने फ्लिपकार्ट से तेजाब की खरीदारी की थी। देश का कानून तेजाब बिक्री और खरीदारी को लेकर क्या कहता है आइए जानते हैं-

कोई भी दुकानदार बिना लाइसेंस के तेजाब की बिक्री नहीं कर सकता है। इसके अलावा कोई भी दुकानदार तेजाब तभी बेच सकता है जब खरीदार सरकार द्वारा जारी एक फोटो आईडी और एसिड खरीदने का कारण भी बताए। 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति ना तो तेजाब बेच सकता है और न ही खरीद सकता है। इन कानूनों को पढ़कर तो बस यही पता लगाया जा सकता है कि तेजाब की बिक्री और खरीदारी बेहद ही खुले में आसानी से हो रही है।

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2015 में बेगुनाहों पर तेजाब हमले के संदर्भ में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया जो कितना कारगर है इसका पता आप खुदी ही लगा लीजिए।

2015 से पहले तेजाब की बिक्री पर कोई खास रोकथाम नहीं था लेकिन 6 फरवरी 2015 को यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया जब दिल्ली की लक्ष्मी ने अपने उपर हुए तेजाब हमले को लेकर कोर्ट से गुहार लगाई। लक्ष्मी बनाम भारत संघ केस में सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के संदर्भ में निर्देश दिया कि केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश जहर अधिनियम , 1919 के तहत अपराधों को गैर – जमानती बनाने की दिशा में काम करेंगे। इस फैसले में तेजाब की बिक्री प्रतिबंधित की गई लेकिन तब तक जब तक एसिड और अन्य संक्षारक पदार्थों की बिक्री को विनियमित करने के नियम लागू नहीं होते। जी हां और सवाल यही है कि साल 2015 में इस फैसले को सुनाया गया और हम आ चुके हैं साल 2022 में और अब तक तेजाब बिक्री और खरीदारी को लेकर कोई सख्त कानून नहीं बनाया गया।

तेजाब हमले में पाए गए दोषी की सजा की बात करें तो मीनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के अनुसार जो भी व्यक्ति तेजाब हमले का दोषी पाया जाता है उसे कम से कम 10 सालों की सजा होती है और पीड़ित के इलाज के पैसे भरने मात्र के फाइन लगाए जाते हैं।

जी हां आप खुद समझ सकते हैं कि तेजाब पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा और दोषी की सजा में कितना फर्क है। इसके अलावा सरकार पर उंगली उठाना और भी लाज़मी तब है जब इतनी संख्या में इस तरह की घटनाएं देश में लगातार हो रही हैं और सरकार मूक बनी हुई है।

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