Constitution day 2019: 26 नवंबर को मनाया जाता है संविधान दिवस, जाने इससे जुडी कुछ खास बातें

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Constitution day 2019

Constitution day 2019: क्यों मानते है संविधान दिवस??


Constitution day 2019: आज़ादी मिलते ही देश को सही तरीके से चलाने के लिए संविधान बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया था। भारतीय संविधान को 29 अगस्त 1947 को स्थापित किया गया था और इसके अध्यक्ष थे डॉ. भीमराव अंबेडकर। दुनिया भर के संविधान को बारीकी से पढ़ने के बाद डॉ. अंबेडकर ने बाकी सदस्यों सहित भारतीय संविधान का मसौदा तैयार कर लिया। 26 नवंबर 1949 को इसे भारतीय संविधान सभा के सामने लाया गया और इसी दिन संविधान को सभा द्वारा अपना लिया गया। यही वजह है की हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है।

विश्व का सबसे बड़ा संविधान:

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है, और इसी के आधार पर भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र माना जाता है। भारतीय संविधान में 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां शामिल हैं। यह 2 साल 11 महीने और 18 दिन में बनकर तैयार हुआ था। जनवरी 1948 में संविधान का पहला प्रारूप चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया। 4 नवंबर 1948 से शुरू हुई यह चर्चा तकरीबन 32 दिनों तक चली थी। इस अवधि के दौरान 7,635 संशोधन प्रस्तावित किए गए जिनमें से 2,473 पर विस्तार से चर्चा हुई।

संविधान की स्थापना:

26 नवंबर, 1949 को लागू होने के बाद संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान पर हस्ताक्षर किए, और इन सबके बाद 26 जनवरी को भारतीय संविधान लागू कर दिया गया। ऐसा कहा जाता है की जिस दिन संविधान पर हस्ताक्षर किये जा रहे थे उस दिन बहुत ज़ोर से बारिश भी हो रही थी, और प्राचीन भारतीय मान्यताओं के अनुसार इसे शुभ संकेत के रूप में देखा गया।

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टाइपिंग से नहीं लिखा गया था संविधान:

भारतीय संविधान की मूल कृति हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही हस्तलिखित है। भाषाओं में संविधान की मूल प्रति को प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखा था। रायजादा का खानदानी पेशा कैलिग्राफी का था। उन्होंने नंबर 303 के 254 पेन होल्डर निब का इस्तेमाल कर संविधान के हर पेज को बेहद खूबसूरत इटैलिक लिखावट में लिखा है।

हीलियम से भरे गैस कक्ष में रखा गया है संविधान:

भारतीय संविधान के हर पेज को चित्रों से आचार्य नंदलाल बोस ने सजाया है। इसके अलावा इसके प्रारंभिक पेज को सजाने का काम राममनोहर सिन्हा ने किया था। वह नंदलाल बोस के ही शिष्य थे। संविधान की मूल प्रति भारतीय संसद की लाइब्रेरी में हीलियम से भरे केस में रखी गई है।

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