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कावेरी विवाद: दिसंबर तक पानी नहीं दे सकते- कर्नाटक

कावेरी विवाद:  दिसंबर तक पानी नहीं दे सकते- कर्नाटक


कावेरी विवाद:  दिसंबर तक पानी नहीं दे सकते- कर्नाटक :- कर्नाटक ने सुप्रीम कोर्ट में आज कावेरी जल विवाद को लेकर अपना जवाब पेश किया। कर्नाटक का कहना है कि राज्य के जलाशयों में पानी की कमी है। बेंगलूरु शहर और कावेरी बेसिन के जिलों ने पीने के पानी की कमी है। इसी कमी को देखते हुए वह तमिलनाडू को दिसंबर तक कावेरी का पानी नहीं दे पाएंगा।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश 6,000 क्यूसेक पानी देना होगा रोजाना

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कर्नाटक को 21 से 27 सितंबर तक तमिलनाडू को रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी देना होगा।

तीन दिन पहले ही कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान एक प्रस्ताव पारित किया था। जिसमें कहा गया है ‘पानी का उपयोग पेयजल की जरुरतों के लिए होगा और इसे दूसरे मकसद के लिए नहीं दिया जाएगा।’

सदन में मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा था “यह असंभव परिस्थिति पैदा हो गई है जहां अदालती आदेश का पालन संभव नहीं है।”

कावेरी विवाद:  दिसंबर तक पानी नहीं दे सकते- कर्नाटक
कावेरी नदी

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5 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पानी छोड़ने का आदेश दिया था

तमिलानाडू में पानी के जरुरत को देखते हुए 5 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कर्नाटक को लगातार दस दिन तक तमिलनाडू को 15,000 क्यूसेक पानी देना होगा।

कर्नाटक राज्य ने पानी की कमी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 10,000 क्यूसेक पानी देने की इजाजत मिली। जिस पर फैसला आया कि कर्नाटक को 12,000 क्यूसेक रोजाना पानी देना होगा।

राज्य में हुआ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन

इस बीच कर्नाटक में आंदोलन और हिंसा की घटनाएं को देखते हुए कावेरी निगरानी कमिटी ने 19 सितंबर से कहा था कि वह 21 सितंबर से 30 सितंबर तक तमिलनाडू को 3,000 क्यूसेक पानी देगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा कि 6,000 क्यूसेक पानी देना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक राज्य में इसका जबरदस्त विरोध हुआ। हिंसक आंदोलन के दौरान राज्य की संपत्ति को बहुत सारा नुकसान पहुंचा। विरोध करते हुए लोगों ने बेंगलूरु बस अड्डे में तमिलनाडू नंबर की बसों को आग लगा दी।

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