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जानें कैसा रहेगा आपका आने वाला सप्ताह-(23 मई से 29 मई)

देखते ही देखते मई का आखिरी सप्ताह आ गया है। क्या खास है इस आखिरी सप्ताह में, किरण पांडेय राय द्वारा तैयार की राशिफल को लेकर हम आएं है। पढ़े और जानें कैसा रहेगा आपका कैसा रहेगा आने वाला सप्ताह।

 मेष: यह अवधि आपको अपने लक्ष्य के लिए प्रयास करने के लिए कारण के साथ-साथ शक्ति भी देगी। आयात-निर्यात व्यवसायियों के लिए लाभ देखा जा सकता है। आपके रास्ते में आने वाली बाधाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन रुकें नहीं। यहां तक कि आपको अपने साथी या जीवनसाथी से भी आर्थिक मदद मिलेगी। सप्ताह की सलाह- आवश्यकता पड़ने पर ही बात करें। पिता के साथ संबंध अच्छे नहीं रहेंगे।

वृष राशि: यह ग्रह संयोजन आपको आंतरिक शक्ति देगा, विपरीत परिस्थिति में भी आप मजबूत होते रहेंगे। आपके सभी निर्णयों के पीछे एक तर्क विचार होगा। लेकिन आपके प्रयासों का परिणाम संतोषजनक नहीं होगा। सारी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेने से आपको एक मूर्खतापूर्ण बात के लिए भी चिढ़ने का कारण मिल सकता है। उतना ही काम करो, जितना तुम्हारी शांति भंग न हो।

मिथुन: इस सप्ताह की शुरुआत उसी गति और धुन के साथ होगी लेकिन सप्ताह के मध्य के बाद आप बदलाव महसूस करेंगे। पिछले कुछ हफ्तों से आप किसी कारण से निराश महसूस कर रहे थे, अब समय आ गया है। आपके निर्णयों की वास्तव में सराहना की जाएगी। आपका कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ेगा। वित्तीय पहलू इस अवधि में अच्छा लग रहा है। सेहत में भी सुधार होगा।

कर्क: सभी निराशावाद के बीच, आपके शब्दों को अपने आसपास के लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए विचारशील होना चाहिए। आपके निर्णयों के बारे में आपके दृढ़ विश्वास को पहचाना जाएगा और इसका समर्थन किया जाएगा। अलग-अलग जगहों के दोस्तों से मिलने का मौका मिलेगा। इस अवधि में बिजनेस पार्टनर या जीवनसाथी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। निर्णय लेने में पीछे की सीट लेने की कोशिश करें।

सिंह: आपके बॉस द्वारा आपके सहकर्मियों के बीच एक कार्यशील और योग्य उम्मीदवार के रूप में आपकी छवि को चित्रित किया जाएगा। आपको किसी सहकर्मी से विरोध का सामना करना पड़ सकता है लेकिन आपके बॉस का समर्थन आपको सुचारू रूप से चलता रहेगा। दूसरों की किसी भी कार्रवाई का जवाब देने से पहले सांस लेना किसी भी कार्रवाई की तत्काल प्रतिक्रिया के रूप में आपकी योजना को बर्बाद कर सकता है। जीवन का आर्थिक क्षेत्र अच्छा रहेगा।

कन्या: इस सप्ताह के मध्य तक आपका स्वामी अपनी उच्च राशि में गोचर करेगा। आप अपने काम से जुड़ी अच्छी खबर की उम्मीद कर सकते हैं। आप किसी विदेशी भूमि से एहसान की उम्मीद कर सकते हैं। इस अवधि का उपयोग कार्यस्थल में सबसे अधिक उत्पादक अवधियों में से एक में किया जा सकता है। इस अवधि को और अधिक सुखद बनाने के लिए अपनी भावनाओं या भावनात्मक विस्फोट में प्रयुक्त शब्दों को निगलने का प्रयास करें।

तुला: ग्रह आपको सही मार्ग दिखाएंगे, यह आपकी व्यक्तिगत चलने की अवधि है जो आपको संतुष्टि या चिंता दे सकती है। आपके सामने ऐसी स्थिति आएगी जो आपको गुमराह करने की कोशिश करेगी, इसके विपरीत आपका विवेक आपको इस भ्रम से बाहर निकलने में मदद करता है। विचारों में मतभेद या कार्य प्रारूप के कारण पिता से दूर रहने के योग हैं।

वृश्चिक: यह सप्ताह आपको अपने दृढ़ संकल्प के साथ-साथ आपके कार्यों की सराहना करने का कारण देगा। अध्यात्म या गूढ़ विज्ञान के प्रति आपका झुकाव अचानक से अधिक हो जाएगा। इस सप्ताह यात्रा करने से बचें। प्रिंट मीडिया वालों को कोई भी लेख लिखने में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। पार्टनर से खुशी की उम्मीद की जा सकती है।

धनु: यह सप्ताह पार्टनर के साथ मधुर संबंध लेकर आया है। आपके जीवन में अशांति की महत्वपूर्ण भूमिका आपके कठोर या घमंडी शब्दों के कारण होगी। किसी विरोधी को हल्के में न लें। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या से बचने के लिए अपने खान-पान पर नियंत्रण रखें। परिस्थिति कुछ भी हो, आपकी मानसिक स्थिति उदास रहेगी।

मकर: ग्रह आपको न केवल आत्मविश्वास देंगे, बल्कि यह आपको अति आत्मविश्वास भी दे सकते हैं। इस अवधि में पढ़ाई में एकाग्रता की कमी महसूस की जा सकती है। व्यावसायिक भय अकारण प्रबल रहेगा। रोमांस और रिश्ते को लेकर आपके मन में कई तरह के विचार कौंधेंगे। वर्तमान परिस्थितियों में मानसिक रूप से सुलझने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं।

कुंभ : कार्यक्षेत्र में अवसर मिलेगा। इस महीने की 27 तारीख के बाद ही कोई फैसला लें। किसी भी कार्रवाई के प्रति उतावला व्यवहार या दृष्टिकोण आपको गलत जगह पर ले जाएगा। पार्टनर का सहयोग आपको राहत देगा। यदि आपको हृदय या छाती से संबंधित कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो आपको अपने नियमित जांच के लिए अपने पारिवारिक चिकित्सक के पास अवश्य जाना चाहिए।

मीन  : इस सप्ताह की शुरुआत कुछ हद तक पिछले सप्ताह की तरह ही नोट के साथ होगी। लेकिन सप्ताह के मध्य के बाद, आपको आंतरिक शांति या अपने लक्ष्य तक पहुंचने का आसान तरीका मिलना शुरू हो जाएगा। आपका साहस और इच्छाशक्ति ही इस अवधि की आपकी असली ताकत होगी। छोटे भाई-बहन आपकी चिंता के कारण हो सकते हैं। कुल मिलाकर, एक उदासीन सप्ताह आपके रास्ते में आ रहा है।

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जाने उन भारतीय क्रिकेटर्स के बारे में जिनके पास है बेशुमार दौलत, उसके बाद भी करते है सरकारी नौकरी

इन भारतीय क्रिकेटर्स को सरकार की तरफ से दी गई है सरकारी नौकरी


क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसे हमारे देश में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। ये सिर्फ एक खेल नहीं है बल्कि इस खेल के वजह से कई बार हमारे देश का गौरव बढ़ा  है। क्रिकेट ने हमारे देश को कई बड़े खिलाड़ी दिए हैं जिनकी वजह से हमारे देश का गौरव बढ़ा है। आपको बता दे कि हमारे देश के कई खिलाड़ी तो ऐसे भी है जिनको क्रिकेट में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें सरकार की तरफ से सरकारी नौकरी भी दी गई है। क्या आपको पता है ये क्रिकेटर क्रिकेट से तो लाखों रुपये कमाते ही है साथ ही साथ सरकारी नौकरी से भी कमाते हैं। तो चलिए आज हम आपको उन क्रिकेटर्स के बारे में बतायेगे जिनके पास बेशुमार दौलत है उनके बाद भी वो सरकारी नौकरी करते है।

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धोनी: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी को तो सभी लोग जानते है उन्हें आज के समय पर किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि धोनी ने भारतीय क्रिकेट को कई सफलताएं दिलाई हैं। आपको बता दे कि धोनी के कप्तान रहते हुए हमारे देश ने दो विश्व कप जीते  और साथ ही साथ टेस्ट की नंबर एक टीम बनी। क्या आपको पता है भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल का पद धोनी के पास है। धोनी अक्सर खाली समय में भारतीय सेना के साथ समय बिताते हैं।

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सचिन तेंदुलकर: सचिन तेंदुलकर को  भला आज के समय पर कौन नहीं जानता। सचिन तेंदुलकर ने न केवल भारतीय क्रिकेट में बल्कि विश्व क्रिकेट में भी अपनी एक खास जगह बनाई है। सचिन तेंदुलकर को उनकी सफलता के लिए भारतीय वायु सेना की तरफ से सम्मानित किया गया है इसके लिए सचिन को भारतीय वायु सेना का ग्रुप कैप्टन बनाया गया है।

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कपिल देव: भारत को पहला विश्व कप दिलाने वाले कपिल देव को भला कौन नहीं जानता। आज भी लोगों को कपिल देव का 1983 का चौतरफा प्रदर्शन याद है। ये बात तो सभी लोग जानते है कि कपिल ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया है और अब वो लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में भारतीय सेना में है।

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हरभजन सिंह: भारत के बेहतरीन गेंदबाज हरभजन सिंह को भला कौन नहीं जानता। उन्हें आज के समय पर किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। हर कोई हरभजन की फिरकी में फंस गया है। क्या आपको पता है पंजाब पुलिस ने हरभजन सिंह को एक और सितारा जोड़ते हुए उन्होंने हरभजन को पंजाब पुलिस का डीएसपी बना दिया है।

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हिंदी कैलेंडर के हिसाब से आज से शुरू होगा नया साल, जाने इसका महत्व

Importance of Baisakhi: जाने क्यों मनाई जाती है बैसाखी


Importance of Baisakhi: पूरे देश में आज यानि की 13 अप्रैल को बैसाखी का पर्व मनाया जा रहा है बैसाखी को हिंदी कैलेंडर के हिसाब से नव वर्ष की शुरुआत के रूप में भी जाना जाता  है। इस दिन सभी लोग अनाज की पूजा करते है। इस दिन वो सभी लोग जो खेती करते है वो फसल के काटकर घर आने की खुशी में भगवान और प्रकृति का धन्यवाद करते हैं। हमारे देश के अलग-अलग शहरों में इसे अलग अलग नामों से जाना जाता है। जैसे असम में बिहू, बंगाल में पहला बैशाख, केरल में पूरम विशु के नाम से जाना जाता है। इस बार बैसाखी का पर्व सभी लोग अपने अपने घर पर रह कर मनाएंगे। कोरोना लॉकडाउन की वजह से लोग साथ मिल कर बैसाखी का पर्व मनाने से डर रहे है। तो चलिए विस्तार से  जानते है बैसाखी के बारे में।

जाने क्यों मनाई जाती है बैसाखी

अगर हम बैसाखी की बात करें तो हमारे देश में मुख्य रूप से बैसाखी सिख धर्म की स्थापना और फसल पकने के प्र‍तीक के रूप में मनाई जाती है। इस महीने रबी फसल पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाती है। और इसी दिन से पकी हुई फसल को काटने की शुरुआत भी हो जाती है। ऐसे में सभी किसान खरीफ की फसल पकने की खुशी में बैसाखी का त्योहार मनाते है। 13 अप्रैल को 1699 के दिन सिख पंथ के 10वें गुरू ‘गुरु गोबिंद सिंह जी’ ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस दिन से ही इससे मानाने की शुरूआत हो गयी थी। आज के दिन ही यानि की बैसाखी के दिन ही पंजाबीयों के नए साल की शुरुआत भी होती है।

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Image source – astrosolv.com

जाने कैसे पड़ा इसका नाम बैसाखी

क्या आपको पता है इसका नाम बैसाखी क्यों पड़ा, अगर नहीं तो कोई नहीं आज हम आपको बतायेगे। बैसाखी के समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। विशाखा नक्षत्र पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को बैसाखी कहते हैं। अगर हम सरल शब्दों में कहे तो वैशाख माह के पहले दिन को बैसाखी कहा गया है। इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। इस लिए बैसाखी को मेष संक्रांति भी कहा जाता है।

कृषि का उत्सव है बैसाखी

बैसाखी के दिन से सूर्य की स्थिति परिवर्तन के कारण इस दिन से धूप तेज होने लगती है। इस दिन के बाद से गर्मी शुरू हो जाती है। इस दिन के बाद से गर्म किरणों से रबी की फसल पक जाती है। इसलिए किसान इससे एक उत्सव की तरह मनाते है। बैसाखी का दिन मौसम में बदलाव का प्रतीक भी माना जाता है। अप्रैल के महीने में सर्दी पूरी तरह से खत्म हो जाती है और गर्मी का मौसम पूरी तरह शुरू हो जाता है। मौसम में आने वाले इस कुदरती बदलाव के कारण ही यह त्योहार को मनाया जाता है।

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Krystle D’Souza: क्रिस्टल डिसूजा का इंस्टाग्राम अकाउंट, जो आपको दे सकता है बेहतरीन ब्यूटी टिप्स

Krystle D’Souza: क्रिस्टल डिसूजा के इंस्टाग्राम अकाउंट से सीखें ब्यूटी टिप्स


Krystle D’Souza: टीवी जगत की एक गॉर्जियस बहु है क्रिस्टल डिसूजा। अगर आप उन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो करते है तो आप उनके इंस्टाग्राम फीड पर स्क्रॉल कर देख सकते हैं कि  उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी बहुत से खूबसूरत ब्यूटी लुक्स वाली तस्वीरें शेयर की है। फिर चाहे वो अमेजिंग आईब्रो हों, फ्लॉलेस स्किन या बेहतरीन हेयरडू। आप चाहे तो उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से काफी कुछ सीख सकती है। अगर आप ब्यूटी और मेकअप लवर है तो आप क्रिस्टल डिसूजा  के इंस्टाग्राम पेज को देख कर काफी ज्यादा खुश होंगी, साथ ही साथ इस पेज से आपको काफी कुछ सीखने को भी मिलेगा। तो चलिए आज हम भी आपको क्रिस्टल डिसूजा के इंस्टाग्राम अकाउंट पर डाली बेहद खूबसूरत तस्वीरों के बारे में बताएंगे।

बोल्ड आईज़: अगर आप किसी ब्यूटी इंफ्लुएंसर को देखेंगे तो आपके लिए उनका मेकअप लुक को रिक्रिएट करना बहुत ज्यादा मुश्किल होता होगा लेकिन अगर आप क्रिस्टल डिसूजा के इस लुक को देखेंगे जिसमें उन्होंने सिर्फ आंखों पर काजल लगाकर इन्हें हाइलाइट किया है अगर आप क्रिस्टल डिसूजा के इस लुक को रिक्रिएट करेंगे तो आपको इंपैक्टफुल लुक मिलेगा।

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हेल्दी स्किन: अगर आप अपनी स्किन की देखभाल नहीं करते तो आपके फेस पर ग्लो नहीं आएगा फिर चाहे आप दुनिया का सबसे अच्छा और सबसे महंगा मेकअप ही यूज़ क्यों न कर लें। इसलिए आपके लिए जरूरी है कि आप लगातार अपनी स्किन को हाइड्रेटेड रखें, रोज सोने से पहले अपना मेकअप हटाए और एक अच्छी डाइट ले

हेयर पार्टिंग: अगर आप रोज एक तरह से बाल बनायेगे जैसे रोज जूड़ा बनाना या फिर पोनीटेल बनाएं रखना, तो इससे आपकी हेयरलाइन कम हो सकती है। इसलिए अगर आप हेयरस्टाइल स्विच करना चाहते हैं, तो हर दूसरे हफ्ते अपनी पार्टिंग बदलें।

लिप्स को डिफाइन करें: अगर आपको बहुत ज्यादा मेकअप करना पसंद नहीं है और आप बिना मेकअप के ग्लैम दिखना चाहते है तो इसका सबसे बेस्ट तरीका है। अपने होठों को एक लिप लाइनर से डिफाइन करें।

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जाने कौन है यास्मीन (Yasmin) जिसने सिलाई के दमपर कई महिला को बनाया सशक्त

जाने सशक्तिकरण का साक्षात हस्ताक्षर बनी यास्मीन के बारे में, जिन्हे एक समय में उनके पति ने चार लड़कियों को जन्म देने की वजह से दिया था तलाक


आज भले ही हमारा देश तकनीक के मामले में बहुत आगे बढ़ गया हो,  लेकिन एक समय ऐसा जब देश में महिलाओं को कुछ भी करने या अपने पैरों पर खड़े होने का अधिकार नहीं था। उस समय  पुरुष महिलाओं को सिर्फ घर की चार दीवारी के अंदर तक ही सीमित रखते थे और उस समय पर महिलाएं भी अपने अधिकार के लिए आवाज नहीं उठाया करती थी। लेकिन आज समय बदल चुका है आज के समय पर महिलाओं को अपना अच्छा बुरा सब पता है। इसी की तर्ज पर  आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे है जिन्हें उनके पति ने सिर्फ इस बात के लिए तलाक दे दिया था क्योंकि उन्होंने चार लड़कियों को जन्म दिया है।

जानें कौन है यास्मीन (Yasmin)

आपको बता दें कि यास्मीन (Yasmin) के पति ने उन्होंने सिर्फ इसलिए तलाक दे दिया था क्योंकि यास्मीन ने चार लड़कियों को जन्म दिया था। यास्मीन की शादी 16 साल पहले हुई थी उस समय वह अपने पति के साथ महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रहती थीं। इस दौरान उन्होंने लगातार चार बेटियों को जन्म दिया। जिसके कारण उनके पति ने उन्हें तलाक दे दिया।  इतना ही नहीं उसके परिवार ने भी उनको छोड़ दिया। इस बुरे वक्त मव यास्मीन अपनी चार बेटियों को लेकर गोंडा में चली गई। पेट पालने के लिए यास्मीन ने वहां कुछ समय के लिए खेतों में मजदूरी की।  लेकिन उसके बाद यास्मीन ने सरकारी मदद से स्वयं सहायता समूह बनाकर अपने गांव की और 10 महिलाओं को जोड़ा और सिलाई की शुरुआत की।

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जाने कैसे बनी यास्मीन दूसरी महिलाओं के लिए आदर्श

पहले तो यास्मीन अपना और अपनी बेटियों का पेट पालने के लिए खेतों में मजदूरी करती थी लेकिन बाद में उन्होंने सरकारी मदद से स्वयं सहायता समूह बनाकर अपना खुद काम शुरू किया। जिसके बाद यास्मीन और उसके महिला समूह को प्रशासन ने विद्यालयों के लिए  3 हजार ड्रेस सिलने का काम दिया। जिसके लिए प्रशासन की तरफ से यास्मीन के इस समूह को 3 लाख रुपए का पेमेंट मिली। धीरे धीरे यास्मीन के प्रयास इस तरह सार्थक होने लगे। कि वो बाकी महिलाओं और बच्चियों के लिए आदर्श बन गई हैं। लेकिन यह सभी संभव हुआ जब समूह की महिलाओं ने उन पर विश्वास दिखाया। और यास्मीन उस विश्वास पर खरी उतरी। लेकिन यास्मीन ने एक बार आगे बढ़ने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब यास्मीन अपनी बेटियों को भी अच्छा जीवन दे पा रही हैं।

यास्मीन ने अपनी पहली पेमेंट से चुका दिया लोन

यास्मीन ने जब अपना स्वयं सहायता समूह खोला तो उस समय पर उन्होंने बैंक से लोन लिया था। जिसका कहीं न कहीं उन पर दबाव था लेकिन जब यास्मीन ने और उनके समूह की महिलाओं ने 3 हजार स्कूली ड्रेस सिलकर विभाग को सौंपा तो विभाग ने समूह को 3 लाख सिलाई के रूप में दिए। इससे यास्मीन के साथ-साथ कई सारी महिलाओं की समस्याएं भी हल हो गई और यास्मीन का बैंक से लिया हुआ लोन भी चुक गया।

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ममता बनर्जी को चुनाव लड़ाने के लिए सीट नहीं मिलेगी- अमित शाह

कूचबिहार में हुई परिवर्तन यात्रा की रैली


आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी द्वारा चुनावी बिगुल फूंक दिया गया है. परिवर्तन रैली के चौथे दौर में आज गृहमंत्री अमित शाह कूचबिहार गए हैं. जहां उन्होंने ममता दीदी और उनकी पार्टी को ललकारते हुए कहा है कि तृणमूल के विधायकों को बीजेपी के ब्लॉक लेबल के लोग चुनाव में मात देंगे.

बंगाल में गुंडे जीताते है

आज कूचबिहार में हुई रैली के दौरान अमित शाह ने कहा इस बार का बंगाल चुनाव ऐतिहासिक है. दीदी को चुनाव लड़ने के लिए सीट नहीं मिलेगी. ममता बनर्जी के गुंडे चुनाव जीताते हैं. गुंडागर्दी के दम पर ही दीदी चुनाव जीतती आई है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. अगर हमारी सरकार बंगाल में चुनाव जीतती है तो इन गुंडों पर करवाई की जाएगी. रैली में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गृहमंत्री ने कहा कि बंगाल में जय श्री राम बोलने पर आपत्ति होती है. अगर हम जय श्री राम बंगाल में नहीं बोलेगे तो पाकिस्तान में बोलेंगे?, चुनाव खत्म होते ही ममता बनर्जी जय श्री राम बोलेंगी. सिर्फ वोट लेने के लिए ही ममता बनर्जी ये सब करती है. ताकि एक समुदाय का वोट ले सके.

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केंद्र सरकार की योजनाएं लागू होगी

हाल ही बंगाल में आयुष्मान भारत की तर्ज पर स्वास्थ्य कार्ड दिया जा रहा है. इसी दौरान रैली में अमित शाह ने कहा कि अगर बंगाल में बीजेपी सरकार बनाती है तो आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी. प्रदेश में दीदी और उनका भतीजा केंद्र की योजना को लागू नहीं करने देते हैं. लेकिन अगर हमारी सरकार आती है तो हम सभी केंद्र की योजनाओं लागू करेंगे. गृहमंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने यहां विकास के लिए कुछ नहीं किया है. मोदी सरकार हमेशा सबका साथ, सबका विकास मानकर काम करती है, हम सभी समाजों को, समाज की संस्कृति, भाषा, संगीत, सहित्य को आगे लेकर जाने वाले लोग हैं. यही वजह है कि धीरे-धीरे मोदी जी नेतृत्तव में भाजपा से जुड़ा हुआ है.

बीजेपी को एक मौका दिया जाए

आज रैली से पहले गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल पहुंचकर ममता दीदी पर जमकर हमला किया. उन्होंने कहा दीदी को जय श्रीराम का नारे को अपमान समझती है. मैं आपसे वादा करता हूं, चुनाव खत्म होते-होते ममता दीदी भी जय श्रीराम बोलने लगेगी. इसके साथ ही कहा कि आप लोगों ने दस साल तक ममता दीदी को मौका दिया है. एक बार हमें भी मौका  दीजिए.

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क्या कोरोना वैक्सीन लगाने के बाद भी बरतनी होंगी ये सावधानियां, जाने वैक्सीन से जुडी जरूरी बातें

जाने वैक्सीन लगने के बाद कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी होंगी


 

आज यानि की 16 जनवरी शनिवार से हमारे देश में भी ब्रिटेन और अमेरिका की तरह कोरोना वैक्सीन का टीकाकरण शुरू हो गया है आज से हमारा देश भी ब्रिटेन और अमेरिका समेत उन देशों की लिस्ट में आएगा जहां कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे जा रहे है. इस कोरोना वैक्सीन की शुरुआत हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की जाएगी. कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण को दुनिया का सबसे बाद टीकाकरण कार्यक्रम माना जा रहा है. अभी हमारे देश में केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में टीकाकरण केंद्र बनाए जायेंगे. जहां सभी लोगों को कोरोना वायरस के टीके लगाए जाएंगे. अभी हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार शुरुआत में सभी टीकाकरण केंद्रों पर रोजाना करीब 100 लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी. तो चलिए आज हम आपको बतायेंगे कि वैक्सीन लगने के बाद आखिर आपको कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी होंगी. जिसे आप कोरोना वायरस से बचे रहें.

 

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कोरोना वैक्सीन की दो खुराक हैं जरूरी

कोरोना वैक्सीन को लेकर विशेषज्ञ का कहना है कि हर व्यक्ति को कोरोना वैक्सीन की दो खुराक लेनी होगी. जो 28 दिन के अंतराल पर दी जाएगी. विशेषज्ञ के अनुसार कोरोना की वैक्सीन लेने के बाद दो हफ्ते बाद आपके शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित होने लगेगा. लेकिन कोरोना  वैक्सीन लगने के बाद भी सभी लोगों को कोरोना वायरस के नियमों का पालन करते रहना जरूरी है.

 

जाने कोरोना वैक्सीन लेने के बाद किस तरह की सावधानी बरतनी जरूरी है.

अभी तक कोरोना वायरस से बचने के लिए जिन भी नियमों का पालन हम सभी लोग कर रहे थे जैसे मास्क पहनना, छह फीट की सुरक्षित शारीरिक दूरी रखना और बार बार हाथ धोना आदि हमें वैक्सीन लगने के बाद भी उन नियमों का पालन करते रहना पड़ेगा. तभी आप इस खतरनाक कोरोना वायरस से बचे रह सकते हैं.

 

जाने कोरोना वैक्सीन लेने के कितने समय बाद तक एहतियात बरतने जरूरी

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार साओ पाउलो यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ.  जॉर्ज कलील कहते हैं कि कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक लेने के बाद एक महीने तक इंतजार करें.उसके बाद दूसरी खुराक लें और फिर कम से कम 15 दिनों तक कोरोना वायरस से बचाव के लिए जरूरी नियमों का पालन करते रहें.

 

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कॉमेडिन जिनको हंसी की जगह मिली जेल की हवा और सोशल मीडिया पर लोगों की नफरत

साल की शुरुआत में ही मुनव्वर फारुकी को बिना सबूत के मिली जेल की हवा


कॉमेडियन एक ऐसा शख्स जो अपनी बातों से उदास चेहरों पर हंसी की एक मुस्कुराहट ले आते हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि कॉमेडियन पर अपने ही द्वारा की गई कॉमेडी के कारण सुर्खियों में बने रहते हैं. आज ‘काम की बात’ में हम ऐसे ही कॉमेडियन की हिस्ट्री बताएंगे जो कॉन्ट्रोवर्सी में बने रहते हैं.

 

मुनव्वर फारुकी

 

साल  की शुरुआत ही कॉमेडियन की गिरफ्तारी से हुई है. मुनव्वर फारुकी पहले भी अपनी कॉमेडी के कारण खबरों में बने रहते हैं. अक्सर पॉलिटिक्ल कॉमेडियन के कारण वह सुर्खियों में बना रहता है. इस साल की शुरुआत में ही कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी को इंदौर में विरोध का सामना करना पड़ा है. इंदौर में मुनव्वर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. उस पर आरोप है कि इंदौर के एक कैफे में कॉमेडी के दौरान  हिंदू देवी देवताओं का मजाक उड़ाया और गृहमंत्री अमित शाह पर गोधरा कांड के लिए आपत्तिजनक मजाक किया था. इस बात का दावा बीजेपी की विधायक मालिनी गौर के बेटे एकलव्य गौर ने किया. जिसके बाद मुनव्वर समेत उसके चार साथियों एडविन एंटनी प्रकाश व्यास, प्रतीम व्यास और निलिन यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 295-A, 298, 269,288 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है. वहीं इस बारे में एकलव्य गौर ने मीडिया को बताया कि वह और उसके साथी बकायदा टिकट खरीदकर कॉमेडी शो में पहुंच थे. जहां फारुकी को कॉमेडियन के तौर बुलाया गया था. एकलव्य का कहना है कि वहां हिंदु देवी देवताओं का मजाक बनाया गया. इतना ही नहीं गृहमंत्री अमितशाह पर अनुचित जिक्र भी किया गया था. वह हमेशा ही अपने शो में इस तरह की टिप्पणियां करता है. आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद हमने पहले शो के रुकवाया और बाद में इन्हें तुकोगंज पुलिस थाने ले गए.  इन सबके बीच जिस वीडियो का जिक्र लगातार किया जा रहा है पुलिस पड़ताल  में वह वीडियो में नहीं मिली. तुकोगंज को पुलिस का कहना है कि उन्हें मुनव्वर के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिल पाया है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि अभी तक इस मामले में मुनव्वर और सदाकत खान को जमानत नहीं मिल पाई है.

 

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कुणाल कामरा

 

लंबे समय से यह देखा जा रह है कि कॉमेडियन को भी टारगेट किया जा रहा है. कभी सवाल पूछने पर तो कभी लोगों को हंसाने को लेकर. कुणाल कामरा दूसरा नाम है जो हमेशा अपने बयानों के कारण खबरों में बने रहते हैं. कुणाल साल 2019  के लोकसभा चुनाव से पहले अंबानी के घर के बाहर क्लिपबोर्ड लेकर बैठ गए थे. हाल ही में एक्टर सुशांत सिंह की मौत के बाद आर भारत न्यूज चैनल द्वारा लगातार लोगों को टारगेट बनाए जाने बाद कुणाल और अनुराग कश्यप आर भारत के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के लिए  के चप्पल तोहफे के तौर पर ले गए थे. कुणाल हमेशा ही अपनी कॉमेडी में राजनीति को रखते है.  वह हर एक राजनीति घटना पर तेज नजर रखते हैं. पिछले साल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चलती बहस के बीच कुणाल ने एक ट्वीट कर अदालत की अवमानना के दायरे में आ गया था. दरअसल कुणाल ने एक ट्वीट करते हुए सुप्रीम कोर्ट की फोटो पर तिरंगा की जगह भगवा झंड़ा लगा दिया था. इसके बाद तो कुणाल पर अवमानना का केस बनना तय था और हुआ भी कुछ ऐसा ही न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम. आर.शाह की पीठ ने नोटिस जारी कर  कुणाल को जवाब देने का निर्देश दिया था.  इस बारे में अटॉर्नी जनरल के.वेणुगोपाल ने कुणाल  के खिलाफ आप राधिक अवमानना की कार्यवाही शुरु करने पर सहमति देते हुए कहा था कि ट्वीट खराब भावना के तहत किए गए थे और यह समय है जब लोग समझें कि शीर्ष अदालत पर ढिठाई से हमला करने पर अदालत अवमानना अधिनियम 1971 के तहत सजा हो सकती है. आपको बता दें अदालत के कारण बताओ के बाद भी कुणाल ने माफी मांगने से इंकार कर दिया था.

अग्रिमा जोशुआ

 

मुंबई से  ताल्लुक रखने वाली कॉमेडियन अग्रिम जोशुआ का नाम पिछले साल जुलाई के महीने में लॉकडाउन के दौरान सुर्खियों में आया. इससे पहले तक बहुत कम ही लोग इसे जानते थे. अग्रिमा का एक वीडियो क्लिप खूब वायरल हुआ जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई  कि वह मराठा गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज का मजाक उड़ रही है. कुछ सेकेंड की इस वीडियो ने अग्रिमा के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज करवा दी. लोगों द्वारा तरह-तरह की धमकियां दी जानी लगी. यहां तक की उसे रेप की धमकियां दी जाने लगी. शुभम मिश्रा ने तो उसे दम भर गालियां दी और रेप की धमकी दी थी. जबकि वीडियो के पूरे हिस्से में अपमान जैसा कुछ दिखा नहीं था. दरअसल अग्रिमा जोशुआ ने अपने कॉमेडी शो में समुद्र में बन रही छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति का  जिक्र करते हुए क्वेरा के जवाब का जिक्र किया था. जिसकी वीडियो को एडिट करके लोगों को सामने प्रस्तुत किया. इस सारी घटना के बाद अग्रिमा ने सोशल मीडिया पर माफी भी मांगी थी.

 

कीकू शारदा

 

कॉमेडी नाइटस विथ कपिल में हम सभी कीकू शारदा की कॉमेडी से लोटपोट हो जाते हैं. लेकिन आपको पता है इनकी यही कॉमेडी इनको जेल की हवा तक खिला चुकी है. साल 2016 में बाबा राम रहीम की जीवनी पर बनी फिल्म एमएसजी2 की रिलीज से पहले ही कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में इस फिल्म  के सीन एक कॉमेडी एक्ट पेश किया था. जिसके बाद यह कहते हुए कीकू पर एफआईआर दर्ज की गई थी उससे भक्तों की आस्था पर ठेस पहुंच सकती है.

सुरलीन कौर

 

 

सुरलीन कौर भी लॉकडाउन के दौरान अपने कॉमेडी वीडियो के कारण सुर्खियों में आ गई थी. सुरलीन हमेशा ही अपनी कॉमेडी में वेद, संस्कृत, कामसूत्र का जिक्र करती थी. लेकिन स्कॉन पर कॉमेडी करना उसे महंगा पड़ गया. अपनी कॉमेडी में सुरलीन ने स्कॉन के ऋषि मुनियों और हिंदू धर्म पर टिप्पणी की थी. जिसके पर स्कॉन ने आपत्ति जताते हुए एफआईआर दर्ज करवाई थी. जिसके बाद सुरलीन कौर को माफी मांगनी पड़ी थी.

 

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साल 2020 की महत्वपूर्ण घटनाएं जो आने वाले कल का इतिहास है

राम मंदिर से लेकर नई शिक्षा नीति तक कई अहम फैसले लिए गए हैं


साल 2020 खत्म होने के कगार पर है. यह साल कई मायनो में बहुत ही महत्वपूर्ण है. ऐसा नहीं है सिर्फ कोरोना और लॉकडाउन ने ही इसे यादगार बनाया है. बल्कि कई ऐसी घटनाएं हैं जो इस साल का इतिहास लिखेगी. इस साल की शुरुआत नागरिकता कानून के विरोध से शुरु होकर किसान आंदोलन पर आकर खत्म हो रहा है. पूरे साल लॉकडाउन हो या जीडीपी का माइन्स में चला जाना हो, ऐसी घटनाएं है जो हर शख्स के जहन में अगले कई सालों तक याद रहने वाली है. तो चलिए ‘काम की बात’ में हम 2020 में राजनीति की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं को बारे में बताएंगे.

 

 

दिल्ली चुनाव और दंगा

साल की शुरुआत में ही नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध चल रहा था. इस बीच फरवरी के महीने में देश की राजधानी में साल का पहला विधानसभा चुनाव हुआ. आम आदमी पार्टी ने हैट्रिक लगाते हुए दिल्ली पर अपना कब्जा कर लिया. आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटों पर विजय प्राप्त की बीजेपी की झोली में 8 सीटें आई और कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई. चुनाव प्रचार के दौरान आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी बड़ा मजेदार था. बात यहां तक आ गई है कि एक चुनावी रैली के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा दिया कि 7 फरवरी को बटन इतना जोर से दबाएं कि करंट शाहीन बाग में लगे. इस बयान के बाद लोगों का गुस्सा भड़कना लाजमी था. प्रत्येक मीडिया में यह बात हेडलाइन के तौर पर चलाई गई. चुनाव जीतने के कुछ दिन बात ही दिल्ली के उत्तरी पश्चिमी इलाके में दंगे हो गए. नागरिकता संशोधन कानून को  लेकर लोग विरोध कर रहे थे. इसी बीच जाफराबाद में कानून के इसके समर्थन में भी कुछ लोग आगे आएं. जिसमें बीजेपी ने नेता कपिल मिश्रा भी शामिल थे. 22 फरवरी को शुरु हुए दंगे में  बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 40 लोगों की मौत हो गई और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे.

 

मध्यप्रदेश में दोबारा बीजेपी की बारी

मध्यप्रदेश में साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में करारी हार क बाद बीजेपी सत्ता में दोबारा आना चाहती थी. वहीं दूसरी ओर सत्ता में काबिज कांग्रेस के बीच खटास का सिलसिला भी शुरु हो गया था. ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी से नाराज चल रहे थे इसी का फायदा बीजेपी को मिला. मार्च के महीने में जब लोगों को कोरोना से बचने की हिदायतें दी जा रही थी. उस वक्त सियासी उठापटक बड़ी तेजी से जारी थी. पार्टी से नाराज चल रहे ज्योतिरादित्या सिंधिया ने अपने 22 विधायकों के साथ कांग्रेस को अलविदा कह दिया और बीजेपी में शामिल हो गए . होली वाले दिन सिधिंया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था और कुछ दिन बाद बीजेपी के मुख्यालय में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्या ली. वहीं दूसरी ओर बहुमत के अभाव में कांग्रेस की सरकार गिर गई. इसी साल नवंबर में हुए उपचुनाव में बीजेपी की जीत हुई और एक बार फिर शिवराज चौहान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनें.

 

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राजस्थान में संकट

कोरोना के दौरान आंशिक लॉकडाउन खुलने के बाद ही राजस्थान की राजनीति में हलचल मच गई. जुलाई के महीने में राजस्थान की राजनीति में तूफान आ गया. सत्ताधारी पार्टी  दो धड़ों  में बंट गई. एक तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे तो दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट. इस दौरान पूरे कयास लगाए जा रहे थे कि ज्योतिरादित्य सिधिंया की तरह सचिन पायलट भी बीजेपी में शामिल हो जाएंगे. पार्टी से नराज चल रहे पायलट और उनके 18 विधायकों ने राजस्थान सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था. जिसके बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री पद और प्रदेश अध्यक्ष से बर्खास्त कर दिया गया. इल्जाम ऐसे भी लग रहे थे कि कांग्रेस पार्टी में युवाजोश को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है जिसके कारण पार्टी में इतनी सारी परेशानियां हैं. लेकिन सचिन पायलट ने सारे आरोपों पर विराम लगाते हुए राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी सारी समस्याएं रखी. इससे पहले सचिन पायलट के सोशल मीडिया प्रोफाइल से उनके राजनीतिक पद को हट दिया गया था.

 

नई शिक्षा नीति का विरोध

जुलाई महीने के अंत में बीजेपी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए नई शिक्षा नीति को लॉन्च किया गया. जो साल 2021 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगी. शिक्षा में इतना बड़ा परिवर्तन 34 साल किया गया है. लेकिन नई शिक्षा नीति ने कई लोगों को निराश किया है. जिसका जमकर विरोध किया जा रहा है. सबसे पहला विरोध तो निजीकरण को लेकर है. स्टूडेंट्स, शिक्षाविद् और जानकार लोगों का कहना है इस तरह का ढांचा शिक्षा को और महंगा कर रहा है. गरीब लोग पहले से ही शिक्षा से दूर है और इस  तरह की नीति से वह और ज्यादा शिक्षा से दूर हो जाएंगे. दूसरा विरोध मातृभाषा की अनिवार्यता पर है. इस पर  ज्यादातर लोगों का कहना है कि जब नौकरी अंग्रेजी से आसानी से मिलती है तो इसकी स्वीकृरिता को खत्म क्यों किया जा रहा है. जबकि पढ़ाई का मतलब ही नौकरी पेशा करना है.

 

राम मंदिर का निर्माण

दशकों से चली आ रही राम मंदिर की मांग पर इस साल विराम लग गया है. बीजेपी ने अपने दूसरे कार्यकाल में अपने वायदे के पूरा करते हुए राम मंदिर का शिलान्यास कर दिया है. 5 अगस्त 2020 को दोपहर 12.40 मिनट पर प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर की नींव रखी. इसके बाद ही राममंदिर का काम शुरु हो चुका है. साल 2022 को इसे पूरा करने का प्रयास है. लंबे समय से लंबित यह काम साल 2020 के इतिहास में दर्ज में हो चुका है.

 

बिहार चुनाव

पूरे साल कोरोना का कहर चलता रहा. लेकिन इसका जरा से भी असर चुनाव में देखने को नहीं मिला. अक्टूबर-नवंबर में  बिहार में हुए विधानसभा चुनाव ने राजनीति में युवा जोश  को प्रदर्शित किया. त्रिकोणीय मुकाबले के बीच युवा चेहरों को  बिहार में और ज्यादा पहचान मिली. आरजेडी के तेजस्वी यादव ने एकदिन में सबसे ज्यादा 19 रैलियां की. वहीं दूसरी ओर लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद उनके सुपुत्र चिराग पासवान ने बिहार चुनाव में पार्टी की कमान संभाली. एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा. सीट भले ही न लाई पाई हो लेकिन चिराग ने युवाओं के बीच अपनी एक छाप छोड़ी है. पहली बार बिहार की राजनीति में कदम रखने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी भले ही चुनाव में कुछ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई हो. लेकिन बिहार की राजनीति में उनकी एंट्री हो चुकी है. इस चुनाव के दौरान वह खुलकर सरकार की नीतियों का विरोध करते हुई दिखाई दी है. बिहार में 125 सीटों के साथ विजय प्राप्त करने वाली एनडीए की सरकार है. नीतीश कुमार सातवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं. 85 सीटों के साथ आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी और 84 सीटों के बाद बीजेपी ने बिहार ने अपने पांव मजबूत कर लिए हैं. वहीं 19 सीटों में विजय के साथ लेफ्ट ने एकबार फिर बिहार में वापसी की है.

 

दोस्ती में दरार

नए कृषि कानूनों को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. दिल्ली को सभी बॉर्डर को किसानों ने घेर रखा है. किसान लगातार इस कानून को वापस लेने  की मांग कर रहे हैं. किसानों का विरोध प्रदर्शन  सितंबर महीने से ही शुरु हो गया था. पंजाब, हरियाणा में लगातार किसान अपने-अपने क्षेत्र में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस बीच जब उनकी बात को नहीं माना गया तो किसानों ने नवंबर 26 को दिल्ली के लिए कूच कर लिया. इस पहले बीजेपी की सहयोगी पार्टी ने नए कृषि कानून के खिलाफ पार्टी से अलग हो गई. बीजेपी और अकाली दल की 22 साल की दोस्ती में दरार आ गई. बढ़ते विरोध के बीच सितंबर के महीने में केंद्रीय मंत्री हरसिमरन कौर बादल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.

 

 

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बिहार चुनाव में कहीं सीट को लेकर बनी बात कहीं अभी भी है राग

                   महागठबंधन में कांग्रेस को मिली 70 सीटें


बिहार में चुनाव का आगाज शुरु हो गया है.  सितंबर के आखिरी सप्ताह में आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया था. राज्य में तीन चरणों में चुनाव होगें. तारीख का ऐलान होने के बाद से ही  पार्टियों के गठबंधन की चर्चा भी बहुत जोरों शोरों से चल रही है. राज्य में मुख्य रुप से तीन राजनीतिक गठबंधन हैं. जिनमें सीटों को लेकर लगातार मामला कहीं बन रहा है तो कहीं बात बनाने की कोशिश की जा रही है.

कांग्रेस की 70 सीटों पर बनी बात

गठबंधन की पहली कड़ी में आज महागठबंधन ने अपनी 243 सीटों के बंटवारे का ऐलान कर दिया है. आज शाम पटना में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने प्रेस कांफ्रेस कर सीटों के बंटवारे की घोषणा की. महागठबंधन में आरजेडी को 144, कांग्रेस 70, सीपीएम 4, सीपीआई 6, सीपीआई माले 19 सीटें दी गई है. जबकि हेमंत सोरेन और वीआईपी को राजद अपने कोटे से सीट देगी.

महागठबंधन से वीआईपी हुई अलग

सीट बंटवारों के बीच बात न बनती देख वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी प्रेस कांफ्रेंस से उठकर चले गए. इस बीच वीआईपी के कार्यकर्ताओ की झड़प शुरु हो गई. अध्यक्ष मुकेश सहनी ने महागठबंधन छोड़ने का ऐलान कर दिया. उन्होंने राजद पर अति पिछड़ों की  पीठ पर में खंजर घोंपने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि अति पिछड़ा समाज होने के कारण राजद ने धोखा दिया. गौरतलब है कि वीआईपी आने वाले विधानसभा चुनाव में 25 सीटों के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री की मांगकर रहा था और जबकि प्रेस कांफ्रेस में यह बताया गया कि उसे राजद के कोटे से उन्हें सीट दी जाएगी.

एनडीए में नही बन रही बात

महागठबंधन के सीटों के बंटवारे के लेकर रास्ता साफ हो गया है. लेकिन एनडीए में अभी राग जारी है. लोजपा के चिराग पासवान सीटों को लेकर अलग ही राग अलाप रहे हैं. खबर लिखे जाने तक एनडीए के साथ सीट के लेकर कोई भी रास्ता साफ नहीं हो पाया है. खबरें यहां तक है कि लोजपा ने एनडीए से अलग होने का फैसला कर लिया है. वहीं दूसरी ओर बिहार बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव और देवेंद्र फडनवीस चार्टर्ड प्लेन से आज दिल्ली वापस चलें गए हैं. आज सुबह चिराग पासवान ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री की तारीफ की लेकिन गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं की है.