एन बिरेन सिंह बने मणिपुर के मुख्‍यमंत्री

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एन बिरेन सिंह

एन बिरेन सिंह बने मणिपुर के मुख्‍यमंत्री


पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पहली बार बीजेपी की अपनी सरकार बनाने जा रही है. बीजेपी के मुख्‍यमंत्री के तौर पर ‘एन बिरेन सिंह’ आज शपथ ले ली है.60 सीटों में से कुल 21 सीटें जीतने वाली बीजेपी मणिपुर राज्‍य में एनपीएफ और अन्य दलों के साथ से सरकार बनाने जा रही है.

एन बिरेन सिंह
एन बिरेन सिंह

आइए जाने मणिपुर में किस को कितनी सीटें मिली.

कांग्रेस को मिली 28 सीटें

बीजेपी को मिली 21 सीटें

नेशनल पीपुल्‍स पार्टी को मिली 4 सीटें

नगा पीपुल्‍स फ्रंट को मिली 4 सीटें

जनशक्ति पार्टी को मिली 1 सीट

टीएमसी को मिली 1 सीट

आइए जानें कैसे मिली बीजेपी को बहुमत.

मणिपुर में 60 सीटें हैं, जिसमें बहुमत ने 31 सीटें चाहिए. वहीं बीजेपी के पास कुल 21 सीटें हैं. पार्टी के पास नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के चार विधायकों, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार विधायकों, लोक जनशक्ति पार्टी और टीएमसी के 1-1 विधायकों ने पार्टी के साथ जुड़ने का फैसला किया है और समर्थन देने का ऐलान किया है. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी का एक विधायक ने भी बीजेपी को समर्थन का ऐलान किया है.

शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए ये सब

मणिपुर में पहली बीजेपी अपनी सरकार बनने जा रही है, इससे उत्साहित बीजेपी के तमाम बड़े नेता आज शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए हैं. बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह, संगठन मंत्री राम लाल, राम माधव और वेंकैया शपथ समारोह में शामिल हुए हैं. वहीं प्रकाश जावड़ेकर पहले ही इम्फाल में मौजूद थे.

राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला पर कांग्रेस का हमला

वहीं इस सबके बीच विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीत कर बनी बड़ी पार्टी कांग्रेस ने राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला पर पक्षपात का आरोप लगाया है. दरअसल, कांग्रेस का कहना है, कि सिंगल लार्जेस्ट पार्टी होने से उन्हें सरकार बनाने का पहले मौका मिलना चाहिए था. आप की जानकारी के लिए बता दे, गोवा में भी कांग्रेस 40 में से 17 सीटें जीत कर बड़ी पार्टी बनी थी, मगर वहां बीजेपी ने ही अपनी सरकार बनाई है. गोवा के राज्‍यपाल पर भी कांग्रेस ने पक्षपात का आरोप लगाया है.

आइए जानें मणिपुर के मुख्‍यमंत्री के बारे में.

बीजेपी ने ‘एन बीरेन सिंह’ को सीएम चुना है. वैसे बीजेपी के विधायक ‘थोंगम विश्वजीत’ भी इस पद के दावेदार थे, मगर आखिर में बाजी बीरेन सिंह के हाथ लगी है. बीरेन सिंह का राजनीतिक करियर साल 2002 में शुरू हुआ था.

बीरेन सिंह का राजनीतिक करियर

नॉन्गथोमबाम बीरेन सिंह राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर रहे हैं. 56 साल के बीरेन ने अपना राजनीतिक करियर साल 2002 में शुरू किया था. साल 2002 में उन्‍होंने डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी (डीआरपीपी) के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ा था. डीआरपीपी ने 2002 के विधानसभा चुनाव में अपने 23 उम्‍मीदवारों को उतारा था, मगर जीत सिर्फ दो को ही मिली थी, जिसमें से एक बीरेन सिंह थे.

विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद बीरेन सिंह और उनकी पार्टी कांग्रेस के गठबंधन का हिस्सा बन गए. पूर्व सीएम ‘इबोबी सिंह’ की सरकार में बीरेन मंत्री बनाए गए थे. साल 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले डीआरपीपी का कांग्रेस में विलय हो गया था. साल 2007 में बीरेन सिंह ने पहली बार कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा और वह जीत भी गए. मगर अक्टूबर 2016 में कांग्रेस का हाथ छोड़कर वो आधिकारिक तौर पर बीजेपी में शामिल हो गए.

बीरेन सिंह ने एक दैनिक अखबार बनाया था

एक वक्‍त में बीरेन ने स्थानीय भाषा में एक दैनिक अखबार की शुरुआत की थी और अखबार चलाने के लिए उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली, दो एकड़ जमीन बेच दी थी. मगर राजनीति में आने के लिए उन्होंने साल 2001 में ही अपना अखबार दो लाख रुपये में बेच दिया था.

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