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Chitragupta Jayanti 2021: क्यों मनाई जाती है भाई दूज के दिन यमद्वितिया, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Chitragupta Jayanti 2021: जाने क्यों की जाती है भाई दूज के दिन चित्रगुप्त की पूजा


Chitragupta Jayanti 2021: दिवाली हिंदूओं का सबसे बड़ा त्योहार होता है। दिवाली पांच दिन का त्योहार होता है जोकि धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज के दिन खत्म होता है। कल यानी की 2 नवंबर को धनतेरस था और आज छोटी दिवाली है ऐसे में भाई दूज आने में बस कुछ ही समय बचा है। आपको बता दें कि पांच दिन के त्योहार में भाई दूज आखिरी दिन मनाया जाता है। इस बार भाई दूज का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा। क्या आपको पता है इस तिथि से यमराज और द्वितीया तिथि का सम्बन्ध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है तो चलिए आज हम आपको बताते है कि भाई दूज के दिन क्यों की जाती है चित्रगुप्त की पूजा। साथ ही जाने पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

जाने क्यों की जाती है चित्रगुप्त की पूजा

क्या आपको पता है भगवान चित्रगुप्त को देवलोक धर्म अधिकारी भी कहा जाता है। इतना ही नहीं इसके साथ ही बता दें कि चित्रगुप्त का संबंध लेखन कार्य से भी है। इसी कारण इस दिन कलम और दवात की भी पूजा की जाती है। क्या आपको पता है चित्रगुप्त का वर्णन स्कन्द पुराण, पद्य पुराण, ब्रह्मपुराण, यमसंहिता व याज्ञवलक्य स्मृति सहित कई ग्रंथों में भी किया गया है। हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार उत्पत्ति सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी की काया से हुई है। वहीं एक दूसरी कथा के अनुसार चित्रगुप्त की उत्पत्ति समुद्र मंथन से भी बताई जाती है मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्न प्राप्त हुए थे जिसमें इनकी उत्पत्ति लक्ष्मी जी साथ हुई। आपको बता दें कि चित्रगुप्त जी ने ज्वालामुखी देवी, चण्डी देवी और महिषासुर मर्दिनी की पूजा और साधना की थी।

Bhai Dooj 2021: जानें कब मनाया जाएगा भाई दूज, साथ ही जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

चित्रगुप्त पूजा तिथि

हिन्दू पंचांग के अनुसार चित्रगुप्त की पूजा 6 नवंबर 2021, शनिवार के दिन की जाएगी।

चित्रगुप्त की पूजा का शुभ मुहूर्त

6 नवंबर 2021, शनिवार को दोपहर 1:15 मिनट से शाम को 3:25 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त बना हुआ है।

द्वितीया तिथि प्रारंभ

हिन्दू पंचांग के अनुसार 5 नवंबर यानि की शुक्रवार को रात्रि 11 बजकर 15 मिनट पर द्वितीया तिथि प्रारंभ होगी। जोकि 6 नवंबर यानि की शनिवार को शाम को 7 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन राहु काल का समय कुछ इस प्रकार रहेगा।

राहुकाल: प्रात: काल 9 बजकर 26 मिनट से प्रात: 10 बजकर 47 मिनट तक।

आपको बता दें कि चित्रगुप्त का जन्म ब्रह्मा जी के चित्त से हुआ था। इनका कार्य प्राणियों के कर्मों के हिसाब किताब रखना है। मुख्य रूप से चित्रगुप्त की पूजा भाई दूज के दिन होती है। कहा जाता है कि इनकी पूजा से लेखनी, वाणी और विद्या का वरदान मिलता है।

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