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4 दिन तक मनाया जायेगा छठ पूजा का महापर्व, यह है पूजा का सही मुहूर्त

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य और क्या है इसका महत्व?


हर साल दिवाली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से ही देवी छठ माता की पूजा अर्चना शुरू हो जाती है और सप्तमी तिथि की सुबह तक चलती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को लोग नहा कर भोजन ग्रहण करते है। इसमें व्रती यानी जो लोग व्रत रखते है उनका मन और तन दोनों ही शुद्ध होते हैं। इस दिन व्रती शुद्ध सात्विक भोजन करते हैं।

आपको बता दें की शुक्ल पक्ष की पंचमी पर जो लोग व्रत रखते है वो सारा दिन निराहार रहते हैं। उसके बाद शाम के समय गुड़ वाली खीर का विशेष प्रसाद बनाकर छठ माता और सूर्य देव की पूजा करके खाते हैं।षष्टि तिथि के पूरे दिन निर्जल रहकर शाम के समय अस्त होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं और सूर्यदेव से अपने मन की कामना कहते हैं।फिर सप्तमी तिथि के दिन सुबह के समय उगते सूर्य को भी नदी या तालाब में खड़े होकर जल देते हैं और अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण  होने  के लिए प्रार्थना करते हैं।

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य

डूबते सूर्य को अर्ध्य देने के पीछे एक बहुत बड़ी मान्यता है कि सूर्य की एक पत्नी का नाम प्रत्यूषा है और यह जो डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है यह उन्हें ही दिया जाता है। संध्या के समय में अर्ध्य देने से कई तरह से लाभ होते है। ऐसा कहते है की इसे से आँखों की रौशनी बढ़ जाती है। लम्बी आयु  मिलती है। इस अर्ध्य माता या पिता ही नहीं बल्कि विद्यार्थी भी रख सकते  है जिस से उनको शिक्षा में भी लाभ मिल सकती है।

4 दिन मना जायेगा छठ पूजा का महा पर्व

छठ पूजा नहाय-खाए – 31 अक्टूबर

खरना का दिन – 1 नवम्बर

छठ पूजा संध्या अर्घ्य का दिन – 2 नवम्बर

उषा अर्घ्य का दिन – 3 नवम्बर

और पढ़े: गोवर्धन पूजा के  पीछे  छुपी है यह पौराणिक कथा

अब जाने क्या है छठ पूजा का सही मुहूर्त?

इस बार  छठ पूजा का सही मुहूर्त है  2 नवंबर,को  सूर्योदय का शुभ मुहूर्त- 06:33

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का शुभ मुहूर्त- 17:35

षष्ठी तिथि आरंभ- 00:51 2 नवंबर 2019

षष्ठी तिथि समाप्त- 01:31 3 नवंबर 2019

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