बीजेपी और आरएसएस मेरे खिलाफ साजिश रच रही है- लालू प्रसाद यादव

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लालू प्रसाद यादव

मैं जांच से नहीं डरता हूं


आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर एक बार सीबीआई ने शिकंजा कस लिया है। इस बार मामला रेलवे से संबंधित है। लालू पर आरोप लगे हैं कि रेलवे मंत्री रहते हुए उन्होंने घोटाले किए हैं।

लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव

लालू के आवास पर सीबीआई कर रही है जांच

साल 2006 में लालू रेलवे मंत्री थे। उसी समय रेलवे के होटल को निजी कंपनियों के देने के मामले में सीबीआई जांच कर रही है। आज लालू पटना आवास पर सीबीआई अफसरों का जमावड़ा लगा हुआ है। आवास पर लगभग दो दर्जन से अधिक ऑफिसर जांच कर रहे हैं।

लालू इस वक्त पटना में मौजूद नहीं है। वह रांची हाईकोर्ट में चारा घोटाले में मामले मे पेश हुए है।

सीबीआई ने छापेमारी के दौरान तेजस्वी यादव, सरल गुप्ता और पीके गोयल के निवास से लैपटॉप, आईपैड और मेल पर निविदा संबधी दस्तावेजों को प्राप्त किया। विनय कोचर और विजय कोचर से खाता विवरण और ई-मेल आईडी भी ली गई। उनसे जिन कंपनियों में उन्होंने काम किया, वहां का विवरण भी प्रस्तुत करने के लिए कहा। साथ ही बैंक खाता और लॉकर का भी विवरण लिया गया है।

सबकुछ एनडीए सरकार के दौर में हुआ है

वहीं दूसरी ओर लालू इस छापेमारी को बीजेपी और आरएसएस की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि वह ऐसी जांच प्रक्रिया से नहीं डरते हैं।

लालू ने कहा कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। सारा काम सिस्टम से हुआ है। सबकुछ एनडीए के दौर मे हुआ।

साथ ही कहा कि मैं रांची में हूं मेरा परिवार पटना में मौजूद है। जहां छापेमारी चल रही है। बीजेपी और आरएसएस की यह साजिश है। हम नरेंद्र मोदी को हटाकर ही दम लेंगे। देश की हालत बदतर है। मैंने कुछ भी गलत नही किय है।

लाइसेंस फीस के तौर पर 1 करोड़ रुपये मिलने थे

लालू ने कहा कि होटलों को निजी कंपनियों के देने के मामले में पूरे नियमों का पालन किया गया है। आईआरसीटीसी का गठन 1999 में हुआ। जबकि यह 2002 में कार्य में आई। साल 2003 में होटल यात्री निवास को आईआरसीटीसी को सौंपा। 2006 में आईआरसीटीसी ने ओपन टेंडर शुरु किया।

लालू 31 मई 2004 को रेलमंत्री बने। साल 2006 में होटलों को मरम्मत और देखभाल के लिए ओपन टेंडर निकाले गए। होटलों को 15 साल के लिए लीज पर लिया। समझौते के तहत पार्टी को 15 साल तक लाइसेंस फीस चुकाना था। दिल्ली वाले यात्री निवास को टाटा ग्रुप ने लीज पर लिया था।

समझौते के बाद आईआरसीटीसी को लाइसेंस फीस के तौर पर एक करोड़ मिलना था। लालू ने कहा कि कोई भी व्यक्ति यह नहीं दिखा सकता है कि कागज पर लालू यादव ने हस्ताक्षर किए हैं।

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