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Chaitra Navratri 2020: नवरात्रि में क्‍यों नहीं खानी चाहिए ये 5 चीजे

नवरात्रि में ये चीजें खाने से हो सकता है आपके शरीर को नुकसान


Chaitra Navratri 2020: नवरात्रि  में मां दुर्गा का पूजन किया जाता है नवरात्रि  का व्रत मां दुर्गा के भक्‍तों के लिये बेहद खास माना जाता है। इस दौरान कुछ भक्‍तजन अपनी मुरादें पूरी करने के लिये पूरे 9 दिनों का उपवास रखते हैं और वो इन 9 दिनों तक कुछ नहीं खाते बस फलाहार पर रहते हैं। नवरात्रि का व्रत शरीर को शुद्ध करने और खुद को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने के लिये प्रभावशाली तंत्र माना गया है। शरीर शुद्ध होने से मन भी शांत और स्थिर हो जाता है। इस लिए अपने शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाये रखने के लिए व्रत धारी फलाहार तथा सात्विक भोजन का सेवन करते हैं। इस दौरान वो न सिर्फ अनाज बल्‍कि उन सभी प्रकार के खानपान से भी दूर रहते है।  जिससे शरीर को अनेक प्रकार के नुकसान हो सकते हैं। यहां जानें नवरात्रि में किन किन चीजों को खाने से आपके शरीर को नुकसान हो सकता है।

1. मांसाहारी भोजन नहीं खाना चाहिए:

नवरात्रि के व्रत के दौरान मांसाहारी भोजन, अंडे, शराब और धूम्रपान नहीं करना चाहिए। यह राजसिक श्रेणी का भोजन है। और इस समय मौसम में आ रहे बदलाव को देखते हुए इन चीजों को नहीं खाना चाहिये। इससे शरीर में गर्मी भी बढ़ती है।

2. हल्‍दी, धनिया और जीरे का प्रयोग नहीं करना चाहिए:

आम दिनों में हम खाना बनाते वक्‍त बहुत सारे मसालों का इस्‍तेमाल करते हैं। मगर नवरात्रि के नौ दिन हमको हल्‍दी, धनिया और जीरे से परहेज करना चाहिए।  माना जाता है कि ये मसाले स्‍वाद में कड़वे होते है और शरीर में गर्माहट पैदा करते हैं। इसकी जगह आप काली मिर्च या लाल मिर्च पाउडर का उपयोग कर सकते हैं।

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3. अनाज जैसे गेहूं, चावल, सूजी, बेसन आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए: 

नवरात्रि  में जो लोग भी व्रत करते है वो लोग अनाज जैसे – गेहूं, चावल, सूजी, बेसन, मकई का आटा, आदि  का सेवन नहीं करते। गेहूं जैसे ग्लूटेन खाद्य पदार्थों की जगह आप एनर्जी पैदा करने वाली चीजो का सेवन कर सकते है।

4. सब्‍जियां जैसे प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए:

नवरात्रि  में सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए। आलू, गाजर, शकरकंद, कच्चा केला, आदि सब्‍जियां स्‍वाद में भी जायकेदार होती हैं और व्रत के दिनों में शरीर के लिए अच्छी होती है और इन्‍हें खाने से शरीर में पुरे दिन एनर्जी बनी रहती है। नवरात्रि के दौरान प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्‍योंकि ये तामसिक भोजन में शामिल होते हैं।

5. नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए

नवरात्रि में नोर्मल्ली घर पर यूज़ होने वाला नमक नहीं खाना चाहिए क्युकी इसमें सोडियम की मात्रा अधिक होती है। इन नौ दिनों में सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए। क्‍योंकि इसे शुद्ध माना जाता है। और इसमें सोडियम की मात्रा भी कम होती है।
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Makar sankranti 2020: क्या होगा राशियों पर असर?

Makar sankranti 2020: क्यों और कैसे मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व?


Makar sankranti 2020: मकर संक्रांति का त्योहार हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्योहारों है जो हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। सूर्य के उत्तरायन होने पर यानि जब सूर्य उत्तरायन होकर मकर रेखा से गुजरता है, तब संक्रांति मनाई जाती हैं। हिंदू धर्म के अनुसार सूर्य हर महीने  में अपना राशि परिवर्तन करते हैं और जब वे अपना राशि बदलते हैं तब संक्रांति मनाई जाती है। इस तरह साल में 12 संक्रांति मनाई जाती है लेकिन इन सभी संक्रांतियों में मकर संक्रांति सबसे महत्वपूर्ण होती है। आइये जानते है मकर संक्रांति के बारें में।

मकर संक्रांति 2020 शुभ मुहूर्त

हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है।  हालाँकि साल 2020 में मकर संक्रांति दो दिन यानी 14 और 15 जनवरी को मनाई जा रही हैं।इसका कारण यह है कि इस बार सूर्य का परिवर्तन 15 जनवरी को होने के कारण इसी दिन मकर संक्रांति मनाई जायेगी। हालाँकि कुछ लोग हर साल को 14 जनवरी को यह त्यौहार मानकर इस दिन यह मन रहे हैं। इस बार मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त 15 जनवरी सुबह 7:05 बजे से शाम 5:46 तक है।

मकर संक्रांति का महत्व

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत महत्व होता हैं। इस दिन विशेष रूप से तिल और गुड़ का बेहद महत्व होता है। इस दिन सुहानगण महिलाये तिल और गुड़ के लड्डू एवं अन्य व्यंजन भी बनाकर साथ में सुहाग की सामग्री का आदान प्रदान करती हैं। इस दिन को सुहागन महिलायें पति की आयु लंबी होने के लिए मानी जाती है। इस दिन को स्नान और दान का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन कई लोग तीर्थों एवं पवित्र नदियों में जाकर स्नान करके और दान पण्य कमाते हैं। हिन्दू धर्म में इस दिन दिए दान के महत्व को सूर्य देव के प्रसन्न होने के साथ जोड़ते हैं।

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मकर संक्रांति के दिन क्या  करें

इस दिन सुबह नहा धोकर सुहागन महिलायें पूजा पाठ करके सुहाग की चीज़ें आपस में एक दूसरे यानी बहिन,बेटियों या रिश्तेदार के साथ आदान प्रदान कर सकती हैं।

पूर्वजों के नाम पर श्राद्ध-तर्पण का कार्य करना चाहिए जिससे पितरों की आत्मा को शांति  प्राप्त हो।

इस दिन तिल के लड्ड़ओं या सूखे तिल कूट को बनाकर पूजा में भोग लगाकर सबको प्रसाद वितरण करें।

शास्त्रों में बताया गया है कि मकर संक्रांति के दिन  तिल का प्रयोग 6 प्रकार से करने से अनंत सुख मिलता है।

6 प्रकार से तिल का प्रयोग कैसे करें

• पानी में तिल मिलाकर स्नान करें
• तिल का तेल शरीर पर लगाए
• पितरों को तिलयुक्त जल से तर्पण करें
• अग्नि में तिलों का हवन करें
• बहन-बेटी को तिलों से बने पदार्थों का दान करें
• तिल से बने प्रदार्थों का सेवन करें

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Guru Nanak Jayanti: क्यों कार्तिक मास में ही मनाई जाती है गुरु नानक जयंती

Guru Nanak Jayanti: गुरु नानक देव और गुरु नानक जयंती से जुडी कुछ ख़ास बात


Guru Nanak Jayanti: गुरु नानक देव सिख धर्म के दसवें गुरु थे और इन्होने ही सिख धर्म की स्थापना भी की थी। समाज में व्याप्त बुराइयों को हटाने के लिए गुरु नानक देव ने बिना अपनी पारिवारिक जीवन और सुख की चिंता किये बिना बड़ी दूर-दूर तक यात्रायें की थी और लोगो के मन में बस चुकी कुरीतियों को दूर करने की दिशा दिखाई थी। इस साल 12 नवंबर को गुरु नानक देव जयंती है। गुरु नानक जयंती का जन्म प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है इसका कारण है की गुरु देव ने समाज से कुरीतियों को दूर करने के लिए सारे सुख त्याग दिए थे और मानव जीवन को नई दिशा दी थी।

नानक जी का जन्म:

नानक जी का जन्म रावी नदी के किनारे सिस्त तलवंडी में हुआ था। खास बात यह है की इनके जन्म को लेकर काफी अलग-अलग तारीख़ें बताई गई हैं, मगर जो असल जन्म तारीख़ है वो कार्तिक मास की ही मानी जाती है, जो दिवाली के 15 दिन बाद पड़ती है। इनके पिता कल्याणचन्द्र मेहता थे। तलवंडी जगह का नाम आगे चल कर ननकाना पड़ गया। बचपन से ही नानक अच्छी बुद्धि के थे मगर उनका किसी भी प्रकार से पढाई में मन नहीं लगता था और आठ साल की उम्र में ही उन्होंने पढाई छोड़ दी थी।

क्यों मानते है गुरु नानक जयंती:

गुरु नानक जयंती सिखों का बहुत महत्वपूर्ण पर्व होता है, क्योंकि इस दिन गुरु नानक देव का जन्मदिन होता है। सिखों द्वारा सभी गुरुओं के जन्मदिन मनाए जाते है और इसे ‘गुरुपर्व’ कहा जाता है। इस प्रकार गुरु नानक जयंती को गुरु नानक गुरुपुरब कहा जाता है। इसे गुरु नानक का प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है।

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गुरुपुरब के 3 बड़े स्तर:

उत्तर भारत में गुरु नानक जयंती तीन दिनों तक बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

पहला दिन- अखंड पाठ: इस दिन गुरुद्वारों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और न केवल गुरुद्वारों में बल्कि घरों में भी 48 घंटों तक पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ बिना रुके किया जाता है। यह ‘पाठ’ जन्मदिन की सुबह ही खत्म होता है।

दूसरे दिन- प्रभात फेरी:गुरु की स्तुति करते हुए एक धार्मिक जुलूस, ‘शब्द’ के रूप में, सुबह जल्दी निकाला जाता है, और यह आस पास की गलियों से गुजरता हुआ पास के गुरुद्वारा में समापन होता है।

तीसरा दिन- गुरु नानक जयंती: गुरू नानक जयंती का वास्तविक दिन सुबह शुरू होता है, जिसमें कविताओं, भजन और उद्धरण के गायन होते हैं, जो गुरु नानक की जीवनी को कायम करते है। इसके बाद ‘ग्रंथ साहिब’ से कीर्तनों के साथ ‘कथा’ की जाती है। इन सबके बाद ‘कर्हा प्रसाद’ सभी को दिया जाता है।

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जानिए मुस्लिम समुदाय क्यों मानते है ईद-ए-मिलाद-नबी’

ईद-ए-मिलाद-नबी’ क्या होता है ख़ास


मुस्लिम समुदाय ‘ईद-ए-मिलाद-नबी’ त्योहार को पैगम्बर हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी में मनाते हैं। इस्लाम धर्म में पैगम्बर हजरत मोहम्मद आखिरी नबी हैं। जिनको खुद अल्लाह ने फरिश्ते के जरिए कुरान का संदेश देने के लिए भेजा था। मुस्लिम समुदाय के लिए यह एक बड़ा त्योहार माना जाता है,इस दिन की समाज में कई मान्यताएं हैं। इस दिन मुस्लिम धर्म के लोग मस्जिदों और घरों में इबादत करते हैं। जुलूस निकालकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के संदेश को आम लोगों के बीच पहुंचाते हैं। इस दिन अपने लोग घरों में कुरान जरूर पढ़ते हैं। घरों में जगमग रोशनी की की जाती है। सड़कों में जगह-जगह सजावट की हुई होती है

ईद-ए-मिलाद-नबी’ को लेकर क्या है मुसलमानो में इसकी मान्यता

दरअसल मुसलमनो की मान्यता है की पैगम्बर हजरत मोहम्मद को खुदा ने खुद कुरान का संदेश देने के लिए भेजा था और वो अपने कामो से पुरे अरब में शांति फैलाएंगे यही वजह है की अफ्रीका के नीग्रो और अरब के लोग एक थाल में खाना खाते है और एक साथ नमाज़ अदा करते है । महिलाओ के लिए पहले पैगम्बर हजरत मोहम्मद ने ही सम्पति का अधिकार दिया था। लिहाज़ा मुस्लिम समुदाय पैगम्बर हजरत मोहम्मद हमेशा परम आदर भाव रखते है।

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आज के दिन शान्ति का पैगाम देते हुए आज के दिन मुस्लिम समुदाय के हज़ारो लोगो ने जुलूस निकाला था। ईद-ए-मिलाद-नबी के अवसर पर मस्जिद के ईदगाह तक जुलूस निकाला जाता है, जिसमे हज़ारों मुस्लिम हिस्सा लेते है, बड़े-छोटे सारे लोग इस जुलूस का हिस्सा होते है। सुबह-सुबह मुस्लमान मस्जिद में जाते है, जिसके बाद वो लोग एकत्रित होते है और सारी दुकानों से हो कर गुज़रते है और वहाँ से एक ईदगाह मैदान में पहुंचते है।

जिन बाज़ारो से ये जुलूस निकलता है, उन दुकानों को बेहतर तरीके से सजाया जाता है। ईदगाह मैदान में मौलाना लोगो को संबोधित करते है। इन सबके बाद लोग एक दूसरे को गले लग कर ईद की बधाई देते है। इस दौरान प्रसाशन के तरफ से भी कड़ी सुरक्षा का इंतज़ाम किया जाता है।

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4 दिन तक मनाया जायेगा छठ पूजा का महापर्व, यह है पूजा का सही मुहूर्त

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य और क्या है इसका महत्व?


हर साल दिवाली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से ही देवी छठ माता की पूजा अर्चना शुरू हो जाती है और सप्तमी तिथि की सुबह तक चलती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को लोग नहा कर भोजन ग्रहण करते है। इसमें व्रती यानी जो लोग व्रत रखते है उनका मन और तन दोनों ही शुद्ध होते हैं। इस दिन व्रती शुद्ध सात्विक भोजन करते हैं।

आपको बता दें की शुक्ल पक्ष की पंचमी पर जो लोग व्रत रखते है वो सारा दिन निराहार रहते हैं। उसके बाद शाम के समय गुड़ वाली खीर का विशेष प्रसाद बनाकर छठ माता और सूर्य देव की पूजा करके खाते हैं।षष्टि तिथि के पूरे दिन निर्जल रहकर शाम के समय अस्त होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं और सूर्यदेव से अपने मन की कामना कहते हैं।फिर सप्तमी तिथि के दिन सुबह के समय उगते सूर्य को भी नदी या तालाब में खड़े होकर जल देते हैं और अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण  होने  के लिए प्रार्थना करते हैं।

जाने क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्ध्य

डूबते सूर्य को अर्ध्य देने के पीछे एक बहुत बड़ी मान्यता है कि सूर्य की एक पत्नी का नाम प्रत्यूषा है और यह जो डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है यह उन्हें ही दिया जाता है। संध्या के समय में अर्ध्य देने से कई तरह से लाभ होते है। ऐसा कहते है की इसे से आँखों की रौशनी बढ़ जाती है। लम्बी आयु  मिलती है। इस अर्ध्य माता या पिता ही नहीं बल्कि विद्यार्थी भी रख सकते  है जिस से उनको शिक्षा में भी लाभ मिल सकती है।

4 दिन मना जायेगा छठ पूजा का महा पर्व

छठ पूजा नहाय-खाए – 31 अक्टूबर

खरना का दिन – 1 नवम्बर

छठ पूजा संध्या अर्घ्य का दिन – 2 नवम्बर

उषा अर्घ्य का दिन – 3 नवम्बर

और पढ़े: गोवर्धन पूजा के  पीछे  छुपी है यह पौराणिक कथा

अब जाने क्या है छठ पूजा का सही मुहूर्त?

इस बार  छठ पूजा का सही मुहूर्त है  2 नवंबर,को  सूर्योदय का शुभ मुहूर्त- 06:33

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का शुभ मुहूर्त- 17:35

षष्ठी तिथि आरंभ- 00:51 2 नवंबर 2019

षष्ठी तिथि समाप्त- 01:31 3 नवंबर 2019

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Happy Diwali 2019:दिवाली के अवसर पर अपनों को इस ख़ास अंदाज़ में करे विश

 इस दिवाली बाँटे प्यार अपनों के साथ  


आज पूरे देश में दिवाली का त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जा रहा है।लोग आज अपने घरों  को सजा रहे है एक दूसरे को मिठाई  देकर आपस में प्यार बाँट रहे है। आपको बता दें की हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा है । दीपावली का यह त्योहार धनतेरस से शुरू होकर नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा के बाद भाई दूज तक चलता है।

आज सभी लोग शाम को माँ लक्ष्मी की पूजा करेंगे और अपने घरों को दीपक, लाइट्स और रंगोली से सजायेंगे। ऐसे में अगर आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों तक मां लक्ष्मी का आशीष पहुंचाना चाहते हैं तो उनके साथ शेयर करें ये प्यार भरा सन्देश।

दिवाली पर इस ख़ास अंदाज़ में करे अपने दोस्तों को विश :

1. श्री राम आपके घर में सुख की बारिश करें, माता लक्ष्मी आपको धन से परिपूर्ण करें,

और दीप की रौशनी आपके घर से दुःख-कष्ट को दूर करे – दीपावली की शुभकामनाएं

2. दीपावली है दीपों का त्यौहार,

घर लाये आपके सुख, समृद्धि और प्यार – दिवाली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

3. हंसते हुए दीप तुम जलाना, जीवन में नई खुशियों लाना,

दुख दर्द अपने भूल कर,सबको गले लगाना- दीवाली की शुभकामनायें

4. अच्छे की बुरे पर विजय हो, सब जगह बस आपकी जय हो

आपके पूरे परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये

5. पल पल सुनहरे फूल खिले, कभी न हो आपका कांटो से सामना

आपकी जिंदगी  हमेशा खुशियों से भरी रहे- आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये

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6. आपको  मिले आशीर्वाद गणेश से, विद्या मिले सरस्वती से

धन मिले लक्ष्मी से, आप सभी को हैप्पी दिवाली

7. दिवाली पर बनती है रंगों की रंगोली

दीप जलाए, और साथ में खुशियाँ बाटे – हैप्पी दिवाली

8. सुख संपदा आपके जीवन में आए

लक्ष्मी जी आपके घर में समाए

भूल कर भी आपके जीवन में कभी दुःख ना आये – हैप्पी दिवाली

9. झिलमिलाते दीपों की रोशनी से प्रकशित

दिवाली आपके लिए लेकर आये सुख समृद्धि

हैप्पी दिवाली

10. पूजा की थाली, रसोई  में पकवान

आँगन में दिया , खुशियों हो तमाम – हैप्पी दिवाली

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धनतेरस पर पूजा में इन सामग्री को करे शामिल, होगी धन की प्राप्ति

पाना चाहते है धन की प्राप्ति यह सब करे जरूर


आज पूरे देश भर में धनतेरस का त्योहार जोरो शोरो से मनाया जा रहा है। लोग आज धनतेरस के लिए अपने घरो में सोना और वाहन जैसी चीजों को खरीदकर उनकी पूजा कर रहे है। अगर आप चाहते है की हमेशा आप पर धन की प्राप्ति हो तो धनतेरस  की पूजा में आप इन सामग्री को जरूर करे शामिल।

पाना चाहते है धन की प्राप्ति यह सब करे जरूर :

पान: धनतेरस पर पूजा की सामग्री के लिए पान का इस्तेमाल जरूर करें। ऐसा माना जाता है की पान के पत्ते में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए धनतेरस और दिवाली की पूजा में इसका इस्तेमाल शुभ माना जाता है।

सुपारी: धनतेरस की पूजा में सुपारी का इस्तेमाल के बिना पूजा शुरू ही नहीं होती है। सुपारी को ब्रह्मदेव, यमदेव, वरूण देव और इंद्रदेव का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस के दिन पूजा में प्रयोग की गई सुपारी को तिजोरी में रखना लाभदायक होता है।

साबुत धनिया: धनतेरस के दिन आप साबुत धनिया खरीदकर लेकर आएं और इसे मां लक्ष्मी के सामने अर्पित करें। इससे आपकी सारी आर्थिक परेशानी दूर हो जाएगी।

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बताशा और खील: बताशा माता लक्ष्मी का सबसे प्रिय भोग है। माता लक्ष्मी की पूजा में बताशे का प्रयोग करने से हर समस्या का समाधान होता है।

कपूर: मां लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धनवंतरी की पूजा में कपूर जरूर जलाएं। कपूर जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर जाती है और सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है।

धनतेरस पर इन चीज़ो की न करे खरीदारी

धनतेरस के दिन लोहा, कांच और एल्मुनियम के बर्तन नहीं खरीदना चाहिए। इससे आपके ग्रहो पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जब भी कोई बर्तन ख़रीदे कर लाये तो उसमे कोई अन्न रख कर लेकर आये। यह बात  हमेशा ध्यान दे की घर में कभी खली बर्तन नहीं लाना चाहिए। साथ  ही आपको इस दिन काले रंग से बचना चाहिए। यह अशुभ माना जाता है।

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दिवाली पर माँ लक्ष्मी को करे इस प्रकार प्रसन्न

जाने क्या है दिवाली पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त


Diwali Laxmi pujan 2019 : दिवाली नजदीक आ गयी है ऐसे में सभी के घरो में साफ़ सफाई होनी भी शुरू हो गयी है, साथ ही पूजा की तैयारीयां भी। शुक्रवार को धनतेरस से शुरू होने वाला पांच का दिनी पर्व जो की 29 अक्टूबर भाई दूज तक चलेगा। घरों की सजवाट के साथ लोग पूजन की तैयारी में जुटे हैं। कल धनतेरस पर्व है जो की भगवान धनवंतरी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आप वाहन, बर्तन और आभूषण आदि की खरीद कर उसकी पूजा करे ताकि माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद आप पर हमेशा बने रहे, साथ ही अल्प आयु मृत्यु से बचने के लिए घर के बाहर चार ओर से बाती निकालकर दीया भी जलाए।

ऐसे करे दिवाली पर माँ लक्ष्मी को प्रसन्न

ऐसी मान्यता है कि दिवाली के दिन दीपों की रोशनी में मां लक्ष्मी घर में आती हैं। जिस घर से मां अधिक प्रसन्न होती है, उन्हें कभी भी धन की कमी नहीं होती। अगर दिवाली वाले दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना हो तो इन 33 चीजों को अभी से रख लें और मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की भी पूजा करें।

मां लक्ष्मी की पूजा में कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश के लिए आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन पूजन सामग्री का इस्तेमाल करें और उनकी पूजा करे।

और पढ़े: दिवाली के अगले दिन क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा? यहाँ जाने

इस समय पर करे दिवाली पूजा यह है शुभ मुहूर्त

दिवाली पूजन के लिए इस साल दो मुहूर्त उचित हैं। पहला समय फैक्ट्री और कारखानों के लिए तो दूसरा दुकानों और घरों के लिए। फैक्ट्री, कारखानों में पूजन के लिए उपयुक्त समय दोपहर 2:10 से 3:40 बजे के बीच होगा। इस समय स्थिर लग्न कुम्भ होगी। जबकि दूसरा मुहूर्त शाम 6:40 से रात 8:40 बजे के बीच होगा। इस समय स्थिर लग्न वृषभ लग्न होगी।

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दिवाली के अगले दिन क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा? यहाँ जाने

क्या है हिन्दुओ  में इस दिन का महत्व?


अक्टूबर का महीना खत्म होने वाला है और दिवाली भी नजदीक आ गयी है। दिवाली के अगले दिन ही गोवर्धन की पूजा की जाती है और इस साल गोवेर्धन की पूजा 28 अक्टूबर को पड़ रही है। आपको बता दें की गोवर्धन पूजा को कई लोग अन्नकूट की पूजा से भी जानते है। इस दिन विभिन्न प्रकार के अन्न को समर्पित और वितरित करने के कारण ही इस उत्सव या पर्व का नाम अन्नकूट पड़ा है। इस दिन अनेक प्रकार के पकवान, मिठाई से भगवान कृष्ण को भोग लगाया जाता है।

क्यों की जाती है दिवाली के अगले दिन गोवेर्धन की पूजा?

गोवर्धन की पूजा करने के पीछे एक कहानी है ऐसा माना जाता है की भगवान श्रीकृष्ण इंद्र का अभिमान तोड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर गोकुल वासियों की इंद्र से रक्षा की थी। इसके बाद भगवान कृष्ण ने स्वंय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का आदेश दिया था, तभी से गोवर्धन पूजा की प्रथा आज भी कायम है और हर साल गोवर्धन पूजा की जाती है और अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है।

इसके अलावा इस दिन लोग घरो में गाय के गोबर से गोवर्धन की छवि बनाकर उनको पूजते है और अन्नकूट का भोग भी लगाया जाता है। इस दिन मंदिरो में भी अन्न दान किया जाता है। साथ ही धन-दौलत, गाड़ी, अच्छे मकान के लिए कृष्ण जी और मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है ताकि नौकरी या व्यापार में खूब तरक्की मिल सके। इस बार गोवेर्धन की पूजा आप दोपहर 3 बजकर 2 मिनट से लेकर शाम के 5 बजकर 15 मिनट तक कर  सकते है।

और पढ़े: जाने अपनी राशि के हिसाब से क्या खरीदे इस धनतेरस

दोस्तो को यह मैसेज भेज कर दें गोवर्धन की शुभकामनाएं

1. कृष्ण की शरण में आकर

भक्त नए जीवन पाते  है

इसलिए गोवर्धन पूजा के दिन

हम सच्चे मन से मनाते है

हैप्पी गोवर्धन पूजा

2. बंसी के धुन पर सभी के दुःख हरता है

वो कान्हा ही है जो सारे चमत्कार करता है

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Dhanteras 2019 – जाने अपनी राशि के हिसाब से क्या खरीदे इस धनतेरस

इस धनतेरस अपने जीवन साथी के लिए क्या खरीदना रहेगा शुभ


धनतेरस के दिन घर में सुख और समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करते है। अगर हम शास्त्रों के अनुसार देखे तो इस दिन धनवंतरी का जन्म हुआ था और यही वजह है की इस दिन को धनतेरस बोलते है। धनतेरस की शाम परिवार की मंगलकामना के लिए यम नाम का दीपक जलाया जाता है। मान्यता है की समुद्र मंथन से समय कलश के साथ माता लक्ष्मी का जन्म हुआ उसी के प्रतीक के रूप में सौभाग्य वृद्धि के लिए बर्तन खरीदने की परम्परा शुरू हुई थी। इसलिए आज हम आपको बताएँगे की आपकी राशि के लिए धनतेरस पर क्या खरीदना सबसे शुभ रहेगा।

मेष: मेष राशि के लोग पीतल के बर्तन खरीद सकते है और अगर पटनेर को गिफ्ट करना है तो आप चाँदी या सफ़ेद धातु के हार ले सकते है।

वृष: वृष राशि के लोग चाँदी के कलश खरीदना शुभ रहेगा और जीवनसाथ के लिए आप सोने की चूड़ी या अंगूठी भी ले सकते है।

मिथुन: इस राशि के लोग धनतेरस पर सफ़ेद धातु के श्री यंत्र या गणेश खरीद सकते है कांसे का बर्तन खरीदना भी सही रहेगा और जीवनसाथी के आप पीतल का कोई भी धातु खरीद सकते है।

कर्क: जीवनसाथ के लिए कर्क राशि के  लोग  मोती और हीरे की अंगूठी खरीद सकते है जो की शुभ रहेगा। इस राशि वालो के लिए पारद का शिवलिंग खरीदना भी शुभ होगा।

सिंह: इस राशि के लोग लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति सोने या पीले धातु के रूप में खरीदें। जीवनसाथी के लिए सोने या पीले पुखराज का लॉकेट लें।

कन्या: कन्या  राशि के लोग घर के लिए चाँदी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीद सकते है या फिर पारद या सोने के श्रीयंत्र  भी खरीद सकते हैं। जीवनसाथी के लिए चांदी का आभूषण ले सकते हैं।

तुला: घर के मंदिर के लिए चाँदी के श्रीयंत्र और दक्षिणवर्ती शंख लेसकते है और वही जीवनसाथी के लिए मुंगे की माला और अथवा कंगन खरीद सकते है।

वृश्चिक: तांबे के कलश, पीला कोई भी धातु खरीदना शुभ रहेगा। जीवनसाथ के लिए मोतियों की माला देना शुभ रहेगा।

धनु: इस राशि वाले लोगो के लिए पीला धातु खरीदना शुभ रहेगा और वही मुंगे का सामान खरीदना भी लाभदायक होगा।

मकर: जीवनसाथी को तो आप हीरे या चाँदी का कोई भी सामन देना शुभ रहेगा। बेडरूम के लिए सफेद धातु में मेज या कुछ भी खरीद सकते हैं।

कुंभ: इस राशि के लोग घर के मंदिर के लिए आप सफ़ेद धातु या चांदी का दीप दान लें। जीवनसाथी के लिए सोना माणिक्य या पुखराज की अंगूठी भी खरीद सकते हैं।

मीन: इस राशि के लोग अपने लिए पीला पुखराज ले सकते है या फिर आप घर के लिए चाँदी या सफ़ेद पिरामिड या गणेश या सरस्वती की मूर्ति लेना शुभ रहेगा। जीवनसाथी के लिए पन्ने या हीरे की अंगूठी लें।

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