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पिता की टी-शर्ट से लिपटी मासूम बच्ची और मृत्य पिता की तस्वीरों से उठा रोष,जानिये क्या है पूरा मामला

अपनी सुरक्षा के लिए शरणार्थी पार कर रहे हैं बॉर्डर , सरकार की कैसी लापरवाही


साल्‍वाडोर के एक नागरकि और उसकी दो साल की बेटी की हैरान कर देने वाली तस्‍वीर ने दुनिया को हिला दिया है. पिता-बेटी दोनों मेक्सिको की रियो ग्रेनेड नदी से अमेरिका में प्रवेश करने की कोशशि कर रहे थे, लेकिन दोनों फिसलकर गिर गए और उनकी मौत हो गई. इस घटना से दुनिया भर में गुस्‍सा है कि किस तरह शरणार्थी अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं.

क्या है वायरल तस्वीरों का सच

इस हादसे के बाद एक तस्वीर इंटरनेट पर तेज़ी से वायरल हो रही है जिसमें पिता और मासूम बच्ची की लाश नदी के किनारे पड़ी नजर आ रही है. पानी से बचाने के लिये पिता ने बेटी को अपनी टी-शर्ट से बांधा हुआ था.बताया जा रहा है कि 25 वर्षीय ऑस्कर मॉर्टिनेज रमायरेज अपनी 21 वर्षीय पत्नी और 2 वर्षीय बेटी के साथ मेक्सिको की नदी पार कर बॉर्डर से निकलने की कोशिश कर रहे थे, मगर तेज लहरो के कारण वह सक्षम नही हो पाये. हादसे में रमायरेज और उनकी बेटी की मौत हो गई लेकिन किसी तरह रमायरेज की पत्नी अपनी जान बचा कर किनारे तक आने में कामयाब हों गई. दोनो शव सोमवार को मेक्सिको के टमौलीपास राज्य के माटामोरस से बरामद हुईं थीं.

HERE IS THE TRUTH BEHIND VIRAL IMAGE OF MEXICO.

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साल्वाडोर के विदेश मंत्री का आया बयान

दिल दहला देने वाली पिता-पुत्र की तस्‍वीर को लेकर साल्‍वाडोर के विदेश मंत्री एलेक्‍जेंडर हिल ने कहा, “हमारा देश फिर से शोक में है. मैं सभी परिवारों और अभिभावकों से प्रार्थना करता हूं कि अपनी जिंदगी को जोखिम में न डालें. जिंदगी कई गुना कीमती है.”

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अमेरिका की उत्तर कोरिया को चेतावनी, सैन्य विकल्प के लिए तैयार है

आठ बैंको को किया बैन


उतरी कोरिया को बार-बार मना करने के बाद भी अपनी शक्ति प्रदर्शन करने के बाज नहीं आ रहा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनके पास उत्तर कोरिया को शांत करने के लिए सैन्य विकल्प हैऔर वह इसके लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने आगाह किया है सैन्य शक्ति का प्रयोग दोनों देशों के लिए विध्वंसकारी होगा।

डोनाल्ड ट्रंप

26 अधिकारियों को पर लगाया प्रतिबंध

वहीं एक बार फिर उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंध लगा दिया है. ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर दबाव बढ़ाने के क्रम 8 उत्तर कोरियाई बैंक और 26 बैंक अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

इससे पहले उत्तर कोरिया ने कहा था कि वह अमेरिका के बमवर्षक विमानों को गिराकर अपनी रक्षा करने के लिए तैयार है। जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह प्रतिक्रिया दी है।

अभियान विंध्वसकारी होगा

उत्तर कोरिया को उकसाते हुए ट्रंप ने कहा है कि वह अपनी सैन्य शक्ति अभियान के लिए तबाही लाने वाला होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका देश उत्तर कोरिया के खिलाफ सैन्य विक्लप के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही उन्होंने आगाह किया है कि दोनों देशों के बीच आगे और तनाव बढ़ने की स्थिति में ऐसा करना विंध्वसकारी होगा।

वहीं अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन न्यूचिन ने एक बयान में कहा शांतिपूर्ण और परमाणु हथियारों में मुक्त कोरिया प्रायद्वीप के अपने बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्तर कोरिया को अलग-थलग करने की दिशा में एक और कदम हैं। इस कदम के बाद इन बैंको और लोगों की अमेरिका में सभी संपत्तियों और हित्तों पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी.

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चेतावनी के बीच नॉर्थ कोरिया ने फिर दागी मिसाइल

जापान में यह मिसाइल गिरी


अमेरिका लाख चेतावनियों के बाद भी नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर बैलास्टिक मिसाइल दागी है। यह मिसाइल उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से छोड़ी गई है। इस महीने की शुरुआत में अपना छठा परमाणु परीक्षण किया था जो अब तक का उसका सबसे बड़ा परीक्षण है।

मिसाइल

प्रतिबंधों के बाद भी किया परीक्षण

यह परीक्षण उस समय किया गया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल एवं परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर उसके खिलाफ प्रतिबंधों के आठ सेठ लागू किए हैं।

उत्तर कोरिया से छोड़ी गई यह मिसाइल जापान के ऊपर से गुजरी और प्रशांत महासागर में गिरी। उत्तर कोरिया और जापान की सरकार ने इस बात की पुष्टि कर दी है।

नॉर्थ कोरिया की सेना के मुताबिक, ये मिसाइल सुबह करीब 7 बजे छोड़ी गई है जापान के होक्का-ईडो द्वीप के ऊपर से गुजरी, मिसाइल छोड़े जाने के बाद दक्षिण कोरिया ने राष्ट्रपति ने सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक बुलाई है।

जापान बर्दाश किया करेगा उत्तर कोरिया की गतिविधियों को

वही दूसरी ओर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने आज कहा कि जापान विश्व में अशांति नहीं फैलाना चाहता। वह उत्तर कोरिया के उकसावे वाली गतिविधियों को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।

आबे ने पत्रकारों ने कहा कि हम यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते कि शांति के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के उस ढृढ़ एवं एकजुट संकल्प को उत्तर कोरिया प्रभावित करे जो संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्रों मे जाहिर हुआ है। हम इस क्रूर कृत्य के खिलाफ एक बार फिर एकजुट हैं।

साथ ही कहा कि अगर उत्तर कोरिया इस रास्ते पर लगातार चलता रहेगा तो उसका कोई भविष्य नहीं होगा। हमें उत्तर कोरिया को यह समझाना होगा।

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ब्रिक्स सम्मेलन- नहीं चला पाकिस्तान का साथी, आंतकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई

10 आतंकी संगठन पर हुई चर्चा, ज्यादातर पाकिस्तान के


चीन के श्यामन में 9वां ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आतंकवाद का मुद्दा मुख्य रहा। पीएम मोदी ने जोरो-शोरों से सम्मेलन के आतंकवाद को मुद्दा उठाया। इतना ही नहीं पीएम आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी बात मनवाने में सफल रहे।

रुस प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन और पीएम नरेंद्र मोदी

ब्रिक्स सम्मेलन के घोषणा पत्र में 10 आतंकवादी संगठनो का जिक्र किया गया है। जिसमें लश्कर-ए-तैय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद समेत कुल 10 आतंकी संगठनो का जिक्र किया गया है। इनमें से ज्यादातर आंतकी संगठन पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं। पाकिस्तान का बिना नाम लिए ही इन आतंकी संगठनों को जिक्र किया गया है।

घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ में आंतकवाद की चर्चा

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत मे आतंकवाद का मुद्दा उठाया। ब्रिक्स श्यामन घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ मे आंतकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें लिखा गया है कि हम लोग आस-पास के इलाकों में फैल रहे आतंकवाद और सुरक्षा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं।

घोषणापत्र में कहा गया है कि हम लोग दुनिया भर में हुए आतंकी हमले में कड़ी निंदा की। इसमें कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है। घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी ब्रिक्स देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लडेंगे।

चीन ने हर बार अडंगा

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम रुसी पीएम ब्लादिमीर पुतिन से मिले और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। इस बातचीत के दौरान भारत और रुस के बीच पर्यटन के लेकर बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

सम्मेलन से कुछ दिन पहले ही चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग पीएम मोदी से मिले थे। जिसके बाद ही डोकलाम से दोनों देशों की सेना पीछे हटी थी।

आपके बता दें ब्रिक्स सम्मेलन पर जिस अहम मुद्दे पर चर्चा हुई है। इससे पहले चीन इस मुद्दे अडंगा लगाता रहा है। चीन पाकिस्तानी समर्थक आतंकी संगठन अंतर्राष्ट्रीय संगठन घोषित करने पर अडंगा लगाती रही है। लेकिन इस बारे के घोषणापत्र से भारत को एक बड़ी सफलता मिली है।

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दो महीने बाद सुलझा डोकलाम विवाद, पीछे हटी दोनों देशों की सेना

चीन ने कहा पहले भारत की सेना हटे


पिछले दो महीने से भारत और चीन के बीच चल रहे डोकलाम विवाद पर आज विराम लग गया है। दोनों देशों की सेना पीछे हट रही हैं।

डोकलाम सीमा

दोनों देशों ने सेना हटाना शुरु की

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए बयान में कहा गया है कि दोनों देशों ने इस मुद्दे पर लगातार बात की है। जिसके बाद इस पर फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि विवाद के बाद भी पिछले कई दिनों से दोनों देशो को बीच इस मुद्दे को सुलझाने पर बात चल रही थी। दोनों देश के सेना अब धीरे-धीरे अपनी सेना हटाएंगी। दोनों देशों की सेना पीछे हटना शुरु भी हो गई है।

वहीं दूसरी ओर चीन विदेश मंत्रालय ने कहा कि अभी सिर्फ भारत की सेना ही पीछे हटेगी। चीन की सेना डोकलाम में लगातार पेट्रोलिंग करती रहेगी। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के बाद चीनी अखबार की ओर से ट्वीट कर कहा गया कि चीन और भारत ने 2 महीने से चल रहे डोकलाम विवाद को खत्म करने का फैसला किया गया है।

ब्रिक्स समिट के लिए चीन का दौरा करेंगे पीएम

आपको बता दें इससे पहले चीनी ने कई बार डोकलाम विवाद को लेकर भारत को धमकी दी थी। कुछ दिन पहले ही चीन से लद्दाख पर बन रही सड़क का निर्माण नहीं रोकता है तो यह भारत के लिए अच्छा नहीं होगा। इसके कारण डोकलाम विवाद और बढ़ता जाएंगा।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ दिनों के बाद ब्रिक्स समिट मे हिस्सा लेने के लिए चीन का दौरा करने वाले हैं। मोदी के दौरे से पहले ही दोनों देशों की कवायद विवाद को सुलझाने की थी। जिसका असर दिखाई दे रहा है। अभी तक जारी बयान से ये साफ नहीं कि कौन से देश की सेना पहले विवादित जगह से हटेगी।

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अमेरिका दौरे पर पहली बार पीएम ने किया सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र

दिया अपनी संस्कृति का परिचय, देश की रक्षा के लिए कुछ भी करेंगे


अपनी तीन देश की यात्रा के दौरान पीएम मोदी अमेरिका में पुहंचे। अमेरिका पहुंच कर पीएम ने भारतीयों को संबोधित किया और साथ ही आंतकवाद का मुद्दा जोरों-शोरों से उठाया।

भारतीय अमेरिकियों को किया संबोधित

वर्जीनिया में एक समारोह के दौरान भारतीय-अमेरिकियों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत विश्व को आतंकवाद के उस चेहरे के बारे मे समझाने में सफल रहा है, जो देश में शांति और सामान्य जीवन को तबाह कर रहा है।

अमेरिका में पाकिस्तान पर निशाना साधते  हुए प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने कहा कि नियंत्रण रेखा के पार भारत द्वारा किए गए सर्जिकल हमले यह  साबित करते हैं कि भारत अपनी रक्षा के लिए कड़े से कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के किसी भी देश ने इन हमलों पर सवाल नहीं उठाए।

सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि सामान्य तौर पर भारत हमेशा से संयम और धैर्य के साथ काम लेता है। लेकिन आतंकवाद से निपटने के और खुद की सुरक्षा करने के दौरान जरुरत पड़ने पर भारत अपनी शक्ति एवं पराक्रम भी दिखा सकता है।

दक्षिण चीन  पर साधा निशाना

मोदी ने पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कहा- हां उन लोगों की बात और है जो सर्जिकल हमलों का शिकार बने। उनकी यह बात सुनकर वहां बैठे श्रोता ठहाके लगाने लगे। दक्षिण चीन की आक्रमकता पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि  भारत अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिए वैश्विक व्यवस्था को भंग करने मे यकीन नहीं रखता।

अपनी संस्कृति का परिचय देते हुए मोदी ने कहा कि भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, शांति के लिए, अपने लोगों और प्रगति के लिए कड़े से कड़े कदम उठाने में सक्षम हैं।

आपको बता दें डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद आज पहली बार पीएन मोदी उनसे मुलाकात करेंगे। लेकिन इसस पहले कई बार उनकी ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत हो चुकी है। साथ ही उनके साथ डिनर भी करेंगे।

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 मून जे इन बने दक्षिण कोरिया ने नए राष्ट्रपति, उत्तर कोरिया से बनाना चाहते हैं अच्छे संबंध

आह्न चेओल सू को हराया


 

उत्तर कोरिया की तानाशाही और दक्षिण कोरिया के साथ बढ़ते तनाव के बीच दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति चुनाव संपन्न हो गया है। दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति ‘मून जे इन’ होगें। इससे पहले 64 वर्षीय मून जे इन राष्ट्रपित चुनाव लड़े थे। तब उन्हें पार्क गून हे ने करारी हारी दी थी।

मून जे इन डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ कोरिया के उम्मीदवार और उदारवादी विचारधारा के उम्मीदवार दें। उन्होंने मध्यमार्गी विचारधारा के आह्न चेओल सू को हराया है।

पूर्व राष्ट्रपति को पद से हटाया गया था

इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति पार्क गून हे को भ्रष्टाचार में लिप्त होने के बाद पद से हट दिया गया था। जिसके बाद दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति चुनाव करवाएं गए।

मून जे  इन


 

मून जे इन उत्तर कोरिया के साथ अच्छे संबंध बनाना चाहते है। लेकिन इससे पहले पार्क गून हे इसके पक्ष में नहीं थे। वह उत्तर कोरिया के साथ संबंध खत्म करना चाहते थे।

चुनाव प्रचार के दौरान बहुमत का दावा करते हुए मून जे इन ने कहा कि पार्क गून हे के राष्ट्रपति पद से हटाने के बाद देश में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो गई। उनके राष्ट्रपति बनने से यह विभाजन मिट सकता है। जबकि राज्यों में चुनाव प्रचार करते हुए आह्न चेओल-सू ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि चुनाव में वो ही जीतेंगे।

व्हाइट हाउस से मिलें मुबारकबाद

दक्षिण कोरिया के चुनाव आयोग के अनुसार मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी के मून को 42.2 प्रतिशत मत का समर्थन किया। जबकि मून के प्रतिद्वंद्वी होंग जून-प्यो को महज 25.2 प्रतिशत मत मिले और आह्न चेओल-सू को 21.5 प्रतिशत मत मिले। होंग ने मून को उत्तर कोरिया समर्थक वामपंथी कहा था। वाशिंगटन से एक रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने मून को जीत के लिए मुबारकबाद दी।

गौरतलब है कि मून की जीत से उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कठोर रुख को जटिलता का सामना पड़ सकता है।

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मुस्लिम सात देशों पर लगे ट्रैवल बैन को हटा सकते है ट्रंप

ट्रैवल बैन को हटा सकते है ट्रंप


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सात मुस्लिम देशों पर लगे ट्रैवल बैन से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। ट्रंप द्वारा दिए इस आदेश के बाद उन्हें लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा रहा था।

नया ऑर्डर अगले सप्ताह ला सकते हैं

डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कोर्ट में अपने जवाब में कहा कि ट्रैवल बैन जल्द ही वापिस लिया जाएगा। इसे लेकर किसी रैव्यू पैनल की जरुरत नहीं हैं। व्हाइट हाउस ने साफ किया कि इसको लेकर नया ऑर्डर अगले हफ्ते आ सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने 27 जनवरी को 7 मुस्लिम देशों के लोगों पर इमिग्रेशन बैन लगाया था जिसके बाद अमेरिका के कई राज्य इस फैसले का विरोध किया था।

खबरों की मानें तो व्हाइट हाउस की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि डोनाल्ड ट्रंप का मकसद देश की सुरक्षा है ना कि किसी फैसले को लेकर लंबी प्रक्रिया में फंसना, गौरतलब है कि पिछले हफ्ते 3 जजों की एक बेंच ने लोअर कोर्ट के फैसले को रद्द करने से मना कर दिया था।

कई राज्यों ने किया था विरोध

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मुस्लिम देशों के ट्रैवल के लिए बैन लगा दिया था। जिसके बाद वाशिगंटन और मिनेसोटा राज्यों ने कोर्ट में इस फैसले के विरुद्ध केस दायर किया था और ट्रंप द्वारा दिए गए ऑर्डर को गैरकानूनी बताया था। इन दोनों राज्यों के अलावा अमेरिका के अन्य 18 राज्यों ने भी इस फैसले का विरोध किया था।
आपको बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 जनवरी को अपने एक फैसले में इराक, ईरान, लीबिया, सूडान, सीरिया, सोमालिया और यमन के नागरिकों पर इमिग्रेशन बैन लगाया था। इसके तहत के यहां के लोग 90 दिनों तक अमेरिका में एंट्री नहीं ले पाएंगे।

आपको बता दें पिछले साल नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी हिलेरी क्लिटंन को राष्ट्रपति चुनाव में हराकर अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति बने थे.
अपने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ही उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रों को अपने निशाने पर रखा था। इसके साथ ही अमेरिका फर्स्ट का नारा दिया था।

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अमेरिका कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद का सफाया करेगा- डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद का सफाया करेगा- डोनाल्ड ट्रंप


डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को 45वें अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। ट्रंप ने शपथ खुले आसमान में सर्द मौसम के बीच ली। इस मौके पर लगभग आठ लाख लोग मौजूद थे। जो शपथ लेते डोनाल्ड ट्रंप देखने पहुचे।

कट्टरपंथ आतंकवाद का सफाया

शपथ ग्रहण करने के बाद अपने भाषण में ट्रंप ने ‘अमेरिका फस्ट’ का नारा दिया। जोकि उनके चुनाव प्रचार का मुख्य हिस्सा था।
अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन दुनिया से कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद का सफाया करेगा। साथ ही उन्होंने अमेरिकियों की नौकरियां बहाल करने का वादा किया।

अमेरिका फस्ट सरकार का मूलमंत्र

ट्रंप ने कहा कि हम पुराने गठजोड़ों को नयी ताकत देंगे। लोगों की उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फस्ट(सबसे पहले अमेरिका)उनकी सरकार का मूलमंत्र होगा और सत्ता वाशिंगटन से जनता को हस्तांतरित की जाएग।
नवंबर में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ने अपनी प्रतिद्वंदी हिलेरी क्लिंटन को हराकर सत्ता हासिल की थी। कल ट्रंप ने अब्राहम लिंकन की बाइबल पर बायां हाथ रखकर शपथ ली और इसके साथ ही वह उस कुर्सी पर आसीन हो गए जो दुनिया में सबसे शक्तिशाली कही जाती है।

शपथ लेते डोनाल्ड ट्रंप

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चुनौतियों को सामना करने को तैयार

कल दिए अपने पहले भाषण में ट्रंप ने कहा कि धरती से कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद का सफाया करने का संकल्प लिया और दुनिया को विश्वास दिलाया है कि उनकी सरकार दूसरे देशों पर अपना शासन नहीं थोपेगी। उन्होंने अपने 16 मिनट के संबोधन में कहा हम साथ मिलकर अमेरिका और दुनिया की कार्यप्रणाली तय करेंगे जो आने वाली कई सालों के लिए होगी। हम चुनौतियों का सामना करेंगे। हम कठिनाईयों का सामना करेंगे लेकिन अपना पूरा करेंगे।

पिछले कुछ समय से अमेरिका में आई नौकरियों को कमी को देखते हुए ट्रंप ने कहा कि यहां नेता समृद्ध हुए है लेकिन लोगों को नौकरियां चली गई है फैक्टियां बंद हो गई है। प्रशासनिक प्रतिष्ठान ने खुद की रक्षा की, लेकिन हमारे देश के नागरिकों की रक्षा नहीं की। उनकी जीत आपकी नहीं।

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आज डोनाल्ड ट्रंप लेगें शपथ

डोनाल्ड ट्रंप लेगें शपथ, बराक ओबामा ने लिखा भावुक पत्र


डोनाल्ड ट्रंप आज लेगें शपथ। वो अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के तौर पर आज शपथ ग्रहण करेंगे। डोनाल्ड 70 वर्ष हैं और रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से चुनाव लड़े थे। शपथ ग्रहण समारोह वाशिंगटन डीसी में सम्पन्न किया जाएगा। शपथ ग्रहण समारोह कैपिटल बिल्डिंग के वेस्ट फ्रंट में होगा। इसके साथ ही समारोह में लगभग 10 लाख लोग इकट्ठे होगें। सुरक्षा के लिहाजा से 28,000 कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा जगह-जगह बैरिकेट लगाए गए हैं। इसके साथ ही समारोह मे आतंकी हमले की भी आशंका जताई जा रही है।

डोनाल्ड ट्रंप और बराक ओबामा

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शपथ से पहले बाइबिल पाठ होगा

शपथ ग्रहण समारोह अमेरिकी समयानुसार 11.30 बजे होगी। समारोह का आयोजन खुले में किया गया है। खुले में करने की सबसे बड़ी वजह है मौसम ठीक होना। मौसम ठंडा है और आसमान में बादल है। बादल होने के वजह से आशंका जताई जा रही है कि परेड के दौरान बारिश हो सकती है।
शपथ ग्रहण समारोह ईसाई रीति रिवाज सम्पन किया जाएगा। शपथ ग्रहण पहले से पहले छह ईसाई धर्मगुरु बाइबिल पाठ और प्रार्थना करेंगे। इस बार एक यहूदी रब्बी भी प्रार्थना करेंगे। शपथ ग्रहण समारोह खत्म होने के बाद डोनाल्ड राष्ट्रपति के तौर पर अपना पहला भाषण देगें। ट्रंप के भाषण का थीम होगा मेक अमेरिका ग्रेट अगेन। यही ट्रंप का चुनावी नारा था।

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बराक ओबामा ने सबका आभार प्रकट किया

वहीं दूसरी ओर 44वें राष्ट्रपति के तौर पर अपने पद से इस्तीफा देने से पहले बराक ने अमेरिका वासियों के लिए एक भावुक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने अमेरिका वासियों का आभार प्रकट किया है।
ओबामा ने पत्र में लिखा है “मैं अमेरिका वासियों का आभार प्रकट करता हूं और और उन्हें प्रोत्साहित करना चाहता हूं कि नागरिकता की दैनिक कार्य में भाग लें।“
इसके साथ ही कहा है “45वें राष्ट्रपति के लिए सबके कुछ छोड़ने से पहले मैं सबको एक आखिरी धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होनें मेरे साथ काम किया है। मैं सब कुछ अपनी ऑफिस के समय के दौरान ही सिखा है सबकुछ आप लोगों से ही सिखा है। आपलोगों ने ही मुझे राष्ट्रपति बनाया है और एक बेहतर इंसान बनाया है।“

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