तेज़ संगीत ने ली इस मगरमच्छ की जान

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crocodile death

संगीत को सुनते लगा सदमा और चली गयी जान


आज हवा में जिस तरह से प्रदूषण स्तर बढ़ता जा रहा है उस से हर कोई परेशान है. अब प्रदूषण भी कई तरह के है जैसे वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण. जिस तरह से देश में वायु प्रदूषण का स्तर तेज़ी  से बड़ा है उसी तरह ध्वनि प्रदूषण का स्तर भी लगतार बढ़ता रहा है जिस पर लोगो का ध्यान भी नहीं गया है.

ध्वनि प्रदूषण जितना मनुष्य को नुक्सान पहुँचाता है उतना ही  जानवरों को भी  नुक्सान पहुँचाता है. जी हाँ,  यह घटना चेन्नई कि हैं जहाँ एक मगरमच्छ की तेज आवाज में संगीत बजने के कारण  मौत हो गई.

तेज़ संगीत से लगा मगरमच्छ को सदमा

आपको बता दे कि चेन्‍नई के शेरेटन ग्रैंड में कुछ दिन पहले ही एक कार्यक्रम चल रहा  था. जिस कार्यक्रम में बहुत ही तेज़ी से गाने बज रहे थे. उस तेज़ संगीत को सुनकर पास के चिड़‍ियाघर के मगरमच्छ कि मौत हो गई. यह एक क्‍यूबन मगरमच्छ था और मगरमच्छ कि यह प्रजाति वर्ल्ड कंजर्वेशन यूनियन की फेहरिस्‍त में भी शामिल है.

ऐसा बताया जा रहा है कि मगरमच्छ कि मौत सदमा लगने से हुई. कार्यक्रम में चल रहे तेज़ संगीत को सुनकर  मगरमच्छ  को अचानक सदमा लग गया जिसके कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई. साथ जांच के दौरान यह भी पता चला की मगरमच्छ बिल्कुल स्वस्थ था. लेकिन तेज संगीत को सुनकर उस मगरमच्छ  को सदमा लगा और उसकी मौत हो गयी.

वही मद्रास क्रोकोडाइल बैंक के रोमूलस व्हाइटेकर ने बताया की उन्होंने कुछ महीने पहले ही शेरेटन होटल को इस खतरे के बारे में बताया था. साथ ही आम तौर पर ऐसी जगहों के लिए शाम के छह बजे तक 55 डेसिबल का संगीत और 6 बजे के बाद 45 डेसिबल का संगीत तय किया गया है जो कि पॉल्‍यूशन प्रिवेंशन एक्‍ट 2002 के अंतर्गत लागू किया गया है. लेकिन कार्यक्रम के दौरान उस दिन संगीत 85 से 140 डेसिबल  के बीच था.

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