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सुनंदा हत्याकांड की सुनवाई होगी 20 अगस्त को :  मौत के दस्तावेज किसी तीसरे से नहीं होंगे साझा

सुनंदा हत्याकांड की सुनवाई होगी 20 अगस्त को, केस मे आएगी तेज़ी


 दिल्ली की अदालत ने गुरुवार के दिन शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर के मर्डर में कांग्रेस नेता के खिलाफ संभावित आरोपों की दलील को 20 अगस्त को सुनने का एलान किया है। सुनंदा पुष्कर के मर्डर के बाद तरह-तरह से खुलासे सामने आ रहे हैं। इसी बीच शशि थरूर ने याचिका दायर कर अदालत से यह मांग की वे दिल्ली पुलिस और अभियोजन को यह निर्देश दे कि आरोप पत्र की गुप्त जानकारी किसी दूसरे या अनजान व्यक्ति से साझा न करें।

20 तारीख को सुनेगी दलील

कोर्ट ने इस याचिका को निपटाते हुए 20 अगस्त को आरोपों की दलील सुनने का एलान किया है। कोर्ट के विशेष न्यायधीश अरुण भारद्वाज ने आश्वासन देते हुए कहा कि क़ानून में पहले से कई ऐसे एक्ट हैं जिनके तहत दिल्ली पुलिस या अभियोजन इस केस से जुड़ी किसी भी गुप्त बातों को किसी तीसरे से नहीं शेयर कर सकती है क्योंकि, यह प्रावधान अभी तक पारित नहीं हुआ है कि पुलिस या अभियोजन किसी की खुफिया जानकारी को कोई अन्य को बता सके।

इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि इस बात के लिए किसी नए आदेश को पारित करने की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि, दिल्ली पुलिस या अभियोजन को किसी तीसरे सख्स से किसी भी जानकारी को साझा करने का बिलकुल भी अधिकार नहीं हैं। लेकिन अदालत ने यह भी कहा की अभियोजन को पूरी स्वतंत्रता है कि वह अपने बचाव के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह ले सकता है और दलील पेश करने के लिए सभी डाटा इकठ्ठा कर सकता है।

इतना ही नहीं अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन जिन विशेषज्ञ की सलाह लेता है उनके कागजात और रिकॉर्ड अपने साथ रखेगा साथ ही उसे पूरे मामले के भी रिकॉर्ड अपने पास ही रखने होंगे। अगर अदालत इन दस्तावेजों की मांग कर लेता है तो अभियोजन को इन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना एक कर्तव्य है।

इस तरह से शशि थरूर की याचिका की सुनवाई करते हुए और उस पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने पूरे मामले की दलील को सुनने के लिए 20 अगस्त की तारीख को सूचीबद्ध कर दिया है।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं रिहा

पूर्व केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा को अदालत ने जमानत के तौर पर रिहा कर रखा है। जबकि, दिल्ली पुलिस ने उनके ऊपर धारा 498 ए और धारा 306 के तहत आरोप लगाया था। धरा 498 ए तक लगता है जब कोई पुरुष अपनी पत्नी या अन्य महिला के साथ अत्याचार करता है।

घर में चल रहा था काम

सुनंदा पुष्कर की मृत शरीर 17 जनवरी 2014 की रात होटल के एक कमरे पर पड़ी मिली थी। दरअसल, उन दिनों शशि थरूर के घर में मरम्मत का कार्य चालू था इसलिए वे अपने पत्नी सहित होटल पर ही थे।सुनंदा पुष्कर एक बड़ी और कामयाब बिजनेस वीमेन और शशि थरूर की पत्नी थीं।

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मोतीलाल वोरा होंगे कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष

राहुल गाँधी अपने फ़ैसले पर अटल, नहीं संभालेंगे पार्टी की कमान


राहुल गाँधी है अपने फैसले पर है अटल  है  और  उन्होंने यह साफ़ कर दिया की वो पार्टी की कमान नहीं संभालेंगे.  राहुल गाँधी ने हाल ही में अपने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और वो अपना फैसला नहीं बदलना चाहते. इसकी अहम  वजह है 2019  के लोकसभा चुनाव में मिली हार .राहुल ने खुद को  इस  हार का जिम्मेदार बताते हुए  सोशल मीडिया अकाउंट पर ट्वीट कर के ओपन लेटर भी जारी किया है. इस ओपन लेटर में राहुल गांधी ने लिखा, “कांग्रेस पार्टी के लिए काम करना मेरे लिए सम्मान की बात थी’ और ‘अध्यक्ष के नाते हार के लिए मैं जिम्मेदार हूं. इसलिये अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं’.पार्टी को जहां भी मेरी जरूरत पड़ेगी मैं मौजूद रहूंगा.”

आपको बता दें,  बुधवार को राहुल गांधी ने कहा की  एक महीने पहले ही नए अध्यक्ष का चुनाव हो जाना चाहिए था. ‘बिना देर किए हुए नए अध्यक्ष का चुनाव जल्द हो. मैं इस प्रक्रिया में कहीं नहीं हूं. मैंने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया है और मैं अब पार्टी अध्यक्ष नहीं हूं.”

मोतीलाल वोरा को बनाया गया कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष 

जहाँ एक तरफ राहुल गाँधी अपनी हार का जिम्मेदार बता कर इस्तीफा दे चुके है वही  अब पार्टी का नया अध्यक्ष मोतीलाल वोरा को नियुक्त किया गया है. व राहुल गंधी के  इस फैसले से कई कांग्रेसी नेता खुश नहीं है.  उनका कहना है कि  उन्होंने राहुल गाँधी को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाया लेकिन राहुल गांधी हमेशा कहते रहे हैं कि वह अपना मन नहीं बदलेंगे.  इसके अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी राहुल गाँधी से मीडिया के सामने पद से इस्तीफा वापस लेने की मांग की थीलेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

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भारत का भविष्य बदल देंगे ये 5 युवा राजनेता 

जानिये कौन हैं भारत के सबसे कम उम्र वाले नेता


दुनिया में कई सारे देश हैं और हर देश की पहचान उसके संविधान और नेताओं से होती है।  हर देश के नेता जहाँ देश की जिम्मेदारी लेते हैं वही देश का भविष्य बदलने और देश को आगे बढ़ाने की भी कुव्वत रखते हैं।  यही वजह है की भारत के हर नागरिक की उम्मीदें देश के युवा नेताओं से बंधी हुई हैं।

जानते हैं भारत के 5 सबसे कम उम्र वाले नेताओं को:-

1 प्रियंका गाँधी वाड्रा (INC)

47 वर्ष की प प्रियंका गाँधी वाड्रा भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो नेहरू-गाँधी परिवार से ताल्लुक रखती हैं. प्रियंका गाँधी को इस लोकसभा चुनाव में कई बार प्रचार प्रसार करते देखा गया। प्रियंका कांग्रेस की हैं।  प्रियंका गाँधी ने 1998 में हुए एक इंटरव्यू में कहा की ‘मेरे दिमाग में यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि राजनीति शक्तिशाली नहीं है, बल्कि जनता अधिक महत्वपूर्ण है और मैं उनकी सेवा राजनीति से बाहर रहकर भी कर सकती हूँ। तथापि उनके औपचारिक राजनीति में जाने का प्रश्न परेशानीयुक्त लगता है: “मैं यह बात हजारों बार दोहरा चुकी हूँ, कि मैं राजनीति[3] में जाने की इच्छुक नहीं हूँ…”

2 -सचिन पायलट (INC)

लेफ्टिनेंट सचिन पायलट 41 वर्ष के एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान राजस्थान सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं. वे भारत सरकार की पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रीमंडलमें संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री में मंत्री रहे है। ये चौदहवीं लोकसभा में राजस्थान के दौसा लोकसभा क्षेत्र का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से प्रतिनिधित्व करते हैं। ये 2012 से अब तक भारतीय राजनीति का हिस्सा बने हुए हैं

3-राज्यवर्धन सिंह राठौड़(BJP)

49 साल के राजयवर्धन सिंह ने 2013 में अपने राजनितिक करियर की शुरुवात की थी वो 16 वीं लोकसभा में जयपुर ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद चुने गये। राजयवर्धन 2004 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक, एथेंस में डबल ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक विजेता हैं। वो प्रथम भारतीय हैं जिन्होंने व्यक्तिगत रजत पदक जीता। उनसे पहले ब्रितानी मूल के भारत में जन्मे नॉर्मन प्रिचर्ड ने 1900 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में दो रजत पदक जीते।10 सितंबर 2013 को राठौर बीजेपी में शामिल हुए और इसके पहले वह रेवाड़ी में नरेंद्र मोदी की एक रैली का हिस्‍सा बने थे। राठौर ने राजनीति में आने के लिए सितंबर 2013 में ही सेना से वॉलेंटरी रिटायरमेंट ले लिया और बतौर कर्नल वह अपने पद से रिटायर हुए।

4 -ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया (INC)
ज्योतिरादित्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से सम्बन्ध रखते हैं। 48 वर्षीय ज्योतिरादित्य सिंधिया मनमोहन सिंह के सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे हैं इनके पिता स्व.श्री माधवराव सिन्धिया जी भी गुना से कांग्रेस के विजयी उम्मीदवार रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया 2019 लोकसभा चुनाव में गुना सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।भाजपा उम्मीदवार के.पी.यादव ने 125549 वोटों से हराया। ये 2012 से अब तक राजनीती में बने हुए हैं
5-मिलिंद देवड़ा (INC)
31 अगस्‍त 2009 को उन्‍होंने केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी समिति का सदस्‍य घोषित किया गया। 30 अक्‍टूबर 2012 को वे केंद्रीय नौका-परिवहन के राज्‍यमंत्री बनें। राजनीति के अलावा मिलिंद गिटार बजाना भी जानते हैं और वे खेलों को प्रोत्‍साहन देने वाले युवा राजनीतिज्ञ हैं, वे क्रिकेट क्‍लब ऑफ़ इंडिया, बॉम्‍बे जिमखाना आदि के सदस्‍य हैं। मिलिंद 2004 से अब तक राजनीती में बने हुए हैं
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जेनेवा संधि क्या है और यह किन पर लागू होता है ?

जाने जेनेवा संधि से जुड़ी यह कुछ ख़ास बातें ?


इस बात से सभी वाकिफ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच में कितना तनाव का माहौल बना हुआ. हाल ही में हुए पुलवामा अटैक के बाद भारत ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए कड़ी कूट निति अपनाई है . जिसमे हमारी भारतीय वायुसेना ने पाक के आतंकी कैंपो पर हमला किया और उनके 300 आतंकियों को मार गिराया.उसके बाद से पाकिस्तान में बौखलाहट मच गई है .

वहीं भारत की और से किए गए एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक के जरिए भारत के जवान के कैंपो को अपना निशाना बनाया जिसमे वह नाकाम रहे लेकिन पाक का एक जेट F- 16 क्रैश हो गया जो कि  भारत में गिरा , वही भारत का भी एक जेट MIG – 21 क्रैश हुआ जो कि पाक्सितान में गिरा लेकिन उसमे बैठे पायलट अभिनन्दन पाक की आर्मी के गिरफ्त में आ गये. लेकिन जेनेवा संधि के मुताबिक पाकिस्तान की आर्मी पायलट अभिनन्दन के साथ ही नहीं बल्कि किसी भी युद्धबंदियों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार नहीं कर सकती. तो क्या है जेनेवा संधि एक बार जान ले ?

जाने जेनेवा संधि से जुडी यह कुछ ख़ास बातें ?

जेनेवा संधि जो है वो युद्धबंदियों के अधिकारों की रक्षा करता है. साथ ही इस संधि का उद्देश्य है युद्ध के वक्त मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना. आपको बता दे की जेनेवा कन्वेंशन में मानवता को बरकरार रखने के लिए चार संधिया शामिल की गयी थी. पहली संधि 1864 में हुई थी. इसके बाद दूसरी संधि 1906 और तीसरी संधि 1929 में हुई. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी.

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साथ ही इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास के मुताबिक जेनेवा संधि में युद्ध के दौरान गिरफ्तार सैनिकों और घायल लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना है इसको लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं. इसमें साफ तौर पर ये बताया गया है कि युद्धबंदियों के क्या अधिकार हैं.

यहाँ जाने की जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों के क्या अधिकार है ?

1 . इस संधि के तहत जो युद्धबंदि है उनका अच्छे से ध्यान दिया जाना चाहिए, यानी कि उनको खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाए.

2. साथ ही उनके साथ किसी भी तरह का अमानवीय बर्ताव न किया जाए.

3. चाहे वो सैनिक पुरुष हो या स्त्री दोनों पर ही यह जेनेवा संधि लागू होती है.

4. इसमें आप युद्धबंदियों से उनकी जाति, धर्म या किसी भी बारे में नहीं पूछ सकते.

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आरबीआई के नए गवर्नर शक्तिकांत दास के करियर से जुड़ी यह है कुछ ख़ास बातें:

शक्तिकांत दास बने नए आरबीआई गवर्नर


जहाँ एक तरफ विधान सभा का इलेक्शन रिजल्ट आना बाकी है तो वही दूसरी तरफ आरबीआई के पूर्व गवर्नर रहे उर्जित पटेल के इस्तीफा देने के बाद ही आरबीआई ने शक्तिकांत दास को आरबीआई का नया गवर्नर नियुक्त किया है।शक्तिकांत दास  की नियुक्ति के बाद अब सभी की निगाहें  शक्तिकांत  दास  पर है क्यूंकि अब उनके सामने अर्थव्यवस्था केसुधार को लेकर कई सारी चुनौतियाँ सामने आ खड़ी हुई है.लेकिन उससे पहले हम जानेंगे की आखिर शक्तिकांत दास है कौन?

यहाँ जाने शक्तिकांतदास के करियर से जुड़ी यह कुछ एहम बातें:

1.शक्तिकांत दास 1980 में तमिलनाडू  काडर के आईएएस अधिकारी थे.

2.अपने 37 साल के कार्यकाल में शक्तिदास ने केंद्र और राज्य में आर्थिक और वित्त विभाग में काम  किया है.

3.2008  में उन्हें पहली बार  वित्त मंत्रालय में  संयुक्त सचिव के तौर पर  चुना गया था.

4.2013  में फिर शक्तिकांतदास को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में सचिव बनाया गया

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5.उसके बाद उन्हें 2014 में केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव बनाया गया

6.जब देश में नोटबंदी हुई तब अर्थव्यवस्था में 500 और 2,000 रुपये का नया नोट जारी करने में उन्होंने अपनी भूमिका निभाई

7.साथ ही उन्होंने बीजेपी में कालेधन  को लेकर आवाज़ भी उठाई थी और जीएसटी को लागू  करने में  आपसी सहमति में भी भूमिका निभाई

8. शक्तिकांत दास अब रिजर्व बैंक के 25वें गवर्नर होंगे.

तो यह है आरबीआई के नए गवर्नर शक्तिकांत दास  के  अब तक  करियर से जुड़ी  कुछ  ख़ास बातें।  अब देखना यह है की क्या शक्तिकांत  दास सभी चुनौतियों  को पूरी तरह सम्हाल पाते है या नहीं। क्यूंकि अब उनको आर्थिक फैसलों को लागू करने  के लिए  रिजर्व बैंक की कमान सौंप दी गई  है.

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संगीत सोम के बयान पर औवेसी ने किया पलटवार, उठाया सवाल

लाल किला भी तो गद्दारो ने ही बनाया है


बीजेपी के नेता और यूपी के सरधना के विधायक संगीत सोम ने प्यार का प्रतीक माने जाने ताजमहल को लेकर कल विवादित बयान दिया था।

असउद्दीन औवेसी

लाल किले पर तिरंगा नहीं फहराया जाना चाहिए

इसी सिलसिले में हैदराबाद के सांसद औवैसी ने पलटवार किया है। ट्विटर पर ट्वीट करते हुए असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि अगर ताजमहल ‘गद्दारों’ ने बनाया है तो लाल किला भी तो ‘गद्दारों’ ने ही बनया है। तो क्या पीएम नरेंद्र मोदी को तिरंगे फहराना छोड़ देंगे? क्या मोदी और योगी घरेलू और विदेशी पर्यटकों से कहेंगे कि वे ताजमहल को देखने ना आएं? यहां तक कि दिल्ली में हैदराबाद हाउस को ‘गद्दारों’ ने ही बनाया है। क्या मोदी यहां विदेशी मेहमानों की मेजबानी छोड़ देंगे?

पार्टी के लोगों ने बयान से किया किनारा

वहीं संगीत सोम की पार्टी के लोग ही उनके इस बयान से किनारा करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी की यूपी प्रवक्ता नवीन कोहली ने कहा यह उनकी निजी राय हो सकती है। ताजमहल तो हमारा ऐतिहासिक धरोहर है।

वहीं दूसरी ओर बीजेपी की नेत्री रीता बहुगुणा जोशी ने भी कहा कि वह उनका बयान उनकी निजी राय हो सकती है। ताजमहल एक ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ देश का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। प्रदेश की बीजेपी सरकार आगरा और ताजमहल के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यटक के नजरिए से भी देखें तो हमें ताजमहल पर गर्व है।

आपको बता दें सारा मामला ताजमहल को यूपी के पर्यटन स्थल की सूची में शामिल न करने को लेकर शुरु हुआ था। जिसके बाद यूपी सरकार ने इस पर सफाई दी थी।
गौरतलब है कि कल संगीत सोम ने कहा था कि गद्दारों के बनाए ताजमहल को इतिहास में जगह नहीं मिलनी चाहिए।

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बेटे पर लगे आरोपों को बाद पहली बार अमित शाह मीडिया के सामने आएं

कहा यह करप्शन नहीं है


बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने बड़े जय शाह की कंपनी का टर्नओवर को लेकर पहले बार सफाई दी है।

अमित शाह

प्रमाण भी है

एक टीवी न्यूज के कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने सफाई के तौर पर कहा कि जय शाह की कंपनी में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। जिसका प्रमाण है उनके द्वारा सौ करोड़ का मानहानि का केस क्योंकि कांग्रेस पर आजादी के बाद से इतने आरोप लगने के बाद भी कभी उस पार्टी मे इतना नैतिक साहस नही हुआ कि वो ऐसा कर पाती।

न्यूज चैनल के टॉक शो को दौरान अमित शाह से पूछा गया कि आरोप लग रहा है कि शाह की कंपनी का टर्नओवर 5 हजार से बढ़कर 80.5 करोड़ रुपये हो गया। विपक्ष पूछ रहा है कि ये कैसे हो गया?

करप्शन कांग्रेस को दौरान होते थे

इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से, पहले कुछ सवाल उठाना चाहता हूं फिर जबाव दूंगा। कांग्रेस पर आजादी के बाद से इतने करप्शन के आरोप लेगें। लेकिन कांग्रेस ने एक भी मानहानि का, और सौ करोड़ की मानहानि के केस किया क्या? नहीं किया तो इतनी हिम्मत क्यों नहीं हुई। जय ने आज अपराधिक मानहानि का केस फाइल किया है। विपक्ष जांच की मांग कर रहा है। जय ने तो स्वयं जांच मांगी है। अब आपके पास जो तथ्य लेकर पहुंच जाइए कोर्ट में, कोर्ट फैसला करेगी। हमने स्वयं जांच को आमंत्रित किया है।

विपक्ष पर वार करते हुए अमित ने कहा कि कंपनी ने एक रुपये का व्यापार सरकार के साथ नहीं किया है। एक रुपये की मदद नहीं ली है। सरकारी जमीन नहीं ली है और न ही बोफोर्स की तरह दलाली खाई है तो इसमें करप्शन का सवाल ही पैदा नहीं होता।

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गुरुदासपुर में उपचुनाव, विनोद खन्ना की मृत्यु के बाद खाली हुई थी सीट

15 अक्टूबर को आएंगे नतीजे


आज पंजाब के गुरुदासपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। अभिनेता और बीजेपी की सांसद विवोन खन्ना की मृत्यु के बाद यह सीट खाली हुई थी।

गुरुदासपुर संसदीय सीट के अधीन नौ विधानसभा क्षेत्र है। क्षेत्रों की सुविधानुसार पोलिंग बूथ लगाए गए हैं।

गुरुदासपुर उपचुनाव

11 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं

इस चुनाव में 15 लाख 29 हजार लोग अपनी मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिसके लिए 513 पोलिंग बूथ लगाए गए हैं। जिसमें से 171 संवेदनशील इलाके पाकिस्तान सीमा से सटे हुए हैं।
सीमा से सटे होने के कारण सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चुनाव आयोग द्वारा पूरे राज्य पुलिस के अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों की 27 कंपनियों तैनात की गई है। हालांकि राज्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने केंद्र से 57 कंपनियों की मांग की थी।

गुरुदासपुर लोकसभा सीट के लिए 11 उम्मीद्वार अपनी किस्मत अजामा रहे हैं। लेकिन लड़ाई मोटे तौर पर भाजपा कांग्रेस और आप के बीच हैं। मौजूदा समय में पंजाब में कांग्रेस की सरकार है। वहीं 2019 की लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने भी इस चुनाव में अपनी ताकत लगाई है।

प्रत्यशियों को सूची

  • स्वर्ण सलारिया(भाजपा-अकाली संगठन)
  • सुनील कुमार जाखड़ (कांग्रेस)
  • मेजर जनरल सुरेश कुमार खजूरिया (आप)
  • संतोष कुमारी (मेघ देशम पार्टी)
  • कुलवंत सिंह (शिअद-अमृतसर)
  • रजिंदर सिंह (हिंदुस्तान शक्ति सेना)
  • सतनाम सिंह (निर्दलीय)
  • संदीप कुमार ( निर्दलय)
  • प्रदीप कुमार (निर्दलय)
  • परविंदर सिंह (निर्दलय)
  • पवन सिंह (निर्दलय)

वीवीपैट मशीन का प्रयोग किया गया है

ईवीएम मशीन पर 12वां बटन नोटा है। सभी ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीने भी लगाई जा रही है। जिससे मतदाताओं को यह पता चल सकेगा कि उनके द्वारा ईवीएम पर बटन दबाने के बाद उनके प्रत्याशी को वोट गया है कि नहीं।

इस चुनाव के नतीजे 15 अक्टूबर को आने वाले हैं।

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क्या महागठबंधन का गठबंधन बना रह पाएगा?

कहीं टूट तो नहीं जाएगा महागठबंधन?


बिहार की राजनीति को लगता है किसी की नजर लग गई है। जब भी कोई छोटी से घटना होती है तो यह बिहार की राजनीति के लिए बहुत बड़ा शब्ब बन जाती है। बात छोटी हो या बड़ी मीडिया बहुत जल्द ही यह अनुमान लगने लग जाती है कि कही महागठबंधन टूटने की कगार पर तो नहीं आ गया है?

नीतीश कुमार लालू प्रसाद यादव

महागठबंधन की प्रक्रिया तो साल 2014 के बाद ही शुरु हो गया था

महागठबंधन के बनने की प्रक्रिया तो साल 2014 में देश में सत्ता बदलने के साथ ही शुरु हो गई थी। साल 2015 में बिहार में विधानसभा चुनाव हुए। यह ऐसा दौर था जब बिहार की राजनीति डर के घेरे में घेरी हुई थी, कि कहीं सदियों से बिहार की राजनीति में राज कर रही क्षेत्रिय पार्टियां का अंत न हो जाएं। इसलिए बिहार की दो विपरीत पार्टियों ने भाजपा का सामना करने के लिए हाथ मिला लिया। ताकि भाजपा बिहार में अपने पंख न फैला सकें। हुआ भी कुछ ऐसा ही। इसे ही तो राजनीति में महागठबंधन कहते है जब दो विपरीत पार्टियां तीसरी पार्टी के डर से एक हो जाएं।

साल 2015 में बिहार की क्षेत्रिय पार्टी जनता दल युनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल ने हाथ मिला लिया, और तय हुआ कि अगर महागठबंधन की जीत हुई तो जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनेंगे और राजद को भी अहम पद दिया जाएगा।

बिहार की 243 सीटें के लिए चुनाव कराएं गए। सबसे ज्यादा सीटों के साथ लालू प्रसाद की पार्टी राजद सबसे आगे रही। राजद को 80 सीटें मिले। जदयू के 71 और महागठबंधन की कांग्रेस को 27 सीटें मिली। वहीं दूसरी ओर बीजेपी को 53 सीटें नसीब हुई।

सबसे पहले शराब बंद कराई

सत्ता में आने के बाद जदयू के नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने और लालू के बेटे तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री का ताज मिला।

सत्ता में आने बाद ही नीतीश कुमार ने सबसे पहले बिहार में शराब बंद करवाई। इसके अलावा भी कई अहम फैसले लिए।

लेकिन अब तो लगता है बिहार की राजनीति किसी संकट से गुजर रही है। महागठबंधन की सरकार में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर घोटालों की आंधी से आ गई है। लालू, उनके बेटे और बेटी सबों पर घोटालों का आरोप लग रहा है। क्या इन घोटालों का बिहार की राजनीति पर असर पड़ेगा? क्या बिहार की राजनीति का महागठबंधन टूट जाएगा।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक राग में नहीं महागठबंधन

हाल में ऐसी कई घटनाएं हुई है जिससे यह लगने लगा है। बहुत जल्द ही राष्ट्रपति चुनाव होने वाले है। राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार बिहार से ताल्लुक रखते है। सत्ता पक्ष के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल थे। वहीं दूसरी ओर विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार बिहार की बेटी है। अब राष्ट्रपति चुनाव के लिए महागठबंधन में परेशानी चल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रामनाथ कोविंद के पक्ष में है। वही दूसरी ओर महागठबंधन की दूसरी पार्टियां मीरा कुमार के समर्थन में हैं।

वही दूसरी ओर बिहार में लगातार सीबीआई के छापे मारी से राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के परिवार घिरा हुआ है। इस लिस्ट में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का भी नाम आ रहा है।

तेजस्वी का नाम आने के बाद से ही उनके इस्तीफे के स्वर गूंजने लगने लगे हैं। लेकिन फिलहाल इस बारे में मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा है।

जीरो टॉयलेंरस की नीति अपनाएंगे

लेकिन अगर तेजस्वी और लालू प्रसाद पर लगे आरोप साबित हो जाते है तो क्या होगा? नीतीश कुमार ने पहले ही कहा था कि वह भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉयलेंरस की नीति अपनाएंगे।

अगर तेजस्वी को उनके पद से हटना पड़ता है। तो क्या बिहार का महागठबंधन टूट जाएगा। और अगर टूट जाएगा तो क्या होगा? क्या बिहार में राजनीति संकट पैदा हो जाएगा?

सीटों की गिनती के हिसाब से राजद के पास जदयू से ज्यादा सीटें है। कांग्रेस के विधायकों की संख्या भी अच्छी खासी है। तो क्या नीतीश एक बार फिर बीजेपी का हाथ थाम लेगें। क्योंकि उनके पास और कोई विकल्प बचता ही नहीं है। इससे पहले भी नीतीश कुमार की जदयू पार्टी एनडीए में शामिल थी। लेकिन बाद में वह वहां से अलग हो गई। तो क्या एक बार फिर ऐसा हो सकता है?

अब देखना है कि आगे क्या होता है।

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मिशन 2019- बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने 95 दिनों की देशव्यापी यात्रा के दौरान आज जम्मू रवाना

साल 2014 में लोकसभा चुनाव में बीजेपी की भरी बहुमत की जीत के बाद अब बीजेपी ने 2019 के लिए भी मिशन तैयार करना शुरु कर दिया है।

पिछली बार हारी हुई 120 सीटों पर विशेष ध्यान

पार्टी की स्थिति को और मजबूत करने के लिए शाह 95 दिनों का देशव्यापी दौरे करेंगे। इसी क्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर बीजेपी की कड़ी को मौजूद करेंगे। इन 95 दिनों में शाह लोकसभा चुनाव जीतने की रणनीति को बनाएंगे।

अमित शाह

इसके साथ ही उन 120 सीटें पर ध्यान केंद्रित करेंगे। जिनमें साल 2014 में बीजेपी की हार हुई थी।

जम्मू में दो दिन का दौरा

मिशन 2019 को सफल बनाने के शाह ने लेफ्ट का गढ़ माने जाने बंगाल के नक्सलबाड़ी में दौरा किया। आज से वह जम्मू में दो दिन के दौरे पर जा रहे हैं।

जम्मू दौरे से एक दिन पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वह चुनावी महत्व के हिसाब से एक से तीन दिनों तक राज्यों में समय बिताएंगे। राज्यों को चुनावी महत्व के हिसाब से तीन श्रेणियों में बांटा गया है। उन्होंने कहा साल 2014 में हम जिन स्थानों पर हारे है वही 120 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

साथ ही कहा कि मेरे दौरे में हमारे संगठन की शक्ति का जायजा लेने पर ध्यान केंद्रित होगा और पूरे देश में विचारधारा और चुनावी अपील के विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा।

600 फुसटाइमर्स की टीम तैयार

राज्यों के दौरे के अलावा शाह ने आगामी चुनाव के लिए 600 फुलटाइर्मस की टीम तैयार की है, जो साल 2019 में पार्टी की जीत को सुनिश्चित करने का काम करेगी।

साल 2019 की जीत के लिए शाह ने पांच राज्यों को खासतौर पर चिन्हित किया है। जहां वह बूथ स्तर पर मैनेजमेंट का काम देखेंगे। ये पांच राज्य है गुजरात, ओडिशा, तेलंगाना लक्ष्यद्वीप और पश्चिम बंगाल है। इन पांचों राज्यों में शाह 15 दिन का समय बिताएंगे और बूथ स्तर की तैयारी का जायजा लेगें।

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