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कैसा होता है प्यार में लड़कियों का हाल

प्यार में लड़कियों का हाल


हम जब भी किसी भावना या एहसास को महसूस करते है तब हम कुछ बदलाव आने शुरू हो जाते है। अब वो बदलाव हमारी आदतें, व्यक्तिव और जीवनशैली सभी में झलकती है। वो एहसास कब उनके जीवन का हिस्सा बन जाता है उनको खुद को पता नहीं चलता हैं। वैसे ही प्यार में लड़कियों का हाल भी कुछ अलग ही होता है।

जानते है कैसा होता है प्यार में लड़कियों का हाल:-

  • सूक्ष्मता बढ़ती है

लड़कियां अक्सर प्यार होने के बाद ज़्यादा कोमल हो जाती है। वो बहुत ही सुक्ष्म ढंग से इशारे करती है और अपने प्यार का इज़हार करती है। वो बहुत आगाह हो जाती है और बिना खुद को बेवक़ूफ़ साबित किये अपने प्यार की तरफ इशारा करती है।

  • आपका ज़्यादा ख्याल रखती है

लड़कियों को जब प्यार हो जाता है तब वो उस लड़के के लिए चिंतित होना शुरू हो जाती है। वो उसकी हर छोटी बडी बात का ख्याल रखती है और हर समय उसके हाल की ख़बर लेती रहती है। और जब वो उस से बात नही कर पाती तो वो उस लड़के के दोस्तों से उसकी सलामती के खबर ले लेती है।

प्यार में लड़कियो का हाल
  • चेहरे के भाव बदलते है

होठों पर मुस्कान और गालों ओर हर समय लाली यूँही थोड़ी ना आ जाती है। प्यार का कुछ ऐसा ही असर होता है। लड़कियां जिससे प्यार करती है, वह अक्सर उनके सामने शर्मा और घबरा जाती है। और उसी वजह से उनके चेहरे के भाव भू बदल जाते है।

  • तोहफा देना

सही समय आने पर, लड़कियां अक्सर जिस लड़के से प्यार करती है उसे कुछ न कुछ तोहफा ज़रुर देती है। आपकी पसंद के अनुसार वो कुछ भी ही सकता है। लड़कियां अक्सर लड़को को घडी तोहफे में देती है। या फिर कुछ उनकी पसंद के अनुसार, सही समय आने पर देती है

  • बचकानी हरकते करना

कहते है की हम चाहे जितने भी बड़े हो जाए हमारे अंदर का बच्चा तब तक नहीं मरता जब तक हम उसे नही मारते। और लड़कियां वेसे ही लड़को और दूसरे लोगो के सामने बहुत ही सभ्य बर्ताव करती है अपर अगर किसी के सामने वो बचकानी हरकते करती है तो इसका मतलब है की उन्हें उस व्यक्ति से लगाव है।

  • सवाल करना

वैसे तो लड़कियां जानी ही सवाल करने के लिए है, पर जब किसी लड़की को प्यार होता है तब वो उस लड़के के पसंद, नापसंद, इच्छाएं, आशाएं और हर चीज़ के बारे में जानना चाहती है तभी वो उस लड़के से कई सवाल पूछती रहती है।

प्यार की भावना ही ऐसी है कि, हिसको भी इसका एहसास होता है वो किसी न किसी ढंग से बदल जाता है। अब लड़के हो या लड़कियां सब में किसी न किसी तरह से परिवर्तन होता ही है। तभी प्यार में लड़कियों का हाल कुछ ऐसा ही होता है।

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जानिए क्या होती है गुरु की महिमा

गुरु की महिमा


किसी के भी जीवन में गुरु की महिमा का व्याख्या कोई नहीं कर सकता। वास्तव में गुरु की महिमा का पूरा वर्णन कोई नहीं कर सकता। पौराणिक काल से ही गुरु ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ समाज के विकास का बीड़ा उठाते रहे हैं। गुरु शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है- ‘गु’ का अर्थ होता है अंधकार (अज्ञान) एवं ‘रु’ का अर्थ होता है प्रकाश (ज्ञान)।
गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं। हमारे जीवन के प्रथम गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। जो हमारा पालन-पोषण करते हैं, सांसारिक दुनिया में हमें प्रथम बार बोलना, चलना तथा शुरुवाती आवश्यकताओं को सिखाते हैं। अतः माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है। भावी जीवन का निर्माण गुरू द्वारा ही होता है।

गुरु की महिमा

शिक्षक में दो गुण निहित होते हैं – एक जो आपको डरा कर नियमों में बाँधकर एक सटीक इंसान बनाते हैं और दूसरा जो आपको खुले आसमा में छोड़ कर आपको मार्ग प्रशस्त करते जाते हैं। एक सफल शिक्षक वही है जो सकारात्मक हो और जो अभी उम्मीद का दामन ना छोड़े अजर अपने शिष्य को भी वही सिखाये। अगर एक गुरु ही उम्मीद छोड़ तो वो अपने शिष्य को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित नहीं कर पाते।

एक शिक्षक या गुरु सिर्फ विद्यालय तक सीमित नहीं रहता। हमे हमारी पूरी ज़िंदगी में कई शिक्षक मिलते है जो किसी इंसान का रूप नहीं लेते। समय, अनुभव और किताबें भी हमारे जीवन में एक गुरु का किरदार निभाते है। हम जहाँ से और जिनसे सीखते रहते है, वही हमारे गुरु बनते रहते है।

समय और ज़िन्दगी भी गुरु होती है।

विद्यालय में मिलने वाले गुरु हमें पढाई के अलावा भी कई चीजो का ज्ञान देते है। वही माता पिता और दोस्त भी हमारी ज़िन्दगी के लिए एक ख़ास गुरु होते है। हमारी ज़िन्दगी अपने आप में एक शिक्षा का स्त्रोत होती है। समय और ज़िन्दगी से बेहतर गुरु कोई नहीं होता।इससे हम जितना सीखेंगे उतना बेहतर होता हैं। आखिर यही तो गुरु की महिमा होती है।

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क्या है वो परिवार के नियम जो कभी भूलने नहीं चाहिए

परिवार के नियम


कार्यक्षेत्र से लेकर जिंदगी में हर जगह कुछ नियम होते है। उसी प्रकार हर घर के भी कुक नियम और कानून होते है। किस समय तक घर वापिस आना है, कब कैसे और क्या करना है ये सब चीज़े हम कुछ सोच समझ कर करते है। पर कुछ नियम ऐसे होते है जो ना तो कहीं लिखे जाते है और ना कभी बताए जाते है। ये होते है परिवार के नियम । इन्हें हम समय और अक्ल के साथ साथ सीखते है।

जानते है कि क्या होते है वो नियम :-

    1. दिन के किसी भी एक वक़्त खाना साथ में बैठ कर खाए। इस व्यस्त जीवन में परिवार के लिए समय निकालने का इससे बेहतर तरीका कुछ नहीं हो सकता है।
    2. आप एक दूसरे से जो वादे करे उससे बिना भूले पूरा करे। कभी भी परिवार में किसी को भी किया कोई भी वादा तोड़े नही। परिवार में हर व्यक्ति एक दूसरे से ही उम्मीद करता है। वो किसी बाहर वाले से उम्मीद नहीं करते।
परिवार का नियम
    1. कभी परिवार वालो का भरोसा ना तोड़े। आप का परिवार आप पर बहुत ज़्यादा भरोसा करता है। कभी कुछ ऐसा ना करे जिससे आपका परिवार शर्मिदा हो या आपके परिवार का आप पर से भरोसा ख़त्म हो जाए।
    2. परिवार में सब की इज़्ज़त करे। भले ही आपको वो व्यक्ति पसंद हो या नहीं हो, आप कभी किसी किसी को बेइज़्ज़त नहीं कर सकते। आपको सदैव सबकी इज़्ज़त करनी है भले ही आप उनको नापसंद भी क्यों ना करते हो।
    3. हमेशा सच का साथ दे। परिवार में अक्सर ऐसे मौके आते है जब आपको सही और गलत में चुनना पड़ता है। और उसी में अक्सर हम उनका साथ देते है जिन पर हम ज़्यादा भरोसा करते है फिर चाहे वो गलत क्यों ना हो। पर हमें हमेशा सच और सही का साथ देना चाहिए।
परिवार होता है ख़ास
  1. सबके साथ हमेशा विनम्र रहे। फिर चाहे परिवार के लोग कैसे हो। एक परिवार के हो कर भी हर व्यक्ति का व्यक्तित्व अलग होता है। हमेशा सबके साथ विनम्र रहे और सभी को अपनाए। हर व्यक्ति के भिन्नता को कबूल करे।
  2. सुख दुख में हमेशा साथ रहे। कहते है कि परिवार की एक व्यक्ति की ताकत होता है और परिवार ही हर समय हमारा सहारा बनता है। उसी प्रकार हमे भी अपने परिवार का सहारा बनना है।

परिवार से ज़्यादा ख़ास और ज़रूरी कोई और नहीं होता। परिवार के नियम हम समय के साथ अपने आप सीख जाते है। ज़रूरी है परिवार की एहमियत को समझना और इन्ही नियमो को समझ कर उनका पालन करना।

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जानिए आपको कौन से खुद से किए वादे क्यों होते है अहम

खुद से किए वादे


हम अक्सर दुसरो को किए वादे पूरे करने में इतने व्यस्त रह जाते है की खुद से किए वादे भूल ही जाते है। खुद ही खुद की उम्मीदे पर खरे नहीं उतर पाते। हम खुद से किए वादों को भूल कर, दुसरो को इतनी ज्यादा एहमियत दे देते है कि हम अपना वजूद ही कहीं गुमा बैठते है। वादों की एहमियत हर कोई समझता है, पर वादा पूरा करना बहुत ही मुश्किल काम होता है।

खुद से हमेशा ये 5 वादे ज़रूर करे :-

  1. आप कभी अपने बीते हुए कल को,  अपने आने वाले कल को ख़राब नहीं करने देंगे। जो बीत गया उसका असर कभी आगे आने वाली अच्छी चीज़ों पर नहीं पड़ने देंगे।
  2. लोगो की बाते और विचार सुनेंगे पर उनको खुद पर हावी नहीं होने देंगे। आपको खुद के लिए जो सही लगता है वही करेंगे।
  3. सपने पूरे करने की राह में चाहे जितनी भी मुश्किलें हो, आप कभी रुकेंगे नहीं। चाहे जो हो जाए आपने अपनी मंज़िल तक बिना हार माने पहुँच कर रहना है।
  4. खुश रहना सीखेंगे
  5. ज़िन्दगी आपको चाहे जितनी बार भी मात दे, आपको कभी हार नहीं माननी है। गिरना है, गिर कर फिर से उठना है पर कभी भी हार कर रुकना नहीं है।
  6. आज का दिन पूरी तरह से जिए। फिर आने वाले कल में क्या हो कोई नहीं जानता। इसलिए जैसे जीना चाहो वेसे जियो। बिना किसी की परवाह किए।

यहाँ पढ़ें : जानिए क्या होता है कपटी और सुशील लोगो में फर्क

इन वादों को निभाना और पूरा करना है ज़रूरी है क्योंकि ये वादे हम अपने लिए करते है, अपने आप से करते है। जानते है कि क्यों इन वादों को निभाना है ज़रूरी:-

  1. अगर आप खयड से किए वादों को निभाते है तो आपकी ज़िन्दगी बहुत ही सुलझी हुई रहती है। आप सही गलत में फर्क कर पाते है।
  2. आप खुद को प्रेरित करते है। जब आप में किसी भी प्रकार की उत्साह और प्रेरणा नहीं बचटी उस समय ये वादे ही आपको आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करते है।
  3. खुद से किए वादे
  4. खुद से किए वादे से ही पता लगता है कि आपकी सोच कैसी है और आप मंज़िल तक कैसे पहुँचना चाहते है।
  5. आप बहुत खुश रहते है। जब आप दूसरों से उम्मीदे न रख कर, खुद से उम्मीदे रखते और उन पर खरे उतरते है ,तो उसकी खुशी और उसका एहसास ही बहुत अलग होता है।
  6. आप एक बेहतर इंसान बनते है। आप जब खुद की ज़रूरतों को ज़िन्दगी को समझने लगते है तभी आप खुद से कुछ वादे कर पाते है। और जब आप खुद को समझने लगते है तब आप खुद को बेहतर बनाते रेहते है।

ज़िन्दगी में आगे बढ़ना है तो खुद से किए वादे को ज़रूर निभाए। हम लोगो से वादे करके उन्ही में फँस जाते है। लोगो से निकल कर, आने बारे में भी सोचे। और खुद से किए वादे ज़रूर निभाए।

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जानिए क्या होता है कपटी और सुशील लोगो में फर्क

कपटी और सुशील लोगो में फर्क


लोगो को समझना बहुत ही मुश्किल है। उनकी कथनी और करनी में उतना ही फर्क होता है जितना दिन और रात में होता है। लोग क्या कहते है, क्या करते है और क्या दुसरो को समझाते है इन तीनों में ही बेहत्त फर्क होता है। कपटी लोग अक्सर हर बात को बढ़ा चढ़ा कर और तिल का ताड़ बना कर बात करते हैं वही सुशील लोग बड़ी ही समझदारी से हर बात करते है।

कपटी और सुशील लोग

कैसे समझे कपटी और सुशील लोगो में फर्क :-

  1. कपटी लोग हमेशा ही सिर्फ उनकी ही इज़्ज़त करते है जो किसी उच्च पद पर होते है। जिन लोगो के पास कुछ ताकत होती है वही उनके लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी होते है। वहीँ सुशील लोगो के लोगो का दर्जा नहीं देखते वो विना किसी में फर्क करे, हर किसी की इज़्ज़त करते है।
  2. कपटी लोग खुद को बेहतर साबित करने के लिए दूसरों को निचा दिखाते है। वो सिर्फ लोगो की ग़लतियाँ और उनके नुक्स देखते है। और सुशील लोग हर किसी से विनम्र होते है। वो लोगो के काम की तारीफ़ करते है और उन्हें आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करते है।
  3. आदतो में अंतर
  4. विनम्र लोग हर किसी की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर होते है। वो कभी लोगो में भेदभाव नही करते। वो लोगो की ज़रूरत की अनुसार उनकी मदद करते है। पर कपटी लोग हर चीज़ में आना फायदा देखते है। वो मदद भी उन्ही लोगो की करते है जहाँ पर उनको फायदा दिखता है।
  5. जहाँ कपटी लोग दुसरो को लुभाने में व्यस्त रहते है वही सुशील लोग मेहनत करके नाम कमाते है। वो लोगो पर अपना समय व्यर्थ नहीं करते पर हमेशा खुद पर काम करते रहते है। कपटी लोग खुद पर काम नहीं करते पर गलत तरीको से लोगो पर अपनी छवि बना कर काम करते है।
  6. सफलता के मायने दोनों के लिए अलग होते है। जहाँ कपटी लोग अपनी छोटी सी छोटी सफलता के भी गुणगान करते फिरते है वहीँ सुशील लोग अपनी बड़ी से बड़ी कामयाबी के बारे में कीड़ी को नहीं बताते। वो शाँत रहते है और सफलता और हार से सीखते रहते है।

लोगो को समझना काफी मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं। उनकी जीवनशैली और उनकी हरकतों से और उनकी आदतों से उनकी प्रवृति और नीयत को समझा जा सकता है।

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सेहत

क्या सच में जीवन का आधार है संतुलित आहार

संतुलित आहार


एक स्वस्थ संतुलित आहार में सभी खाद्य समूहों से खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। वे भोजन जिनमें संतृप्त वसा, ट्रांस फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है वे शरीर में कोलेस्ट्रोल के स्तर में वृद्धि करते हैं और स्वस्थ आहार की श्रेणी में नहीं आते। यदि आप अपनी हड्डियों को स्वस्थ व मजबूत रखना चाहते हैं तो एल्कोहोल से परहेज में ही आपकी भलाई है।

संतुलित आहार

जब आपके शरीर को आवश्क कैल्शियम की मात्रा नहीं मिलती तो वह हड्डियों से आवश्क कैल्शियम लेना शुरू कर देता है। और यदि यह बार-बार होता है तो हड्डियां पतली और भंगुर हो जाती हैं। यही नहीं मधुमेह की रोकथाम में एक स्वस्थ और संतुलित आहार बड़ी भूमिका निभाता है। स्वस्थ संतुलित आहार एक आदर्श वजन बनाए कखने के लिए आवश्यक होता है। मोटापा ह्रदय तथा अन्य कई गंभीर रोगों को कारण बन सकता है, इसलिए अपने वजन को नियंत्रित रखें।

जीवन का आधार

आपका खान पान इसमें एक बडी भूमिका रखता है। अपने भोजन में एक फल, कुछ सलाद (गाजर, ककड़ी, मूली, ब्रोकोली आदि), साबुत अनाज, दाल, डेयरी प्रोडक्ट्स और कुछ प्राकृतिक तेल जरूर शामिल करें। नाश्ते में आप फल (केला, सेब, नाशपाती), दही, भुना हुआ स्नैक्स अपने साथ रख सकती हैं। अन्य विकल्प इडली, खांडवी, ढोकला, उबले हुए आलू, चाट, भेलपुरी, भुना हुआ चना और मूंगफली आदि हो सकते हैं। आप अपने साथ कुछ सूखे हुए मेवे जैसे अखरोट, बादाम, पिस्ता आदि भी रखें। इन सब खाद्य पदार्थ को अपने नियमित भोजन का हिस्सा बनाएं। भोजन संतुलित रहेगा तो जीवन भी संतुलित रहेगा।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार खाने की जरूरत होती है। स्वस्थ संतुलित आहार शरीर को मजबूत बनाता है तथा रोगों से लड़ने के लिए उसकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। साथ ही संतुलित आहार दिमाग को तेज तथा स्वस्थ बनाता है, जिससे आप मानसिक रूप से भी मजबूत बनते हैं। स्‍वस्‍थ संतुलित आहार करने से आप घर तथा दफ्तर दोनों जगह बेहतर काम कर पाते हैं। स्‍वस्‍थ भोजन के अभाव में थकान और अन्‍य कई प्रकार के रोग घेर सकते हैं।

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क्या आप समझते है दोस्ती का महत्व

दोस्ती का महत्व


हमारे जन्म होने से ही हम अपनी ज़िन्दगी की शुरुआत कई रिश्तों से करते है। किसी के बच्चे होते है, किसी के पोता/पोती या भांजा/भतीजी। पर इन सभी रिश्ते से पहले हमारे माता पिता के साथ शुरू होती ही हमारी दोस्ती की शुरुआत। वो सिर्फ हमारे माता पिता नहीं होते पर वो हमारे दोस्त भी होते है। बड़े होने पर जब हम स्कूल जाते है तब भी हम कई दोस्त बनाते है। ये दोस्त बनाने का सिलसिला ज़िन्दगी के अंत तक चलता है। दोस्त और दोस्ती का महत्व समझना बहुत ज़रूरी है।

सच्ची दोस्ती

किसी रिश्ते का महत्व हम जब तक नहीं समझेंगे तब तक हम कभी उस व्यक्ति और उस रिश्ते को इज़्ज़त नहीं दे पाएँगे।दोस्ती बहुत ही प्यारा रिश्ता होता है। हमारा दोस्त हमें परिवार की तरह समझता है। कब एक दोस्त परिवार का हिस्सा बन जाता है किसी को आता भी नहीं चलता। खुशनसीब होते है वो जिनको सच्चे दोस्त बहुत जल्द मिल जाते है। वरना अक्सर ये होता है कि हम मतलब और स्वार्थ का नकाब ओढ़े लोग दोस्ती का मज़ाक बना देते है।

यहाँ पढ़ें : बातें जो आपके बॉयफ़्रेंड को नही होंगी पसंद

सच्चे दोस्त वो होते है जो हर मुश्किल में आपका साथ देते हैं। वक़्त जैसा भी हो वो हमेशा आपके साथ खड़े होते है। आपको समझते है और आपको किसी भी बात के लिए दोषी ठहराने की बजाए आपकी हर स्तिथि को समझते है। आपको सही गलत के बारे में बताते है। माँ की तरह प्यार करते है, पिता की तरह डाँटते है और फिर भाई बहन की तरह मज़ा करते है।आपका परिवार आपका दोस्त होता है और आपका दोस्त आपका परिवार। तभी हर समय में वो आपके साथ खड़े होते है।

परिवार का हिस्सा होते है दोस्त

सच्ची दोस्ती का महत्व उतना ही है जितना ज़िन्दगी जीने के लिए खाने की। खाना खाएं बिना आपके शरीर को ताकत नहीं मिलती और सच्ची दोस्ती के बिना आपकी आत्मा को ताकत नहीं मिलती। एक अच्छा और सच्चा दोस्त किसी भी रूप में मिल सकता है। अगर कोई और नही तो आपकी माँ या आपके पिता या आपके भाई/ बहन भी सच्चे दोस्त का किरदार निभा सकते है। वो आपको दोस्ती का महत्व भी समझा सकते है।

भाग्यशाली होते है वो जो ऐसे दोस्तों को समझ और परख कर, उन्हें हमेशा अपने ज़िन्दगी में संजो कर रखते है। उनके साथ पुरानी यादें भी मीठी होती है और भविष्य के ईरादे भी मज़बूत होते है। एक अच्छा और सच्चा दोस्त मिलना बहुत मुश्किल होता है। अगर आपके पास ऐसा कोई है जो आपकी कमियों के बावजूद भी आपके साथ खड़ा होता है तो उसे कभी ना खोये। ऐसे लोग बहुत ही मुश्किल से मिलते है।

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जानिए ज़िन्दगी में कैसे लोगो से बच कर रहना चाहिए

ऐसे लोगो से बच कर रहना!


ज़िन्दगी में समझदार और मूर्ख, दोनों ही प्रकार के लोग मिलते है पर ये हम पर निर्भर करता है कि हम कैसे इन मूर्ख को पहचान कर, इनको अपनी ज़िन्दगी से दूर रखते है। बेवकूफ और मूर्ख लोगो के लिए किसी भी प्रकार का तर्क काम का नहीं होता। वो ना तो सही बात में विश्वास करते है और ना ही तर्कों में। ऐसे लोगो को समझना और कुछ समझाना, दोनों ही बहुत मुश्किल होता है। ऐसे लोगो से बच कर रहना ही बेहतर होता है।

अगर आपका कभी भी ऐसे लोगो से पाला पड़ता है, तो याद रखिए, ऐसे लोगो के साथ आप अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे है। जितना जल्दी हो सके इनसे पीछा छुड़ाए और अपनी ज़िन्दगी में आगे बढे। अब अगर इन लोगो को पहचानना हो, तो वो कुछ इस प्रकार होते है:

  • घमंडी

ऐसे लोगो को अपनी हर बात का बहुत घमंड होता है। आप अपनी किसी भी सफलता के बारे में उन्हें बताएँगे तो वो आपकी तुलना अपनी किसी कहानी से करेंगे। उन्हें खुद पर बहुत घमंड होता है।

लोग हो सकते है खतरनाक
  • बातूनी

बातूनी से हमारा मतलब वो नहीं जो बहुत बाते करता हो, पर उन लोगो से है जो दूसरों की ज़िंदगी के बारे में आपसे बात करते रहे। ऐसे लोग बेसिर-पैर की बाते करते है और उन्हें हर किसी की ज़िन्दगी में हो रहे हर चीज़ की जानकारी रखनी होती है और यही जानकारी ये सबके साथ बाँटते फिरते है।

  • ईर्षालु

जो लोग दूसरों से ईर्ष्या करते है वो कभी किसी के नहीं हो पाते। वो दुसरो के कारण नही पर अपने आपसे परेशान होते है। वो खुद से और  खुद की ज़िन्दगी से कभी संतुष्ट नहीं हो पाते। उनकी नज़र दुसरो के काम पर होती है खुद पर नहीं।

  • झूठे

झूठ बोलने से आज तक कभी किसी का फायदा नहीं हुआ है। और जो लोग झूठ बोलते है वो सबसे खतरनाक होते है। जो लोग झूठ बोलने के आदि होते है वो अक्सर लोगो का भरोसा तोड़ते है। उन पर यकीन कभी नहीं करना चाहिए और उनसे दूर ही रहना चाहिए।

ऐसे लोगो से बच कर रहे
  • विपत्ति ग्रस्त

ऐसे लोगो से ज़िम्मेदारी की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। ऐसे लोग कभी अपनी गलती कबूल नहीं करते और हमेशा दूसरों पर ऊँगली उठाते है। वो हमेशा खुद को लाचार और निर्दोष प्रस्तुत करते है पर असल में गलती उन्ही की होती है।

  • नियंत्रक

नियंत्रक वो होते है जो हर चीज़ को अपने बस में करना चाहते है। उनको हर काम, हर व्यक्ति और हर छोटी बड़ी चीज़ अपने काबू में करनी होती है। वो खुद को सर्वाधिक महत्वपूर्ण समझते है, तभी वो हर चीज़ अपना नियंत्रण करना चाहते है।

जब भी किसी व्यक्ति से आपको नकारात्मकता मिले या महसूस हो, तब समझ जाइयेगा की वो व्यक्ति आपकी ज़िन्दगी और खुशियों के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे लोगो से बच कर रहना चाहिए। ऐसे लोगो का व्यक्तित्व ही उनका चरित्र दर्शा देता है। इसलिए सावधान रहे और हर व्यक्ति को अपनी ज़िंदगी में महत्व ना दे। लोगो की भोली सूरत के पीछे अक्सर शैतान छुपा होता है, जो ना चाहते हुए भी आपकी ज़िन्दगी के लिए अच्छा नहीं होता।

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कैसा होता है लड़के और लड़कियों के लिए ब्रेकअप के बाद का दौर

ब्रेकअप के बाद का दौर


कहते है कि हर अँधेरी रात के बाद उज्जवल समय ज़रूर आता है पर सुहानी सुबह के बाद एक बार अँधेरा भी छाता है। वैसे तो, इनमें से कुछ भी हमारे हाथ में नहीं होता। ज़िन्दगी का कोई भी हिस्सा हम अपनी मर्ज़ी से नहीं लिख सकते। अगर ऐसा होता तो शायद हम अपनी ज़िन्दगी में गम को कोई हिस्सा ही ना देते। हर रिश्ते को अपनी मर्ज़ी से लिखते और उसमे किसी भी प्रकार की गलतफेहमिया, लड़ाइयाँ सब निकाल देते।

कुछ ऐसा ही होता है रिलेशनशिप्स में। जब प्यार की शुरआत होती है तब सभी कुछ बहुत ही अच्छा एयर सुहाना सा लगता है पर जब उस रिश्ते में दरार आणि शुरू होती तब वही सुहानापन बोझ सा लगने लगता है। और फिर जब ये बोझ संभलता नहीं तब प्यार खत्म, रिश्ता खत्म और ब्रेकअप। वो सभी चीज़े जो कभी ख़ुशी देती थी आज वही परेशानी का कारण बन जाती है।

जानते है कैसा होता है ब्रेकअप के बाद का दौर :-

  • झटका

अब ब्रेकअप लड़का करे या लड़की इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ब्रेकअप होता है और इस बात का असर दोनों पर ही बराबरी का पड़ता है। दोनों के लिए ही इस बात को स्वीकार करना थॉद मुश्किल हो जाता है।

ब्रेकअप के बाद
  • अस्वीकृति

इस बात को स्वीकार करना थोड़ा मुश्किल होता है। किस के लिए आसान होता है इस बात को स्वीकार करना की जिसके साथ उन्होंनो इतना अच्छा और प्यार समय बिताया, अब वो उनके साथ नहीं होंगे। बस फिर रोना- धोना और इमोशनल होना, यही रह जाता है।

  • अकेलापन

ज़ाहिर सी बात है कि पहले हम अपना अधिकतर समय अपने पार्टनर के साथ बिताते थे। चाहे वो साथ में हो या फिर फ़ोन पर बात करते हुए। हम उनके साथ हर समय किसी न किसी तरह से टच में रहते थे, पर अब कोई नहीं होता। हम बहुत अकेले हो जाते हैं।

अकेलापन
  • गुस्सा

हम इतनी सारी भावनाओ को महसूस कर रहे होते है कि हम एक हद के बाद गुस्सा करना शुरू कर देते है। ये सभी भावनाएं कब गुस्से में परिवर्तित हो जाती है, इसे भी समझना मुश्किल है। पर ये अकेलेपन की भावना हम में तनाव पैदा कर देती है जो अंत में गुस्से का रूप ले लेती है।

  • रीबाउंड

इसमें आप अपने भूतकाल को भूल कर आगे बढ़ जाते है। इसमें हम इस बात को स्वीकार कर लेते है कि वो गुज़रा हुआ कल था। शायद ये हमारे नसीब में नही था इसलिए नहीं मिला। इस दौर में हम आगे बढ़ने की कोशिश करते है और एक नयी शुरुआत करते है।

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क्या आप जानते है कि क्यों लड़के ब्रेकअप करते हैं

क्यों लड़के ब्रेकअप करते है


आजकल की युवा पीढ़ी में जहाँ प्यार आई लव यू तक सीमित रह गया है वही प्यार और रिलेशनशिप को कोई गंभीरता से नही लेता। कब किसी को प्यार होता है, कब ब्रेक अप और फिर कब किसी और से प्यार हो जाता हैं, ये समझना बहुत मुश्किल है। आखिर कोई कैसे, इतनी जल्दी किसी और ये शिद्दत वाला प्यार कर सकता है? और चलो प्यार कर भी लिया तो ब्रेकअप इतनी आसानी से कोई कैसे कर सकता है?

माना ये जाता है कि आजकल अधिकतर लड़कियां ही ब्रेकअप करती है। अब ये मान्यता क्यों है और इस बात का क्या कारण इसका भी कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नही है। बस लोगों की बाते है और उनकी अपनी मान्यताएं। युवा पीढी तो ये तक मानती है कि लड़के ब्रेकअप करते ही नही है। पर अगर वो करते बाई तो इसका मतलब होता है कि बात कुछ ज़्यादा ही बड़ी रही होगी। पर मेरा मानना है कि हर किसी का अपना कारण होता है। ब्रेकअप को सही ठहराने के लिए लड़का या लड़की का आधार लेना बहुत ही गलत है।

जानते हैं कि क्यों लड़के ब्रेकअप करते हैं :-

  • वो खुद को कष्ट नही देना चाहता होगा

ये हर इंसान की आदत होती है कि वो खुद को किसी भी प्रकार के दर्द या कष्ठ से दूर रखना चाहता है। लड़के, किसी भी आम इंसान की तरह अक्सर अपनी या दूसरे व्यक्ति की भावनाओं के कारण काफी भ्रांत या कन्फ्यूज्ड रहते है। इसी अस्पष्टता के कारण वो खुद को किसी भी प्रकार के कष्ट से दूर रखते है।

यहाँ पढ़ें : रिलेशनशिप में कभी न अनदेखी करें ये बातें

  • वो आपके साथ अपना भविष्य नहीं देखता

लड़के अक्सर अपने भविष्य के बारे में सोचते है। वो भले ही दिखाते या बताते ना हो पर वो अपने भविष्य को लेकर काफी गंभीर होते है और उनका मानना होता है कि अगर वो अपने भविष्य में आपको नहीं देखते तो वो रिश्ता समय बर्बाद करने के बराबर है। और समय बर्बाद करने से अच्छा अलग होना है।

  • आप उनकी बात नहीं सुनती

हर रिश्ते मे ज़रूरी होता है कि दोनों व्यक्ति एक दूसरे की बात सुने और एक दूसरे को समझे। पर अगर किसी भी रिश्ते में लड़कियां सिर्फ अपनी सुनाते रहे है, लड़को की ना सुने और ये उम्मीद करे की वो हमेशा आपका साथ देगा तो ऐसा नहीं होता है।

  • आप उनकी ज़िन्दगी में बहुत दखल देती है

एक सम्पूर्ण परिवार वाले व्यक्ति की भी अपनी एक निजी ज़िन्दगी होती है। ये उसकी आम ज़िन्दगी का ही एक छोटा सा हिस्सा होता जहाँ वो खुद के साथ समय बिताता है और इस समय में वो जो भी करता है वो उसकी खुद की संतुष्टि और ख़ुशी के लिए करता हैं। पर जब आप इस समय में भी अपने लिए समय मांगेंगे तो वो लड़का ज़रूर आपको छोड़ कर चला जाएगा।

  • आप उसकी सुनने से ज़्यादा अपने दोस्तों की सुनती है

लड़कियां अक्सर ये गलती करती है। और ये हरकत अक्सर लड़को को पसंद नहीं आती। हर बात जाकर अपने दोस्तों को बताना और फिर उन्ही की सलाह सुनना और मानना लड़को को अक्सर बहुत परेशान कर देता है। और जब ये बात हद से ज़्यादा होने लगती है तब लड़के इर्रिटेट हो कर ब्रेकअप कर लेते है।

लड़कियों की ही तरह लड़के भी एक रिश्ते में अपनी स्पेस की उम्मीद करते है और चाहते है कि उनको और उनकी ज़िन्दगी को भी उतनी ही इज़्ज़त मिले जिनती उन्हें मिलनी चाहिए। लड़के अगर ब्रेकअप करते नहीं है तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो सही उर गलत में फर्क नहीं कर सकते और अपनी स्पेस के लिए सही फैसला नहीं ले सकते। और इसलिए लड़के करते है ब्रेकअप।

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