पूरा उत्‍तर प्रदेश रंगा केसरिया रंग से, चला मोदी का जादू

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के‍सरिया रंग में रंगा भारत देश


उत्‍तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के रुझान आज आ चुके हैं. रुझानों के अनुसार, उत्‍तर प्रदेश में बीजेपी बहुमत के साथ अपनी सरकार बना रही है. समाजवादी पार्टी – कांग्रेस पार्टी गठबंधन और मायावती की पार्टी बसपा काफी पीछे नजर आ रहे है. एक बार फिर यूपी में पीएम नरेन्‍द्र मोदी की लहर दौड़ी गई है और उस लहर ने विपक्ष को धराशायी कर दिया है.

आइए जानें यूपी में किस को कितनी सीटें मिली.

उत्‍तर प्रदेशः 403 सीटें
बीजेपी – 309 सीटें
सपा-कांग्रेस गठबंधन – 62 सीटें
बीएसपी – 18 सीटें
अन्‍य – 14 सीटें

यूपी में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

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इस बार यूपी के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 300 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है. इस जीत के बाद यूपी के लखनऊ बीजेपी दफ्तर में बीजेपी के समर्थकों में जश्न का माहौल बना हुआ है. केसरिया रंग से होली खेली जा रही है. अगर बीजेपी का यूपी में इतिहास देखा जाए तो साल 1991 बाद बीजेपी की ये बड़ी जीत है. 1991 में 221 सीटों से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.

बीजेपी नेताओं की जीत पर प्रतिक्रिया

  • बीजेपी की मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, कि यह पीएम मोदी के नेतृत्व और अमित शाह की कड़ी मेहनत की जीत है.
  • योगी आदित्‍यनाथ ने कहा, कि लोगों ने सपा-कांग्रेस के गठबंधन को नकार दिया है. जनता ने विकास के लिए वोट किया है.
  • अमित शाह ने ट्वीट करके भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं और प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को बधाई दी है.

आइए जानते हैं साल 1980 से साल 2012 तक का यूपी में बीजेपी का सीटों का इतिहास.

साल 1980 – 11 सीटें
साल 1985 – 16 सीटें
साल 1989 – 57 सीटें
साल 1991 – 221 सीटें
साल 1993 – 177 सीटें
साल 1996 – 174 सीटें
साल 2002 – 88 सीटें
साल 2007 – 51 सीटें
साल 2012 – 47 सीटें

जनता को पसंद नहीं आया यूपी के लड़कों का साथ

दरअसल, उत्‍तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस पार्टी के उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा और कई नारे लिखे गए, कि यूपी को ये साथ पसंद है. दोनों ने अपने आप को यूपी के लड़के बताया. चुनावी रैलियों में पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने दोनों के गठबंधन को दो कुनबों का गठबंधन कहा, मगर अखिलेश ने इस बात पर जोर दिया, कि ये गठबंधन दो कुनबों का नहीं, दो युवाओं का है.
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यूपी में नहीं चली भैय्या-भाई की जोड़ी

चुनावी रैलियों में अखिलेश यादव की पत्‍नी डिंपल यादव का जादू भी बहुत देखने को मिला. मगर चुनाव परिणाम में वो जादू नहीं दिखा. दरअसल, ऐसा माना जा रहा था, कि अखिलेश भैय्या और डिंपल भाभी की जोड़ी यूपी में युवाओं और महिलाओं के सपनों को साकार करेगी और यूपी की जनता इस जोड़ी पर विश्‍वास करेगी. मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ.

मायावती के वोटबैंक पर सवाल

बसपा ने इस चुनाव में मुस्लिम वोटरों को लुभान की जमकर कोशिश की और पार्टी ने अबतक के अपने विधानसभा चुनावों के इतिहास में सबसे ज्यादा 97 मुसलमान उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. साल 2017 के चुनावों में मायावती की सीटें कुछ इतना नीचे पहुंच गई हैं, कि उन्‍हें देखते हुए सवाल उनके वोटबैंक पर उठना तय हो गया है. सवाल ये है, कि क्या लोकसभा चुनावों 2014 के बाद, एक बार फिर उत्‍तर प्रदेश के दलित वोटरों ने किसी का वोटबैंक बनने से साफ इंकार कर दिया है.

आप को बता दें, यूपी में सात चरणों में चुनाव हुए थे. पहले चरण के लिए 1 फरवरी को वोट डाले गए थे. दूसरे चरण के लिए 15 फरवरी को, तीसरे चरण के लिए 19 फरवरी को, चौथे चरण में 53 सीटों पर 23 फरवरी को वोटिंग हुई. पांचवें चरण के लिए 27 फरवरी को, छठे चरण के लिए 4 मार्च को, सातवें चरण में 40 सीटों पर 8 मार्च को वोट डाले गए थे.

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