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भारत में करोना महामारी या भुखमरी: आखिर प्रवासी मजदूरों को कैसे फायदा देगा 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज ?

“खास आर्थिक पैकेज” प्रवासी मजदूरों की कैसे मदद करेगा ? जानिए कुछ खास बातें…


पूरी दुनिया की तरह भारत भी कोरोना महामारी का सामना कर रहा है, देश में जहां पहले के मुकाबले ज्यादा नौकरियों का दावा किया जा रहा है वहीं लॉकडाउन के चलते लोग बड़ी संख्या में बेरोजगार हो चुके हैं . जिससे सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर जूझ रहे हैं.  क्योंकि ना ही उनके पास रुपए हैं ना ही खाना, लाखों कर्मचारी अपने घर लौट रहे हैं, वो भी पैदल, इससे साफ पता चलता है कि प्रवासी मजदूरों को केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से मदद नहीं मिल पा रही हैं
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक पैकेज की घोषणा की. जिसके बाद आवंटन को समझाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
सरकार की ये पहल -आत्मनिर्भर भारत – निश्चित रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे लेकर जाएगी, लेकिन कुछ सवाल हैं जिनका जवाब जानना बेहद जरूरी हैं-
1. यह पैकेज प्रवासी मजदूरों की कैसे मदद करेगा ?
2. सभी सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए क्या घोषणा की है और उन्हें क्या-कुछ मिलेगा ?
3. यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि सच में जरूरतमंदों तक मदद पहुंच रही है ?
एक रिपोर्ट के अनुसार राहत पैकेज ज्यादातर मजदूरों तक नहीं पहुंच रहा, लॉकडाउन का तीसरा चरण चल रहा है वहीं चौथे चरण को लेकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिए हैं, सबसे बड़ा सावाल है कि, क्या जरूरतमंदों के लिए सभी तैयारियां पूरी है या नहीं, इसी तरह काफी सवाल उठते हैं?

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गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने एक रिपोर्ट में बताया कि कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने के लिए प्रवासी मजदूरों समेत प्रत्येक गरीब व्यक्ति के लिए 1.7 खरब वित्तीय पैकेज की घोषणा की गई थी, ताकी मजदूरों को अपने घर वापसी ना करनी पड़े ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि, आखिर क्यों गरीब मजदूर अपने गांव की ओर भाग रहे हैं ?, वो भी  पैदल… वास्तविक्ता तो यह है कि, उन्हें अभी तक कोई मदद नहीं मिली है, इसलिए वो सब हारकर अपने गांव ही लौट रहे हैं . मजबूर गरीब लोगों की तस्वीरें ये साफ बयां कर रही है.
कुछ जगह सरकार सहारनीय काम भी कर रही है- अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल तक राज्यों ने 21,064 राहत शिविर लगाए, जिसमें करीब 6,66,291 व्यक्तियों को आश्रय प्रदान किया गया और 230 लाख व्यक्तियों को भोजन प्रदान किया गया.
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सरकार ने काफी अच्छे कदम भी उठाए हैं जो सहारनीय भी है, वहीं कमजोर आर्थिक वर्ग के लोगों के लिए पैकेज का एलान किया है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोरोना के चलते लॉकडाउन से कोई भूखा नहीं रहेगा. सरकार इसका इंतजाम करेगी. सरकार गरीब लोगों समेत प्रवासी मजदूर के खाते में सीधे पैसे डालेगी. यह केंद्र से 11,000 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष सहायता के लिए है. इसके अलावा, हर रोज 3 भोजन प्रतिबंधित केंद्र में शहरी बेघर लोगों के लिए प्रदान किए जाएगें.
वित्त मंत्री ने 3,500 करोड़ रुपये की लागत से अगले 2 महीनों के लिए अनुमानित 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए फ्री में खाने की भी घोषणा भी की है.
अब देखना यह है कि आखिर सरकार पीड़ित जरूरतमंदों तक मदद पहुंचा पाएगी या नहीं ?
सरकार ने शहरी गरीबों और प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए 11000 करोड़ की घोषणा की है, क्या इससे उन लोगों की परेशानी खत्म होगी?

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लाइफस्टाइल

अपने फेस शेप के मुताबिक विंटर हेयरस्टाइल अपनायें

अपनाये यह हेयरस्टाइल

अपने फेस शेप के मुताबिक विंटर हेयरस्टाइल अपनायें
अधिकतर विंटर सीजन में बाल काफी रुखे हो जाते हैं जिसमें हेयरस्टाइल की संभावना कम हो जाती है लेकिन अगर थोड़ा समय दिया जाए तो आप अपने बालों को स्टाइलिश लुक दे सकती हैं। जी हां, विंटर में बहुतों का मानना होता है कि हेयरस्क्याटाइल करने का कोई फायदा नहीं क्योंकि बॉडी का हर एक पार्ट कवर होता है लेकिन आपके बाल भी आपकी पर्सनैलिटी में एक्स्ट्रा स्टाइल एड करते हैं। विंटर में हेयरस्टाइल एक्सपेरिमेंट किया जा सकता है जैसें कि, साईड ब्रेड: यह एक आसान हेयर स्टाइल तो नहीं है लेकिन ये काफी ट्रेंड में है।

हेयरस्टाइल

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आईए जानते है कैसे करे यह हेयरस्टाइल?

∙ साईड ब्रेड: ड्राई हेयर को पहले किसी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करके स्मूद कर लें। सारे बालों को सिर के टॉप हिस्से में इकट्ठा करके एख पोनी बने लें। अब इस पोनीटेल को उपर से लेकर नीचे तक ब्रेड्स बनालें। अंत में ब्रेड्स को एक इलास्टिक बैंड से सिक्योर कर लें। अब इसे अपने शोल्डर के एक साइड कर लें। ओवल फेस शेप के उपर ये हेयरस्टाइल काफी सूट करता है, जब बाल मीडियम लॉंग हों साथ में घने भी हों।
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∙ बॉब स्टाइल: ड्राय हेयर पर हीट प्रोटेक्टेंट स्प्रे लगायें। कर्ल वाले भागों पर मीडियम साइज के कर्लिंग आयरन का इस्तेमाल करें। हर एक कर्ल को पिन कर्ल क्लिप से अटैच करते जायें जब तक सारे कर्ल ना बन जायें। अब बाद में क्लिप को हटा दें। अब इसे लूज छोड़ कर उसे अपने अनुसार शेप में डाल दें। अब इसे फ्लेक्सिबल होल्ड हेयरस्प्रे के द्वारा सेट करें। लॉंगर फेस शेप के उपर ये स्टाइल सूट करता है।
∙ फीमेल पॉम्प: ऐसे हेयरस्टाइल के लिए सिर के टॉप हिस्से में बालों की डेन्सिटी अच्छी होनी चाहिए। ड्राय हेयर को पहले स्मूद कर लें। बालों को उपर उठाने और वॉल्युम लाने के लिए ब्लो ड्राय का इस्तेमाल करें। पूरे बालों के उपर टेक्सचर प्रोडक्ट अप्लाय करें। बालों के साइड से कंघी करें औऱ इसे सिर के उपर की तरफ मोड़ लें। अब अपने हाथों से उपर के एक डायरेक्शन की तरफ मोड़ते हुए स्टाइल दें। हेयरस्प्रे से इसे फिनिशिंग टच दें। चौड़े फेस शेप के उपर ये हेयरस्टाइल सूट करेगा।

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सुझाव

सौतेला बच्चा भी अब अपना

सौतेले माता-पिता अपने बच्चों को राष्ट्रीय दत्तक संस्था के जरिए गोद ले सकते हैं


अब सौतेले माता-पिता अपने बच्चों को राष्ट्रीय दत्तक संस्था के जरिए गोद ले सकते हैं. साथ ही उनके साथ अपने संबंध को कानूनी रूप दे सकते हैं. ये नए नियम 16जनवरी से प्रभावी हुआ है. इस कानून के तहत रिश्तेदार भी बच्चों को गोद ले सकेंगे. केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के सीईओ लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार ने कहा, ‘भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है जो सौतेले माता या पिता और सौतेले बच्चे के बीच वैधानिक संबंध की व्याख्या करता हो.

माता-पिता

और पढ़े : किन बातों का करे अपने माता पिता का शुक्रिया

· सौतेले बच्चे का सौतेले माता या पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता. बच्चा भी अपने सौतेले माता या पिता की उनकी वृद्धावस्था में देखभाल करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं होता. इन्हीं खामियों को हम दूर करना चाहते हैं.’ कारा केंद्र सरकार के अधीन एक संस्था है जो देश में सभी दत्तक प्रक्रियाओं की निगरानी और नियमन करती है. पहले केवल अनाथ, छोड़ दिए गए या संरक्षण छोड़े गए बच्चे को ही गोद लिया जा सकता था लेकिन अब सरकार ने गोद दिए जा सकने वाले बच्चों की परिभाषा को और व्यापक करते हुए इसमें किसी संबंधी का बच्चा, पूर्व विवाह से पैदा हुआ बच्चा या जैविक माता-पिता द्वारा जिस बच्चे का संरक्षण छोड़ दिया गया हो उन्हें भी शामिल कर दिया है जिसके चलते ऐसे बच्चों को भी अब गोद लिया जा सकता है.

· सौतेले माता या पिता के मामले में दंपत्ति, जिसमें से एक बच्चे का जैविक जनक हो उसे बाल दत्तक संसाधन सूचना व मार्गदर्शन प्रणाली में पंजीयन करवाना होगा,लेकिन गोद लेने के लिए दूसरे जैविक जनक की मंजूरी की जरूरत होगी और दत्तक आदेश प्राप्त करने के लिए अदालत में आवेदन देना होगा. इसी तरह किसी संबंधी द्वारा गोद लेने के मामले में संभावित माता-पिता को बच्चे के जैविक माता-पिता से मंजूरी लेनी होगी.

· यदि जैविक माता-पिता जीवित नहीं हैं तो बाल कल्याण समिति से इजाजत लेनी होगी. ये नियम किशोर न्याय अधिनियम 2015 से लिए गए हैं जिसमें ‘‘रिश्तेदार या संबंधी’’ शब्द की व्याख्या चाचा या बुआ, मामा या मासी, दादा-दादी या नाना-नानी’’ के रूप में की गई है. इन दो श्रेणियों में दत्तक प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए गोद लेने वाले संभावित माता-पिता के लिए आयुसीमा भी खत्म कर दी गई है.

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सामाजिक

बिना बोले समझें पुरुषों की ये फीलिंग्स…….

प्रेमिका समझें ये बातें


हमें पता है सभी पुरुषों का स्वभाव एक जैसा नहीं होता…. सभी अलग-अलग स्वभाव के होते है लेकिन फिर भी कुछ ऐसी बातें होती हैं जो हर पुरुष चाहता है कि उनकी प्रेमिका उनके बारे में जानें और उन्हे समझें। जैसे की पुरुषों को कई बार यह देखकर आश्चर्य होता है कि, महिलाएं कुछ बातों को संकेतो से प्रकट करती हैं या पुरुष का इंतजार करती हैं की वह खुद पहले उनसे आकर बात करें…. यह बातें पुरुषों को काफी अजीब लगती हैं। पुरुषों को अच्छा लगता है यदि कोई महिला आगे आकर वह बात कहती है जो वह चाहती है।

फीलिंग्स

आजकल अधिकतर पुरुषों को वे महिलायें ज्यादा अच्छी लगती हैं जो इस बात का इंतज़ार नहीं करती कि, पुरुष आकर उनसे पूछे कि वे क्या चाहती हैं।

∙ वह पुराने जमाने मे होता था जब पुरुष यह अपेक्षा करते थे कि, महिलाओं को शर्मीला और सहनशील होना चाहिए। लेकिन आजकल पुरुषों को यह सब पसंद नहीं आता। आईए जानते है इन सब के अलावा ऐसी ही कुछ बातें हैं जिनके बारे में पुरुष चाहते हैं कि महिलायें इन बातों को जानें…….

∙ वह पुराना जमाना था जब हमेशा पुरुष ही पहल करते थे आजकल अधिकतर पुरुषों को यह अच्छा लगता है कि महिला पहला कदम बढ़ाये।

∙ कई बार सड़क पर चलते समय पुरुष दूसरी स्त्री की तरफ देखते हैं तो इसका यह मतलब नहीं है कि वह उसमें रूचि ले रहा है या सुंदर नहीं है।

∙ वह हमेशा आपके बारे में सोचता रहता है लेकिन उसने आपसे कभी कहा नहीं है। कुछ पुरुष अपनी फिलींग को सही ढंग से व्यक्त नहीं कर पाते हैं जिससे महिलायें ऐसा सोचती हैं कि ऐसे पुरुषों के पास फीलिंग्स ही नहीं हैं।

∙ पुरुषों को सबसे ज्यादा गुस्सा तब आता है जब आप उन्हें उत्तेजित करके उन्हें बिना संतुष्ट किये छोड़ देती हैं।

∙ कभी कभी उन्हे आपके साइड में शांत बैठे रहना अच्छा लगता है। आपकी उपस्थिति में समय बिताना उनके लिए यादगार समय होता है, अगर वे शांत बैठे है या कुछ बोल नहीं रहे तो आपको उनकी फीलिंग्स समझनी चाहिए।

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सामाजिक

हमें जमीन पर बैठकर खाना क्यों खाना चाहिए…..

जमीन पर बैठकर खाने के फायदे


कहा जाता हैं कि वक्‍त के साथ-साथ खुद को बदलने में ही समझदारी है, लेकिन जमाने के साथ कई चीजें यूं ही नहीं चली आ रही हैं। उनके पीछे कुछ वजहें छिपी हैं, जैसे कि जमीन पर बैठकर खाने की भारतीय परंपरा को ही ले लीजिए। जमीन पर बैठकर खाने के पीछे कई फायदे भी छिपे थे जो शायद आपको नहीं पता….

आपने सुखासन योग के बारे में तो सुना ही होगा, जिसमें पालथी मारकर बैठते हैं। नीचे बैठकर खाते समय भी हम पालथी मारकर बैठते हैं जिससे हमारा शरीर लचीला बनता है और मन शांत रहता है। इसके अलावा जमीन पर बैठने से तनाव भी खत्‍म होता है।

जमीन पर बैठकर खाना

∙         जमीन पर बैठकर खाते समय हमारा शरीर आगे की तरफ झुकता है और फिर सीधी मुद्रा में आता है। ऐसे में हमारे शरीर में पाचन क्रिया भी सही रहती है और आप अपच की परेशानी से बच जाते हैं। इसलिए अगर मोटापे की समस्‍या से परेशान हैं तो फिर से जमीन पर बैठकर खाना शुरू कर दीजिए।

∙         मौजूदा जीवनशैली को देखते हुए लोगों में मोटापे की समस्‍या आम हो गई है, मगर आप यह जानकर जरूर हैरान रह जाएंगे कि जमीन पर बैठकर खाने से हमारा वजन भी नियंत्रित रहता है। पालथी मारकर बैठने से आपका दिमाग शांत रहता है और पूरा ध्‍यान खाने पर होता है। ऐसे में आप जरूरत से ज्‍यादा खाने से भी बचते हैं।

∙         जमीन पर बैठकर खाने से हमारे शरीर में खून का बहाव भी सही होता है और इस तरह दिल बड़ी आसानी से पाचन में मदद करने वाले सभी अंगों तक खून पहुंचाता है, लेकिन जब आप कुर्सी पर बैठ कर खाना खाते हैं तो यहां ब्लड सर्कुलेशन विपरीत होता है। इसमें सर्कुलेशन पैरों तक होता है, जो कि खाना खाते समय जरूरी नहीं होता है।

∙         एक और फायदा जो जमीन पर बैठकर खाने से होता है, वो हमारे शरीर से नहीं बल्कि हमारे पारिवारिक प्रेम से जुड़ा हुआ है। जमीन पर अपने परिवार के साथ बैठकर खाने से आपसी प्रेम व सामंजस्‍य बढ़ता है। यह एक पारिवारिक गतिविधि का हिस्‍सा होता है जब सभी लोग एक साथ बैठकर हंसी- खुशी खाना खाते हैं।

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सेहत

जानिये क्यों जरूरी होता है नाश्ते में सेब खाना ?

फल सेब से जुडी कुछ ख़ास बाते


यू तों हर तरह के फल फायदेमंद होते हैं पर सेब के फायेदे अपनी ही एक बात है. हम बचपन से ही ये बात सुनते आ रहे हैं कि हर रोज एक सेब खाने से डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ता है. ये बात वाकई सच है. अगर आप रोज सुबह उठकर एक सेब खाएं को कई तरह की बीमारियों से बच सकते हैं. सेब दुनियाभर में सबसे अधिक खाया जाने वाला फल है. इसमें पर्याप्त मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट और बीमारियों से लड़ने वाले तत्व पाए जाते हैं. सेब में कुछ ऐसे भी तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करते हैं. सेब खाने के ये नौ ऐसे फायदे हैं जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता होगा.

सेब

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सेब के कुछ फायदे

  1. स्वस्थ और सफेद दांतों के लिए.
  2. बढ़ती उम्र की वजह से मस्ति‍ष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को दूर करने के लिए.
  3.  सेब में भरपूर मात्रा में डाइट्री फाइबर्स पाए जाते हैं जो पाचन क्रिया को सही रखने में मददगार होते हैं.
  4. सेब का सेवन करने से कैंसर का खतरा कम होता है.
  5. सेब के नियमित सेवन से टाइप-2 मधुमेह होने का खतरा कम हो जाता है.
  6. सेब का सेवन करना दिल के लिए बहुत अच्छा होता है.
  7. सेब के नियमित सेवन से कब्ज की समस्या नहीं होती है.
  8. वजन को नियंत्रित करने के लिए भी सेब का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद होता है.
  9. सेब के नियमित इस्तेमाल से शरीर के भीतर मौजूद कई विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं.
  10. सेब में पेक्टिन जैसे फायदेमंद फाइबर्स पाए जाते हैं. हर रोज एक सेब खाने से कैंसर, हाइपरटेंशन, मधुमेह और दिल से जुड़ी बीमारियां नहीं होती…..

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सेहत

पैरों के पसीने और बदबू से पाएं छुटकारा

पैरों को बदबू से दूर रखे


सर्दियों के मौसम में दिनभर जूते-मोजे में रहने से पैरों में पसीना और बदबू आने लगती है. शरीर की दुर्गन्ध तो आप डियो और परफ्यूम लगाकर भी दूर कर लेते हैं लेकिन पैरों से आने वाली बदबू को दूर करने के लिए बाजार में कोई खास उपाय मौजूद नहीं है. कर्इ बार आपको अपने दोस्तों के बीच शर्मिंदा भी होना पड़ता है. लेकिन एक आसान उपाय से आप अपने पैरों के पसीने और बदबू को दूर भगा सकते हैं और ये खास उपाय है अदरक.

· अदरक में बेधने वाले गुण और सुखाने वाले गुण रक्षा गुण होते हैं जिनसे पैरों को सुखाने और बदबू को दूर करने में मदद मिलती है. इसके अलावा अदरक में डिटोक्सफाइ गुण भी होते हैं जिनसे पसीने को रोकने और पैरों को बदबू से दूर रखने में मदद मिलती है.

· अदरक डर्मिसाइडिन के उत्पादन में भी मददगार है, ये एक प्रोटीन है जो फंगल या बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है. आपको बता दें कवक और बैक्टीरिया ही पैरों में बदबू के मुख्य कारण होते हैं.

अदरक

 कैसे करें इस्तेमाल:-

· एक बड़ा अदरक लेकर उसका गाढ़ा पेस्ट बना लें. एक कप गर्म पानी करें और उसमें अदरक का पेस्ट मिला लें और पंद्रह मिनट तक छोड़ दें.

· रात को सोने से पहले रोजाना इस पानी से पैरों की मालिश करें. मालिश के बाद आप मोजे पहन सकते हैं. इसके अलावा पैरों में कोई बेहतर मॉश्चराइज़र लगाना मत भूलें.

· पैरों की स्किन अधिक सेंसिटिव होती है. इसलिए नियमित रूप से तेल से मालिश करने से पैरों को कोमल बनाने में मदद मिलती है….

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धार्मिक

कर्म बड़ा हैं या भाग्य जानने के लिए पढ़े

कर्म और भाग्य का भेद हैं पुराणों में


कर्म कर्म बड़ा हैं या भाग्य?, यूं दुनिया में दो तरह के लोग हैं एक वो जो भाग्य को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं. और दूसरे वो जो मानते हैं कि कर्म ही भाग्य का जनक है. ऐसे में ये बहस बदस्तूर सदियों से है. इस दुनिया में कर्म को मानने वाले लोग कहते हैं भाग्य कुछ नहीं होता. और भाग्यवादी लोग कहते हैं किस्मत में जो कुछ लिखा होगा वही होके रहेगा. यानी इंसान कर्म और भाग्य इन दो बिंदुओं की धूरी पर घूमता रहता है. और एक दिन इस जग को अलविदा कहकर चला जाता है. लेकिन यह भी सत्य है कि भाग्य और कर्म दोनों के बीच एक रिश्ता जरूर है. भाग्य और कर्म का भेद पुराणों में किस तरह बताया गया है वो जान कर आपको भी इस गुत्थी को सुलझाने में थोड़ी मदद मिलेगी. भाग्य और कर्म को बेहतर से समझने के लिए पुराणों में एक कहानी का उल्लेख मिलता है.

कर्म और भाग्य

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· जिसमे लिखा है कि एक बार देवर्षि नारद जी वैकुंठधाम गए, वहां उन्होंने भगवान विष्णु का नमन किया. नारद जी ने श्रीहरि से कहा, ’प्रभु! पृथ्वी पर अब आपका प्रभाव कम हो रहा है. धर्म पर चलने वालों को कोई अच्छा फल नहीं मिल रहा, जो पाप कर रहे हैं उनका भला हो रहा है.’तब श्रीहरि ने कहा, ’ऐसा नहीं है देवर्षि, जो भी हो रहा है सब नियति के जरिए हो रहा है.’ नारद बोले, मैं तो देखकर आ रहा हूं, पापियों को अच्छा फल मिल रहा है और भला करने वाले, धर्म के रास्ते पर चलने वाले लोगों को बुरा फल मिल रहा है. भगवान ने कहा, कोई ऐसी घटना बताओ. नारद ने कहा अभी मैं एक जंगल से आ रहा हूं, वहां एक गाय दलदल में फंसी हुई थी. कोई उसे बचाने वाला नहीं था.

· तभी एक चोर उधर से गुजरा, गाय को फंसा हुआ देखकर भी नहीं रुका, वह उस पर पैर रखकर दलदल लांघकर निकल गया आगे जाकर चोर को सोने की मोहरों से भरी एक थैली मिली. थोड़ी देर बाद वहां से एक वृद्ध साधु गुजरा. उसने उस गाय को बचाने की पूरी कोशिश की. पूरे शरीर का जोर लगाकर उस गाय को बचा लिया लेकिन मैंने देखा कि गाय को दलदल से निकालने के बाद वह साधु आगे गया तो एक गड्ढे में गिर गया. प्रभु!

· बताइए यह कौन सा न्याय है? नारद जी की बात सुन लेने के बाद प्रभु बोले, ’यह सही ही हुआ. जो चोर गाय पर पैर रखकर भाग गया था, उसकी किस्मत में तो एक खजाना था लेकिन उसके इस पाप के कारण उसे केवल कुछ मोहरें ही मिलीं.’ वहीं, उस साधु को गड्ढे में इसलिए गिरना पड़ा क्योंकि उसके भाग्य में मृत्यु लिखी थी लेकिन गाय के बचाने के कारण उसके पुण्य बढ़ गए और उसकी मृत्यु एक छोटी सी चोट में बदल गई. इंसान के कर्म से उसका भाग्य तय होता है. इंसान को कर्म करते रहना चाहिए, क्योंकि कर्म से भाग्य बदला जा सकता है.

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लाइफस्टाइल

बढ़ती उम्र के साथ घटती याद्दाश्त

याद्दाश्त को ऐसे रखे दुरुस्त

उम्र बढ़ने के साथ-साथ कई लोगों में याद्दाश्त कमज़ोर होने की शिकायत बढ़ने लगती है, अक्सर लोग छोटी-बड़ी ज़रूरी बातें भूल जाते हैं और घंटो उसी बात को याद करने में व्यर्थ कर देते हैं. अगर आप भी ऐसी समस्याओं से घिरे रहते हैं तो चिंता छोड़ दीजिये क्यूंकि हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी तरकीब जिसे इस्तेमाल में लाने के बाद आप अपनी कमज़ोर हो रही याद्दाश्त को तंदरुस्त कर सकते हैं.

याद्दाश्त

दरअसल हमारे प्रकृति ने हमें कुछ ऐसी चीज़ें तोहफे के तौर पर दी है जिन्हें खाने से आप अपनी याद्दाश्त को दुरुस्त रख सकते हैं.

  • याद्दाश्त बरकरार रखने के लिए बादाम को काफी उपयोगी माना जाता है. बादाम में मौजूद पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, मैंग्नीज, कॉपर और राइबोफ्लेविन आदि अल्जाइमर और अन्य मस्तिष्क संबंधी रोगों को दूर करने में मदद करते हैं. रात को पांच बादाम भिगोकर रख दें. सुबह उठकर उनका सेवन करने से दिमाग सक्रियता से कार्य करता है.
  • मांसाहारी लोगों के लिए मछली का सेवन दिमाग के लिए बहुत ही बढ़िया माना जाता है. मछली में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मौजूदगी के कारण इसे ब्रेन फूड भी कहा जाता है. मछली खाने से याद्दाश्त बढ़ती है.
  • अंडा भी याद्दाश्त को बरकरार रखने और स्मरण शक्ति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. खासकर इसका पीला हिस्सा, तो मस्तिष्क के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
  • डार्क चॉकलेट से भी याद्दाश्त दुरुस्त रहती है और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है. डार्क चॉकलेट में एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो दिमाग में रक्त संचार को ठीक रखते हैं.
  • ऑलिव ऑयल में मोनोसेच्युरेटेड फैट्स की पर्याप्त मात्रा होती है, जिनसे रक्त-शिराओं (ब्लड वेन्स) की सक्रियता बढ़ती है. रक्त शिराओं में सक्रियता से याद्दाश्त बढ़ती है.
  • सूरजमुखी के बीज विटामिन ई और सी की पर्याप्त मात्रा एकाग्रता और स्मरण शक्ति के लिए फायदेमंद होती है. सूरजमुखी के बीज विटामिन ई के अच्छे सोर्स होते हैं. अखरोट में एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
  • एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में मौजूद प्राकृतिक रसायनों को नष्ट होने से रोककर रोगों की रोकथाम करते हैं. इसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन मौजूद होता है. रोजाना अखरोट के सेवन से याद्दाश्त बढ़ती है
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लाइफस्टाइल

जानिये आँखों के लाइनर को सुंदर बनाने के कुछ टिप्स

लाइनर को कैसे बनायें सुंदर?

 आँखे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होती है जिससे हम इस रंग-बिरंगी दुनिया का मज़ा ले पाते हैं। ये आँखें ही हैं जो आपके लुक को और भी आकर्षक बनाती हैं लेकिन क्या आपको पता है के इन आंखों को और भी ज्यादा खूबसूरत बनाया जा सकता है। जी हाँ….

लाइनर को कैसे बनायें सुंदर

अपनी आँखों को आकर्षक बनाने के लिए आई लाइनर का इस्तेमाल कर सकती हैं। कई बार ऐसा होता है कि लाइनर लगाने के बाद वह आंखों और हमारे चेहरे को सूट नहीं करता। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि अधिकतर लड़कियों पता ही नहीं होता कि आंखों में लाइनर आंखों की शेप के अनुसार लगना चाहिए। इसलिए आज हम आपको बताएगें की आप अपनी आँखो के  लाइनरको कैसे बनायें सुंदर?

  • राउंड शेप्‍ड आईज राउंड शेप्‍ड आंखें बड़ी और चौड़ी होती हैं और ऐसी आंखों पर विंग्‍ड आईलाइनर बहुत अच्‍छा लगता है।
  • बादाम के जैसी आंखें अगर आपकी आंखों की बनावट बिल्‍कुल बादाम के आकार की जैसी है तो आप विंग्‍ड आईलाइनर स्‍टाइल को लगाएं और इसके एंड पर इसे फिल्‍क्‍स का अंदाज दें।
  • स्‍मॉल आईज स्‍मॉल आईज हैं तो कभी भी अपनी आंखों की बॉटम लाइन पर डार्क लाइनर लगाने से बचें।
  • लाइनर को टॉप लैश लाइन से पतली लाइन के साथ स्‍टार्ट करें और एंड पर आकर इसे हल्‍का मोटा कर दें।
  • बड़ी आंखों अगर आपकी आंखें बड़ी-बड़ी हैं तो आप कैट आईलाइनर और विंग्‍ड स्‍टाइल दोनों को कभी भी बेहिचक लगा सकती हैं।
  • उभरी हुई आंखें ऐसे आंखों का आकार थोडा़ उभरा होता है और पलकों का साइज भी काफी बड़ा होता है।
  • आप अपनी आंखों पर स्‍टार्टिंग लाइन से लेकर एंड कॉर्नर तक मोटा या पतला एक जैसा लाइनर लगा सकती हैं।
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